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स्वीकारपत्र
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स्वीकारपत्र कोई नहीं, मूल पुस्तक हिन्दी में है 150px पुस्तक रचयिता स्वामी दयानंद सरस्वती अज्ञात अज्ञात भारत हिन्दी शृंखला नहीं मृत्योपरांत निजा कार्यों का प्रतिपादन धार्मिक, सामाजिक परोपकारिणी सभा व अन्य मुद्रित पुस्तक ४ अज्ञात अज्ञात शृंखला नहीं शृंखला नहीं
स्वीकारपत्र आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा रचित एक लघु पुस्तिका है। यह मूलतः राजकीय मुद्रा पत्र पर लिखित एक वसीयतनामे की तरह है जिसमें उन्होंने अपने देह त्यागने के बाद अपना काम आगे बढ़ाने के लिए परोपकारिणी सभा का वर्णन किया है।
सामग्री व प्रारूप
इस पत्रक में 13 साक्षियोंस्वीकारपत्र https://web.archive.org/web/20150603213317/http://wikisource.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0 3 जून 2015 पृष्ठ १ के आरंभ में ही हस्ताक्षर है। इसके बाद परोपकारिणी सभा के 23 प्रस्तावित पदाधिकारियों व सभासदों के नाम हैं। इनमें प्रमुख हैं महादेव गोविंद रानडेस्वीकारपत्रजून 2020 InternetArchiveBot पृष्ठ २ तथा लाहौर, दानापुर, बम्बई, पूना, फ़र्रूख़ाबाद व कानपुर के आर्यसमाजों के तत्कालीन पदाधिकारी। तत्कालीन उदयपुर नरेश सज्जनसिंह जी परोपकारिणी सभा के प्रधान नियुक्त किए गए।
यह पुस्तिका स्वामी दयानंद के देहावसान के कुछ समय पूर्व ही प्रकाशित हुई थी। इसमें उन्होने परोपकारिणी सभा के कार्यकलापों के अलावा यह भी लिखा है कि उनका अंतिम संस्कार वेदोक्त रीति से कैसे किया जाए।
उल्लेखनीय है कि परोपकारिणी सभा के नियमों में यह भी उल्लेख है कि यदि सभा में कोई झगड़ा हो तो आपस में सुलह करें किंतु कचहरी न जाएँस्वीकारपत्रजून 2020 InternetArchiveBot पृष्ठ ४ तो कचहरी न जाएँ, किंतु यदि न सुलझे तो तत्कालीन राजा से सलाह ली जाए। मुख्यतः अंग्रेज़ों की बनाई कचहरी द्वारा हस्तक्षेप से बचने के लिए ऐसा किया गया होगा। अंतिम नियम में यह भी लिखा है कि यदि आवश्यकता पड़े तो सभासद् इन नियमों में बाद में परिवर्तन भी ला सकते हैं।
सन्दर्भ
अन्यत्र पठनीय
इन्हें भी देखें
स्वामी दयानंद सरस्वती
आर्य समाज
महादेव गोविंद रानडे
बाहरी कड़ियाँ
स्वीकारपत्र स्वीकारपत्र
विकिस्रोत पर स्वीकारपत्र
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