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अनुच्छेद 42 (भारत का संविधान)

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अनुच्छेद 42 भारतीय संविधान के भाग 4 (राज्य के नीति निदेशक तत्त्व) का एक महत्त्वपूर्ण अनुच्छेद है। यह अनुच्छेद राज्य को यह निर्देश देता है कि वह कार्यस्थलों पर काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाएँ सुनिश्चित करे तथा महिलाओं के लिए प्रसूति सहायता का उचित प्रबंध करे। एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना की दिशा में यह एक अत्यंत प्रगतिशील और मानवीय दृष्टिकोण वाला संवैधानिक प्रावधान है। संवैधानिक प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 42 के मूल पाठ के अनुसार: "राज्य काम की न्यायसंगत और मानवोचित दशाओं को सुनिश्चित करने के लिए और प्रसूति सहायता के लिए उपबंध करेगा।"भारत का संविधान, भाग ४, अनुच्छेद ४२ (विकिस्रोत पर उपलब्ध मूल पाठ) इस अनुच्छेद के मुख्य रूप से दो प्रमुख घटक हैं: मानवोचित और न्यायसंगत कार्य दशाएँ: राज्य का यह कर्तव्य है कि वह ऐसे कानून और नीतियाँ बनाए जिससे श्रमिकों का शोषण न हो। कार्यस्थलों पर सुरक्षित वातावरण, स्वास्थ्य सुविधाएँ, पीने का पानी और काम के निश्चित घंटे सुनिश्चित किए जाएँ, ताकि कोई भी व्यक्ति अमानवीय परिस्थितियों में काम करने को मजबूर न हो। प्रसूति सहायता: यह महिलाओं के अधिकारों और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए एक विशेष प्रावधान है। इसके तहत राज्य को गर्भवती कामकाजी महिलाओं के लिए सवेतन अवकाश और अन्य चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है ताकि गर्भावस्था के दौरान उनकी आजीविका प्रभावित न हो। विधायी कदम और प्रभाव यद्यपि राज्य के नीति निदेशक तत्त्व न्यायालयों द्वारा कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, फिर भी भारत सरकार और राज्य सरकारों ने अनुच्छेद 42 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समय-समय पर कई महत्त्वपूर्ण कानून बनाए हैं:भारत की राजव्यवस्था 2016 https://archive.org/details/indianpolityforc0000mlax एम. लक्ष्मीकांत मैक्ग्रॉ हिल एजुकेशन छठा संस्करण 8.1-8.3 978-9352603633 प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961: यह कानून अनुच्छेद 42 को लागू करने का सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके माध्यम से कामकाजी महिलाओं को मातृत्व अवकाश दिया जाता है। वर्ष 2017 में इस अधिनियम में ऐतिहासिक संशोधन करके सवेतन मातृत्व अवकाश को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया गया है, जो दुनिया में सबसे अधिक मातृत्व अवकाश देने वाले कानूनों में से एक है।https://labour.gov.in/maternity-benefit-amendment-act2017 प्रसूति प्रसुविधा (संशोधन) अधिनियम, 2017 श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार 14 अप्रैल 2026 hi कारखाना अधिनियम, 1948: यह कानून मज़दूरों के लिए कारखानों में हवा, रोशनी, साफ-सफाई और सुरक्षा के मानक तय करता है ताकि कार्यस्थल पर न्यायसंगत दशाएँ बनी रहें। इसके अलावा 'व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्तें संहिता, 2020' भी इसी अनुच्छेद की भावना से प्रेरित है। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ भारत का संविधान (विकिस्रोत) श्रेणी:भारत का संविधान श्रेणी:भारतीय राजनीति श्रेणी:संवैधानिक कानून श्रेणी:राज्य के नीति निदेशक तत्त्व