411 REFERENCE · Wikipedia
होशियार सिंह
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
मेजर (बाद में ब्रिगेडियर) होशियार सिंह परमवीर चक्र Major Hoshiar Singh.jpg 250px 1936 5 5 yParam Vir Chakra winners since 1950 http://timesofindia.indiatimes.com/india/Param-Vir-Chakra-winners-since-1950/articleshow/2731710.cms 11 April 2016 द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया 25 January 2008 https://web.archive.org/web/20160411012041/http://timesofindia.indiatimes.com/india/Param-Vir-Chakra-winners-since-1950/articleshow/2731710.cms 11 April 2016 dead yes 1998 12 6 1937 5 5 सिसाना,Bravery award winners honoured http://www.tribuneindia.com/2010/20100518/harplus.htm#21 11 April 2016 The Tribune (Chandigarh) 18 May 2010 https://web.archive.org/web/20160411001420/http://www.tribuneindia.com/2010/20100518/harplus.htm#21 11 April 2016 सोनीपत, ब्रिटिश भारत(वर्तमान हरियाणा, भारत होशियार सिंह दहिया India भारत 24px भारतीय थलसेना 1963-1996 18px मेजर (बाद में 18px ब्रिगेडियर) 3 ग्रेनेडियर्स भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965१९७१ का भारत-पाक युद्धबसंतसर का युद्ध 32px परमवीर चक्र
मेजर (बाद में ब्रिगेडियर) होशियार सिंह दहिया (5 मई 1937 - 6 दिसम्बर 1998), परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय सैनिक थे। इनका जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के सिसाणा गांव में हिंदू जाट परिवार में चौधरी हीरा सिंह के यहाँ हुआ था। उन्होंने भारतीय सेना में समर्पण के साथ सेवा की और ब्रिगेडियर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। उन्हें भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 6 दिसंबर 1998 को प्राकृतिक कारणों से उनका निधन हो गया।
प्रारम्भिक जीवन
रोहतक के जाट कॉलेज में अपनी स्कूली शिक्षा और एक वर्ष का अध्ययन करने के बाद होशियार सिंह दहिया सेना में शामिल हो गए। उन्हें 30 जून 1963 को भारतीय सेना के ग्रेनेडियर रेजिमेंट में कमीशन किया गया था।
सैन्य जीवन
उनकी पहली तैनाती नेफ़ा (नॉर्थ-ईस्ट फ़्रंटियर एजेंसी) (NEFA) में थी । 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में, उन्होंने राजस्थान क्षेत्र से भाग लिया।
1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान तीसरे ग्रेनेडियर को 15-17 दिसम्बर 1971 से शकगढ़ सेक्टर में बसंतर नदी में एक पुल का निर्माण करने का कार्य दिया गया था। नदी दोनों तरफ से गहरी लैंड माइन से ढकी हुई थी और पाकिस्तानी सेना द्वारा अच्छी तरह से संरक्षित थी। कमांडर 'सी' कंपनी मेजर होशियार सिंह को जर्पाल के पाकिस्तानी इलाके पर कब्जा करने का आदेश दिया गया था। पाकिस्तानी सेना ने प्रतिक्रिया करते हुए जवाबी कार्यवाही की। हमले के दौरान मेजर होशियार सिंह एक खाई से दूसरी खाई में अपने सैनिकों का हौसला बढ़ने के लिए भागते रहे तेजी से खड़े होने के लिए प्रोत्साहित करते रहे परिणामस्वरूप उनकी कंपनी ने पाकिस्तानी सेना के भारी हमलों के बावजूद दुश्मन को बहुत क्षति पहुंचाई और उनके सभी हमलों को विफल कर दिया। गम्भीर रूप से घायल होने के बावजूद मेजर होशियार सिंह ने युद्धविराम तक पीछे हटने से मना कर दिया। इस अभियान के दौरान मेजर होशियार सिंह ने सेना की सर्वोच्च परंपराओं में सबसे विशिष्ट बहादुरी, अतुलनीय लड़ाई भावना और नेतृत्व को प्रदर्शित किया।
सम्मान
उन्हें अपनी बहादुरी और नेतृत्व के लिए भारत सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस 1972 को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया जो 17 दिसम्बर 1971 से प्रभावी हुआ।
श्रेणी:परमवीर चक्र सम्मानित लोग
श्रेणी:1936 में जन्मे लोग
श्रेणी:१९९८ में निधन
श्रेणी:हरियाणा के लोग