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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

देइदास

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देइदास Deidas देइदास India Rajasthan 29.269 74.685 inline, title राजस्थान में स्थिति ज़िला हनुमानगढ़ ज़िला प्रान्त राजस्थान देश 2848 2011 भाषा प्रचलित राजस्थानी, हिन्दी भारतीय मानक समय +5:30 Denik Bhaskarदेइदास (Deidas) भारत के राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ ज़िले में स्थित एक गाँव है।"Lonely Planet Rajasthan, Delhi & Agra," Michael Benanav, Abigail Blasi, Lindsay Brown, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012332"Berlitz Pocket Guide Rajasthan," Insight Guides, Apa Publications (UK) Limited, 2019, ISBN 9781785731990 हनुमानगढ़ जिला मुख्यालय से 57 किमी पूर्व स्तिथ है। यह एक ग्राम पंचायत है जिसमे 3 गाँव हैं - देईदास, भगवान और ढानीलाल खां। मुख्य धंधा खेती है, कुछ लोग सरकारी नौकरी करते हैं जिनमे अध्यापक ज्यादा हैं। गाँव मुख्यत जाटों का है परन्तु अन्य जातियां भी हैं जैसे - हरिजन,बावरी,नाई,खाती और ब्राहमण। गाँव पर एक उच्च माध्यमिक विद्यालय है, एक प्राथमिक विद्यालय, एक संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, एक प्राथमिक औषधालय, एक सहकारी भवन और एक पटवार घर और एक गिरदावर घर है। पिछले 20 वर्षों से सिंचाई हो रही है जिससे रबी की चना, सरसों व गेहूं तथा खरीफ की ग्वार, मोठ व मूंग जैसी फसलें होती है। सन् 1732 को धार नगरी(राजा भोज की नगरी ) से बराला गौत्र के कई परिवार ,पंवार राजा आनंदपाल प्रथम से नाराज हो कर गांव छोड़ कर मालवा होते हुए उत्तरी भारत में आ गए। सर्वप्रथम चित्तौड़ होते हुए सीकर जिले में आये । सीकर से चूरू जिले के चंगोई में एक परिवार आया। दो भाई देवाराम और दासुराम सन्1744 को बीकानेर रियासत में कार गुजारी करने हेतू सपरिवार आ गए। साथ में कई और परिवार भी आए थे। सर्वप्रथम दोनों भाइयों ने वर्तमान गांव से उत्तर की तरफ 1 किमी दूर ढाणी बना कर निवास किया। वहां एक कुआं भी खोदा गया। जिसके अवशेष 21वीं सदी के शुरुआत तक देखने को मिलते थे। लेकिन मीठा पानी नहीं मिला। सन् 1799 में छप्पनीया नामक दुर्भिक अकाल पूरे देश में बहुत जबरदस्त पड़ा था। दक्षिण मध्यभारत के मालवा ,विदर्भ से लोग पलायन कर पंजाब के दोआब क्षेत्र में कार गुजारी करने हेतू आने लगे थे। तब कई परिवार और आ कर यहां बस गए। कुछ समय बाद लोगों ने एक और पानी का कुआं खोदा जो वर्तमान देईदास गांव में स्थित है। सन् 1820-21 में हैजा नामक महामारी से सर्वप्रथम बस्से हुए घरों में हर घर में मौत होने के कारण लोगों ने अपनी ढाणियों (घरों) को खाली कर दिए(जिसके अवशेष हांडी मटके मिट्टी के बर्तनो की ठीकरी आज भी वहां मिलते हैं) घर या ढाणियों को खाली करने के पीछे अंधविश्वास भी रहा होगा क्योंकि हर परिवार में मौत हुई थी। उसके उपरांत दक्षिण में जो दूसरा पानी का कुआं खोदा था उसके पास अपनी अपनी ढाणी (घर) बना लिए थे। सर्वप्रथम दो भाईयो की ढाणी बसी हुई होने के कारण "देवा दासू"की ढाणी कहा जाता था। कालांतर में इन ढाणियों ने गांव का रूप ले लिया जिसे "देईदास" गाँव के रूप में जाना जाता है।