Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

नीलदर्पण

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

नीलदर्पण बांग्ला का प्रसिद्ध नाटक है जिसके रचयिता दीनबन्धु मित्र हैं। इसकी रचना १८५८-५९ में हुई। यह बंगाल में नील विद्रोह का अन्दोलन का कारण बना। यह बंगाली रंगमंच के विकास का अग्रदूत भी बना। कोलकाता के 'नेशनल थिएटर' में सन् १८७२ में खेला गया यह पहला व्यावसायिक नाटक था। परिचय बांग्ला नाटकार दीनबन्धु मित्र का 1860 में प्रकाशित नाटक ‘नील दर्पण’ एक सशक्त नाट्य कृति ही नहीं, एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज भी है। इस नाटक में बंगाल में नील की खेती करने वाले अँग्रेजों द्वारा शोषण, भारतीय किसानों के ऊपर अमानुषिक अत्याचारों की बड़ी भावपूर्ण अभिव्यक्ति हुई है। नाटक की बंगाली समाज और अँग्रेज शासक दोनों में अपने-अपने ढंग से तीव्र प्रतिक्रिया हुई। यही नहीं, इस नाटक को पढ़कर उस जमाने की चर्च मिशनरी सोसाइटी के पादरी रेवरेंड जेम्स लौंग बहुत द्रवित हुए हैं और उन्होंने नीलकरों द्वारा शोषण के प्रतिवादस्वरूप नाटक का अनुवाद अँग्रेजी में प्रकाशित किया तो उन पर अँग्रेजी सरकार द्वारा मुकदमा चलाया गया और उन्हें एक महीने की जेल की सजा मिली। बांग्ला के पहले सार्वजनिक, टिकट बिक्री से चलने वाले मंच पर यह नाटक जब 1872 में खेला गया तो एक ओर दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी और दूसरी ओर अँग्रेजी अखबारों में इस पर बड़ी तीखी टिप्पणी हुई। 1876 में अँग्रेज सरकार द्वारा ड्रैमेटिक परफार्मेन्सेज कन्ट्रोल ऐक्ट लाना नील दर्पण जैसे नाटकों की विद्रोही भावना का दमन भी एक उद्देश्य था। इस नाटक का ऐतिहसिक महत्त्व तो है ही, इसके अलावा तत्कालीन अँग्रेजी शासन में न्याय के पाखंड और पक्षपातपूर्ण व्यवहार पर भी प्रकाश पड़ता है। बाहरी कड़ियाँ Full text of the play in English translation श्रेणी:बांग्ला साहित्य श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम