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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

प्रमाणभार

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'प्रमाणभार' (burden of proof) के दो अर्थ हैं : (1) किसी मामले को संदेहरहित रूप में प्रमाणित करने का दायित्व एवं (2) मामले में साक्ष्य देने का दायित्व। K कई विषय ऐसे होते हैं, जिनके लिये प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती। अन्यान्य संबद्ध विषयों को साक्ष्य के द्वारा प्रमाणित करते हैं। साक्षी के कथन, स्वीकारोक्ति एवं उपयुक्त कागजों (Document) की पेशी साक्ष्य के अंतर्गत हैं। साक्ष्य देने का प्रथम दायित्व उस पक्ष पर हैं, जिसे मामले को प्राथमिक रूप में प्रमाणित करना है। प्रत्येक पक्ष पर प्रमाणभार का अपना-अपना दायित्व रहता है। जिस पक्ष पर प्रमाण देने का दायित्व रहता है, वह यदि उपयुक्त साक्ष्य प्रस्तुत न करे तो न्यायालय उसके विरुद्ध अपना निर्णय देगा। दंडाभियोग के मामलों में प्रमाणभार दंडाभियोग के मामलों में प्रमाणभार मामला चलानेवाले (चतवेमबनजवत) पर रहता है। इस नियम का कोई अपवाद नहीं है। कानून की प्रकल्पना है कि अभियुक्त निर्दोष है, जब तक उसके विरुद्ध लाया हुआ अभियोग बिल्कुल निस्संदेह प्रमाणित न कर दिया जाय। अत: ऐसे मामलों में प्रमाणभार मामला चलानेवाले पर रहता है एवं अभियोग का प्रत्येक चरण उसे ही प्रमाणित करना होता है, भले ही उसे नकारात्मक विषयावस्तु (Negative Averment) पर ही साक्ष्य क्यों न देना पड़े। अभियुक्त को अपने को निर्दोष प्रमाणित नहीं करना पड़ता। दीवानी मामले में प्रमाणभार दीवानी मामलों में प्रमाणभार का दायित्व उस पक्ष पर है, जो विवादास्पद विषय में अपने स्वत्व को उपस्थित करता है। यह नियम इस सिद्धांत पर आधारित है कि जो पक्ष किसी विषय के अस्तित्व का समर्थन करे, उसे ही उसका प्रमाण देना चाहिए, न कि प्रतिपक्षी को जो विवादास्पद विषय के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता। अत: दीवानी मामालों में प्रमाणभार वादी पर रहता है। यदि वह उस दायित्व को निभाता है तथा मामले को प्राथमिक रूप में प्रमाणित करता है, जिससे उसे त्राण (Relief) मिल सके तो ऐसी स्थिति में उसके दावे के विरुद्ध प्रमाण देने का दायित्व प्रतिवादी पर चला जाता है। साक्ष्य के दौरान में प्रमाणभार का दायित्व कब वादी से प्रतिवादी पर एवं प्रतिवादी से वादी पर चला जायगा, कहना कठिन है। परस्पर दिए गए साक्ष्य के अनुसार यह बदलता रहता है। किंतु अंतत: प्रमाणभार उस पक्ष पर रहता है, जो प्रतिपक्षी के साक्ष्य के उत्तर में साक्ष्य नहीं देने से, मामले में पराजित होगा। मामले से स्वीकृत साक्ष्य के आधार पर ही न्यायालय विवादास्पद दावे की परीक्षा करता है एवं जिस पक्ष को साक्ष्य की बहुलता प्राप्त होती है, उसी के पक्ष में अपना निर्णय देता है। बेनामी क्रय बहुधा लोग दूसरों के नाम से भूमि अथवा अन्यान्य संपत्ति खरीदते हैं। इन्हें 'बेनामी' कहते हैं। जो पक्ष 'बेनामी' को न्यायालय से अमान्य घोषित कराना चाहता है, उसी पर इस बात का प्रमाणभार रहता है कि वास्तव में खरीदार कोई दूसरा ही है तथा जिसके नाम संपत्ति खरीदी गई है, वह केवल नाम का ही खरीददार है। इस प्रसंग में खरीद की रकम कहाँ से आई, यह बात विशेष रूप से विचारणीय होती है। देशाचार एवं कुलाचार किसी दीवानी मामले में यदि कोई पक्ष यह कहे कि उसका मामला किसी निर्दिष्ट देशाचार किंवा कुलाचार पर आधारित है तथा देश का साधारण कानून उसके मामले में लागू नहीं होता तो उसे ही उक्त देशाचार अथवा कुलाचार को निर्विवाद रूप से प्रमाणित करना होता है। मानहानि मानहानि के मामलों में प्रमाणभार वादी पर रहता है। उसे ही पहले साक्ष्य देना पड़ता है कि वह अपने विरुद्ध लाए गए लांछन के लिये दोषी नहीं है। उसके साक्ष्य देने के बाद ही प्रतिवादी इस बात का प्रमाण दे सकता है कि उसने शुद्ध भावना एवं जनहित की दृष्टि से ही वह बात कही थी या लिखी थी, जिसके विरुद्ध वादी ने मामला किया है। उत्तराधिकारीहीन संपत्ति यदि सरकार की ओर से यह दावा किया जाय कि कोई व्यक्ति बिना उत्तराधिकारी छोड़े मर गया है, अत: उसकी संपत्ति 'एस्चीट' (Escheat) के कानून के अनुसार सरकार की है तो सरकार पर इस बात का प्रमाणभार रहेगा कि संपत्ति का अंतिम अधिकारी बिना उत्तराधिकारी छोड़े मरा। जाली चेक यदि कोई जाली चेक पर किसी को रुपए दे देता है तो बैंक पर इस बात का प्रमाणभार होगा कि चेके बाबत उसकी ओर से कोई असावधानी नहीं हुई। विद्वेषण मामला विद्वेषपूर्ण मामले (Malicious Prosecution) के दावे में वादी को ही प्रमाणित करना पड़ता है कि प्रतिवादी ने विद्वेष से एवं युक्तिसंगत कारण का अभाव रहते हुए वादी पर दंडाभियोग का मामला चलाया था। दुष्टाचरण यदि किसी स्त्री का पति यह कहे कि उसकी स्त्री दूसरे पुरुष के साथ दुष्टाचरण में थी तो उसे ही स्त्री के दुष्टाचरण को प्रमाणित करना होगा। संयुक्त हिंदू परिवार की संपत्ति हिंदू विधान में कानून की ऐसी कोई कल्पना नहीं है कि संयुक्त परिवार होने से ही परिवार के सदस्यों की संपति संयुक्त है। किंतु यदि स्वीकार कर लिया जाय या प्रमाणित हो जाय कि कोई हिंदू परिवार संयुक्त है तथा संयुक्त परिवार की संपत्ति इसके अधीन है तो इस क्रम में कानून की प्रकल्पना है कि संयुक्त परिवार के भिन्न भिन्न सदस्यों के अधीन सदस्य यदि व्यक्तिगत रूप में उक्त संपत्ति का दावा करें तो उन्हें ही प्रमाण देना पड़ेगा कि संपत्ति उनकी अपनी है, संयुक्त परिवार की नहीं। विक्षिप्ता यदि किसी दस्तावेज का निष्पादन (Execution) प्रमाणित हो, किंतु यह कहा जाय कि जिस समय दस्तावेज लिखा जा रहा था, उस समय दस्तावेज बनानेवाले विक्षिप्त था, तो मस्तिष्क की विक्षिप्ता का प्रमाणभार दस्तावेज बनानेवाले पर है। यदि वह व्यक्ति दस्तावेज के निष्पादन के पहले विक्षिप्त रहा हो, पर यह कहा जाय कि दस्तावेज बनाने के समय वह मानसिक संतुलन में था, तो इसका प्रमाणभार भी उसी पर रहेगा। नकली दस्तावेज यदि किसी दस्तावेज के निष्पादन को प्रमाणित मान लिया जाय, किंतु उसमे वर्णित विषय को असत्य एवं नकली कह कर ऐसा आक्षेप किया जाय कि उसके अनुसार कार्य करने का उद्देश्य नहीं था, तो उक्त आक्षेपकारी पर इस कथन का प्रमाणभार रहेगा। प्रतिफल (Consideration) यदि रजिस्टरी किए अथवा न किए हुए किसी दस्तावेज को मामले में स्वीकार कर लिया जाय तो इस बात का प्रमाणभार कि इसमें प्रतिफल नहीं था, दस्तावेज बनानेवाले पर है। दीवानी मामलों में प्रमाणभार के प्रसंग में लागू उक्त साधारण कानून के दो विकल्प है : (1) जहाँ कानून की खंडनीय प्रकल्पना हो या किसी पक्ष के लिये प्राथमिक रूप में मामला प्रमाणित दिखता हो तो प्रतिपक्षी पर आ जाता है। (2) जहाँ किसी पक्ष के आक्षेप के उत्तर में दिया जानेवाला साक्ष्य प्रतिपक्षी की विशेष जानकारी में हो तो प्रतिपक्षी पर ही प्रमाणभार रहेगा। अपील में प्रमाणभार दंडाभियोग की अपील में प्रमाणभार साधारणत: मामला चलानेवाले पर रहता है। न्यायालय को यह देखना होता है कि अभियुक्त को दिया गया दंड ठीक है या नहीं। यदि किसी ऐसे निर्णय के विरुद्ध अपील हो, जहाँ अभियुक्त को मुक्त कर दिया गया है, तो वहाँ मामला चलानेवाले पर प्रमाणभार का दायित्व और भी गुरुतर है। दीवानी अपील में प्रमाणभार अपील करनेवाले पर है। उसे ही प्रमाणित करना पड़ता है कि अपील के अंतर्गत दिया हुआ निर्णय गलत है। संदर्भ ग्रंथ भारतीय साक्ष्य कानून ; वुडरॉफ एवं अमीर अली : लॉ ऑव एविडेंस; वावेल, एन. ए. : लॉ आवॅ, एविडेंस रस्को : डाइजेस्ट ऑव दि लॉ ऑव एविडेन्स, ए. आई. आर. मैन्युअल द्वितीय, संस्करण भाग 6 बाहरी कड़ियाँ Complete text of Federal Rules of Civil Procedure (Cornell Univ.) श्रेणी:दण्ड विधि श्रेणी:साक्ष्य विधि