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411 समाचार
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चिरजा

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चिरजा (अथवा चरजा, चरज) राजस्थानी और गुजराती साहित्य में दिव्य शक्ति के नारी रूप का एक भक्ति गीत है। चिरजा राजस्थानी साहित्य में शक्ति-काव्य (शाक्तिक कविता) में एक नया काव्य रूप है। चिरजा मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा विशेष रूप से देवी के जागरण के दौरान गाया जाता है। चिरजा शब्द संस्कृत के चर्या शब्द से बना है। https://books.google.com/books?id=G8VjAAAAMAAJ Rājasthānī śaktti kāvya Sāmaura Bhaṃvara Siṃha 1999 Sāhitya Akādemī 978-81-260-0625-0 hi शक्ति काव्य अनेक रूपों के माध्यम से अभिव्यक्त हुआ है। चिरजा नामक नया काव्य रूप शक्ति काव्य की राजस्थानी साहित्य को विशेष देन है । चिरजा शब्द संस्कृत के चर्या शब्द से बना है। https://books.google.com/books?id=0lmxDwAAQBAJ RAJASTHAN POLICE CONSTABLE BHARTI PARIKSHA-2019-Competitive Exam Book 2021 SINGH AMIT 2018-08-19 Prabhat Prakashan 978-93-5322-612-1 hi चिरजा- देवी की पूजा अराधना के पद, गीत या मंत्र विशेषकर रात के जागरणों के समय महिलाओं द्वारा गाए जाते हैं इन्हें चिरजा कहा जाता है। https://books.google.com/books?id=ObNjAAAAMAAJ Rājasthāna kī Rammateṃ 2002 Rājasthāna Saṅgīta Nāṭaka Akādamī hi राजस्थानी शक्ति काव्य परम्परा को जानने वाले यह बात भलीभांति जानते हैं कि चाडाऊ चिरजा गाने का अर्थ क्या होता है। चिरजा शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है 'चर्या' इसलिए देवी की चिरजा का अर्थ होता है देवी द्वारा अपने भक्तों http://archive.org/details/dli.ministry.18326 Overview of the folk theatre of Rajasthan Bhanawat Mahendra 1979 Sangeet Natak Akademi, New Delhi devotional songs (Charjayen) https://books.google.com/books?id=l0wqAQAAMAAJ Śrīkaraṇīmātā kā itihāsa Cāraṇa Narendrasiṃha 2009 Cirāga Prakāśana 978-81-907329-9-4 hi https://books.google.com/books?id=TM5HAAAAMAAJ Rājasthānī loka-sāhitya kā saiddhāntika vivecana Cāraṇa Sohanadāna 1980 Rājasthāna Sāhitya Mandira hi https://www.patrika.com/bhopal-news/shiva-is-pleased-with-the-tapes-of-uma-anand-thandav-3574445/ उमा के तप से प्रसन्न होकर शिव करते हैं आनंद तांडव Shiva is pleased with the tapes of Uma, Anand Thandav 2018-10-16 Patrika News hi-IN 2022-03-01 संस्कृति विभाग और आदिवासी लोक कला एवं बोली विकास अकादमी के संयोजन से मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में शक्तिकी महिमा पर केन्द्रित तीन दिवसीय सांस्कृतिक समारोह सिद्धा में चिरजा गायन और कथक शैली में साध्वी देवी के स्वरुप पर आधारित नृत्याभिनय की प्रस्तुतियां संग्रहालय के मुक्ताकाश मंच पर हुईं। https://www.patrika.com/bikaner-news/navratri-2019-3580636/ शोभायात्रा में उमड़ी श्रद्धा, बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु Navratri 2018 2018-10-17 Patrika News hi-IN 2022-03-01 शोभा यात्रा में बैंड बाजा की धुन पर श्रद्धालुजन करणी माता के भजन, चिरजा गाते चल रहे थे। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालु मकानों की छत पर बैठे शोभा यात्रा का इंतजार कर रहे थे। रास्ते में जगह-जगह शोभा यात्रा पर इत्र पुष्प बरसा कर स्वागत किया गया। शोभायात्रा में महिलाएं व श्रद्धालु जन करणी माता की चिरजा गाते हुए चल रहे थे। https://books.google.com/books?id=0cdjAAAAMAAJ&newbks=0&hl=en Siddha Alūnātha Kaviyā Kaviyā Alūnātha 2000 Sāhitya Akādemī 978-81-260-1015-8 hi व्युत्पत्ति चिरजा शब्द संस्कृत के चर्या शब्द से बना है। संस्कृत शब्द 'चर्या' का अर्थ है तपस्वियों व ऋषियों द्वारा ध्यान, तपस्या आदि जैसे धार्मिक संस्कारों और प्रथाओं का प्रदर्शन। प्राकृत शब्दावली में 'चारिया' शब्द के तहत 'आचरण' और 'धार्मिक अनुष्ठान' का कुछ अर्थों के रूप में उल्लेख किया गया है। राजस्थानी शब्दावली के अनुसार 'चर्या' संगीत की विधाओं में गाई जाने वाली देवी की प्रार्थना के लिए है। महायान बौद्ध धर्म में, 'चर्या' अंतिम लक्ष्य, निर्वाण को प्राप्त करने में मदद करने के लिए मनाए गए अभ्यासों की पूरी श्रृंखला को इंगित करता है। हालांकि, 'वज्रयान' शाखा में 'चर्या' 'तांत्रिक' प्रदर्शन को दर्शाता है जब कुछ "पद' गाए जाते थे जिन्हें 'चर्या पद' या 'चर्यागति' के नाम से जाना जाता था।https://books.google.com/books?id=ObFCT5_taSgC&newbks=0&hl=en Encyclopaedia of Indian Literature: A-Devo Datta Amaresh 1987 Sahitya Akademi 978-81-260-1803-1 en प्रकार चिरजा दो प्रकार के होते हैं: सिगाऊ चिरजा और चाडाऊ चिरजा। सिगाऊ चिरजा भक्तिपूर्ण हैं और इसमें केवल देवी की स्तुति करते हैं, जबकि चडाऊ चिरजा को रोग और कठिनाइयाँ से निवारण के लिए मुसीबत के समय गाया जाता है, जब भक्तों को देवी से दिव्य सहायता की आवश्यकता होती है। https://books.google.com/books?id=V4vXAAAAMAAJ&newbks=0&printsec=frontcover&dq=%22%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%22&q=%22%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%22&hl=en Rājasthāna ke loka devatā evaṃ loka sāhitya Bhāṭī Pushpā 1991 Kavitā Prakāśana hi सिगाऊ चरजा में देवी का चरित्र एवं प्रशंसा रहती है परन्तु घाडाऊ चरजा जब भक्त पर विपती पड़ती है तभी पढ़ी जाती हैं । https://books.google.com/books?id=xHjXAAAAMAAJ&newbks=0&printsec=frontcover&dq=%22%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%22&q=%22%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%22&hl=en Rājasthāna ke loka devatā 1999 Śekhāvāṭī Śodha Pratishṭhāna hi चारण देवियों की मान्यता है कि वे 'नो लख लोवड़ियाल (अर्थात् नौ लाख तार की ऊनी साड़ी) पहनती थी । इन देवियों से स्तुति पाठ चरजा कहलाती है। ये दो प्रकार की होती हैं सिंघाऊ और घाड़ाऊ । सिंघाऊ जो शांति के समय देवी की प्रशंसा से पढ़ी मुख्य रूप से चारण, राजपूत और रावलों द्वारा बड़ी संख्या में चिरजाओं की रचना की गई है। राजस्थान के रावल अपने धार्मिक प्रदर्शनों में चिरजा का उपयोग करने के लिए जाने जाते हैं। https://books.google.com/books?id=L8pWAAAAMAAJ&newbks=0&printsec=frontcover&dq=%22%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%22&q=%22%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%22&hl=en Rājasthāna ke Rāvala Samar Devilal 1967 Bhāratīya Loka-Kalā Maṇḍala hi चिरजा लोकप्रिय रूप से आवड़ माता (स्वांगिया माता) और करणी माता जैसी हिंदू देवी-देवताओं के लिए गाए जाते हैं।https://books.google.com/books?id=6qtjAAAAMAAJ&newbks=0&printsec=frontcover&dq=%22%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%22&q=%22%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE%22&hl=en Maru-Bhāratī 2002 Biṛlā Ejyūkeśana Ṭrasṭa. hi ने भक्ति स्तवन साहित्य की रचनायें (स्तुतियों) एवं डिंगल गीत आदि खूब लिखे हैं। भगवती श्री इन्द्रकंवर बाई (खुड़द निवासी) द्वारा गाई गई चरजा में भक्ति के चमत्कार भरे कृत्यों का उल्लेख द्रष्टव्य है "करनल किनियांणी....... अग्रिम पठन Rajasthani Shakti Kavya By Bhaṃvara Siṃha Sāmaura · 1999 Cāraṇa-carjāem ̐aura unakā adhyayana lekhaka Gulābadāna; prastāvanā, Śambhusiṃha Manohara By Gulābadāna · 1976 Chirja-Sahitya Me Charan Deviyan by Simantini Palawat 2015 संदर्भ श्रेणी:चारण श्रेणी:राजस्थानी कला श्रेणी:राजस्थानी भाषाएँ