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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

जयसमंद

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मई 2016 Dhebar Lake ढेबर झील (जयसमंद झील) Khodiyo Ka Khera(Badisadri)Chittorgarh Jaisamandlake.jpg जयसमंद झील के विस्तारित दृश्य को चित्रित करते हुए चित्र, जो हवा महल के ऊपर से लिया गया है। Udaipur District, Rajasthan 24 16 N 74 00 E region:IN_type:waterbody inline,title reservoir Gomati River Gomati River India 9 mi km on 87 km2 sqmi on 102 ft on 30 mi km on 7 Islands ढेबर झील या जयसमंद झील पश्चिमोत्तर भारत के दक्षिण-मध्य राजस्थान राज्य के अरावली पर्वतमाला के दक्षिण-पूर्व में स्थित एक विशाल जलाशय है। यह राजस्थान के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। इस झील को विश्व की दूसरी तथा एशिया की पहली मीठे पानी की सबसे बड़ी कृत्रिम कृत्रिम झील होने का गौरव प्राप्त है। यह उदयपुर जिला मुख्यालय से 51 कि॰मी॰ की दूरी पर दक्षिण-पूर्व की ओर उदयपुर-सलूम्बर मार्ग पर स्थित है। अपने प्राकृतिक परिवेश और बाँध की स्थापत्य कला की सुन्दरता से यह झील वर्षों से पर्यटकों के आकर्षण का महत्त्वपूर्ण स्थल बनी हुई है। जयसमंद झील के साथ साथ यह जयसमंद वन्य जीव अभयारण्य भी है। मानसून का समय यहाँ घूमने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। झील के साथ वाले रोड पर केन से बने हुए घर बड़ा ही मनोरम दृश्य प्रस्तुत करते हैं। यह झील का सबसे सुन्दर दृश्य है। इसका निर्माण उदयपुर के महाराणा जयसिंह द्वारा 1687-1691 में निवास के लिए करवाया गया था। जयसमंद झील पर दो महलों का निर्माण करवाया गया मुख्य महल 'हवा महल' के नाम से जाना जाता है तथा यह महल रूठी रानी के महल के नाम से विख्यात है। किंतु जयसमंद झील पर दो महलों का निर्माण करवाया गया था एक महल (रूठी रानी का महल) जयसमंद झील के पाल से सामने की ओर पहाड़ पर दिखाई पड़ता है व एक महल (हवा महल) पाल किनारे स्थित पहाड़ पर है। पाल पर ही एक मंदिर का निर्माण करवाया गया जिसका नाम नरबदेश्वर महादेव मंदिर नाम से जाना जाता है। पाल के एक तरफ झील है तथा दूसरी तरफ भ्रमण के लिए बगीचे/उद्यान का निर्माण करवाया गया है। तथा महाराणा जयसिंह द्वारा इस झील के बीच में एक टापू का निर्माण भी करवाया था। जयसमंद झील के सबसे बड़े टापू का नाम बाबा का भाखड़ा व सबसे छोटे टापू का नाम प्यारी है। इतिहास right|thumb|300px|जयसमन्द झील उदयपुर के तत्कालीन महाराणा जयसिंह द्वारा 1711 से 1720 ईसवी के मध्य 14 हजार 400 मीटर लंबाई एवं 9 हजार 500 मीटर चौडाई में निर्मित यह कृत्रिम झील एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी का स्वरूप मानी जाती है।https://achhigyan.com/jaisamand-lake-history/ संग्रहीत प्रति 6 अक्तूबर 2017 https://web.archive.org/web/20171006211648/https://achhigyan.com/jaisamand-lake-history/ 6 अक्तूबर 2017 dead दो पहाडि़यों के बीच में गोमती नदी पर जिसमें 9 नदियाँ और 99 नाले गिरते हैं। जयसमन्‍द झील का मूल नाम ढेबर है , क्योंकि पास ही के एक गांव वीरपुरा का व्यक्ति जिसका नाम ढेबा डांगी था, उस व्यक्ति को जिंदा झील के बांध में दफनाया गया था । तीन बार बांध टूट गया तो चौथी बार किसी सदगुरु (साधु) के कहने पर है कार्य किया गया । ओर चौथी बार बांध नही टूटा । और महाराणा जयसिंह के नाम पर इसे 'जयसमन्द' कहा जाने लगा। जयसमन्‍द में पानी की आवक के लिए गौतमी व झामरी नदी और वगुरवा नाला प्रमुख हैं। नाले को स्‍थानीय भाषा में वेला भी कहा जाता हैं। thumb|900px|centre|जयसमंद झील का विहंगम दृश्य स्थापत्य thumb|हाथी की प्रतिमा, जयसमंद स्थापत्य कला की दृष्टि से बना बाँध अपने आप में आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। झील की तरफ़ के बाँध पर कुछ-कुछ दूरी पर बनी छह खूबसूरत छतरियाँ पर्यटकों का मन मोह लेती हैं। गुम्बदाकार छतरियाँ पानी की तरफ़ उतरते हुए बनी हैं। इन छतरियों के सामने नीचे की ओर तीन-तीन बेदियाँ बनाई गई हैं। सबसे नीचे की बेदियों पर सूंड़ को ऊपर किए खड़ी मुद्रा में पत्थर की कारीगरी पूर्ण कलात्मक मध्यम कद के छह हाथियों की प्रतिमा बनाई गई है। यहीं पर बाँध के सबसे उँचे वाले स्थान पर महाराणा जयसिंह द्वारा भगवान शिव को सर्मपित 'नर्मदेश्‍वर महादेव' का कलात्मक मंदिर भी बनाया गया है। एशिया की संभवत: सबसे बड़ी कृत्रिम झील के बाँध के उत्तरी छोर पर महाराणा फतहसिंह द्वारा निर्मित महल है, जिन्हें अब विश्रामगृह में तब्दील कर दिया गया है। दक्षिणी छोर पर बने महल "महाराज कुमार के महल" कहे जाते थे। दक्षिण छोर की पहाड़ी पर महाराणा जयसिंह द्वारा बनाए गए महल का जीर्णोद्धार महाराणा सज्जनसिंह के समय कराया गया था। उन्होंने इस झील के पीछे 'जयनगर' को बसाकर कुछ इमारतें एवं बावड़ी का निर्माण करवाया था, जो आबाद नहीं हो सके। आज यहाँ निर्माण के कुछ अवशेष ही नजर आते हैं। बाँध का निर्माण ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार यह भी बताया जाता है कि झील में पानी लाने वाली गोमती नदी पर महाराणा जयसिंह ने 375 मीटर लंबा एवं 35 मीटर ऊँचा बाँध बनवाया था, झील को बंधवाने के लिए महाराणा द्वारा वख्‍ता एवं गलालिंग दो पूर्बिया चौहान राजपूतो को जो आपस में काका-भतीजा थे के जिम्‍में दिया था। झील के तल की चौड़ाई 20 मीटर एवं ऊपर से चौड़ाई पाँच मीटर है। बाँध का निर्माण के सलुम्‍बर में स्थित बरोडा गाँव की खदानों से सफेद पत्‍थरों से करवाया गया। बरोडा की खदान से झील तक पत्‍थरों को गधे पर लाद कर लाया गया था। झील की मजबूती के लिहाज से दोहरी दीवार बनाई गई है। सुरक्षा की दृष्टि से बाँध से करीब 100 फीट की दूरी पर 396 मीटर लंबा एवं 36 मीटर ऊँचा एक और बाँध बनवाया गया। महाराणा सज्जनसिंह एवं फहसिंह के समय में इन दो बाँधों के बीच के भाग को भरवाया गया और समतल भूमि पर वृक्षारोपण किया गया। पर्यटन जयसमन्द झील पर्यटकों के आकर्षण का सबसे बड़ा केन्द्र बन गई है। झील के अंदर बाँध के सम्मुख एक टापू पर पर्यटकों की सुविधा के लिए 'जयसमन्द आइलेंड' का निर्माण एक निजी फर्म द्वारा कराया गया है। यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए ठहरने के लिए अच्छे सुविधायुक्त वातानुकूलित कमरे, रेस्टोरेन्ट, तरणताल एवं विविध मनोरंजन के साधन उपलब्ध हैं। यहाँ तक पहुँचने के लिए नौका का संचालन किया जाता है। नौका से झील में घूमना अपने आप में अनोखा अनुभव देता है। जयसमन्द झील के निकट वन एवं वन्यजीव प्रेमियों के लिए वन विभाग द्वारा वन्यजीव अभयारण्य भी बनाया गया है। यहाँ एक मछली पालन का अच्छा केन्द्र भी है। झील की खूबसूरती और प्राकृतिक परिवेश की कल्पना इसी से की जा सकती है कि अनेक फ़िल्मकारों ने अपनी फ़िल्मों में यहाँ के दृश्यों को कैद किया है। सड़क के किनारे सघन वनस्पति एवं वन होने से उदयपुर से जयसमंद झील पहुँचना भी अपने आप में किसी रोमांच से कम नहीं है। मुख्य तथ्य ढेबर झील पूरी तरह से भरी होती है, तो इसका क्षेत्रफल लगभग 50 वर्ग कि॰मी॰ होता है। ढेबर झील का मूल नाम जयसमंद था और यह 17वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में गोमती नदी के आर-पार बने एक संगमरमर के बाँध द्वारा निर्मित है। पश्चिमी क्षेत्र में स्थित गाँवों तक झील से नहरों द्वारा पानी ले जाया जाता है, जहाँ तट पर मछुआरों के गाँव बसे हुए हैं। दक्षिण की ओर स्थित पहाड़ियों पर दो महल खड़े हैं। सन्दर्भ Jaysmad zeel me debha dangi ka balidan he is vajah se usko dhebar kha jata he श्रेणी:राजस्थान की झीलें श्रेणी:राजस्थान में जलाशय श्रेणी:उदयपुर ज़िले में पर्यटन आकर्षण