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मान्धातृ
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दिसम्बर 2020
thumb|भगवान कृष्ण और मान्धातृ
मानधाता, (संस्कृत - मान्धातृ) इक्ष्वाकुवंशीय नरेश युवनाश्व और गौरी के पुत्र। उन्हे सौ राजसूय तथा अश्वमेध यज्ञों का कर्ता और दानवीर, धर्मात्मा चक्रवर्ती सम्राट् जो वैदिक अयोध्या नरेश मन्धातृ से अभिन्न माना जाता है।
नरेश शशबिंदु की कन्या बिन्दुमती इनकी पत्नी थीं जिनसे मुचकुन्द, अम्बरीष और पुरुकुत्स नामक तीन पुत्र और 50 कन्याएँ उत्पन्न हुई थीं जो एक ही साथ सौभरि ऋषि से ब्याही गई थीं। पुत्रेष्ठियज्ञ के हवियुक्त मंत्रपूत जल को प्यास में भूल से पी लेने के कारण युवनाश्व को गर्भ रह गया जिसे ऋषियों ने उसका पेट फाड़कर निकाला। वह गर्भ एक पूर्ण बालक के रूप में उत्पन्न हुआ था जो इंद्र की अमृतस्त्राविणी तर्जनी उँगली चूसकर रहस्यात्मक ढंग से पला और बढ़ा। इंद्रपालित (इंद्र के यह कहने पर कि माता के स्तनों के अभाव में यह शिशु "मेरे द्वारा धारण किया" अथवा पाला जाएगा) होने के कारण उसका नाम मान्धाता पड़ा। यह बालक आगे चलकर पर पराक्रमी हुआ और रावण समेत अनेक योद्धाओं को इसने परास्त किया। इसने विष्णु तथा उतथ्य से राजधर्म और वसुहोम से दंडनीति की शिक्षा ली थी। गर्वोन्मत्त होने पर या लवणासुर द्वारा युद्ध में मारा गया।
श्रेणी:पौराणिक पात्र
श्रेणी:हिन्दू धर्म