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कर्णावर्त

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कर्णावर्त Cochlea ( लैटिन नाम ) Gray920.png कर्णावर्त का आरेख श्रवण तंत्र आंतरिक कान ध्वनि कंपन को तंत्रिका संकेतों में परिवर्तित करना लेबिरिन्थीय धमनी श्रवण तंत्रिकाकर्णावर्त (Cochlea) आंतरिक कान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो मनुष्यों तथा अन्य कशेरुकी प्राणियों में सुनने की प्रक्रिया के लिए उत्तरदायी होता है। यह एक सर्पिलाकार संरचना होती है, जिसका आकार घोंघे के खोल जैसा दिखाई देता है। ध्वनि तरंगें जब बाह्य कान से होकर मध्य कान तक पहुँचती हैं, तब मध्य कान की अस्थियाँ इन तरंगों को बढ़ाकर आंतरिक कान तक पहुँचाती हैं। इसके बाद ये कंपन कर्णावर्त में स्थित द्रव को गति प्रदान करते हैं, जिससे सूक्ष्म संरचनाएँ सक्रिय होती हैं और यांत्रिक ऊर्जा विद्युत संकेतों में परिवर्तित हो जाती है। ये संकेत श्रवण तंत्रिका द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचते हैं, जहाँ मस्तिष्क उन्हें ध्वनि के रूप में पहचानता है। कर्णावर्त की संरचना अत्यंत जटिल और सूक्ष्म होती है और इसकी कार्यप्रणाली जीवविज्ञान तथा चिकित्सा विज्ञान दोनों में महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय रही है।https://www.britannica.com/science/cochlea संरचना कर्णावर्त एक अस्थीय नलिका के रूप में बना होता है जो सामान्यतः लगभग ढाई घुमाव बनाती है। इसके भीतर तीन मुख्य नलिकाएँ होती हैं जिनमें विभिन्न प्रकार के द्रव भरे रहते हैं। ये द्रव ध्वनि कंपन को संचरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कर्णावर्त के भीतर स्थित कॉर्टी का अंग सुनने की प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण भाग माना जाता है। इस अंग में सूक्ष्म बाल कोशिकाएँ होती हैं, जो ध्वनि कंपन को विद्युत संकेतों में परिवर्तित करने का कार्य करती हैं। जब द्रव की गति के कारण ये बाल कोशिकाएँ झुकती हैं, तब तंत्रिका संकेत उत्पन्न होते हैं। यह प्रक्रिया अत्यंत संवेदनशील होती है और बहुत सूक्ष्म कंपन भी इन कोशिकाओं को सक्रिय कर सकते हैं।https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK279394/ कार्य और महत्व सुनने की प्रक्रिया में कर्णावर्त की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। जब ध्वनि तरंगें कान के परदे तक पहुँचती हैं, तो वे मध्य कान की अस्थियों द्वारा बढ़ाई जाती हैं और आंतरिक कान तक पहुँचती हैं। कर्णावर्त के भीतर उपस्थित द्रव इन तरंगों को आगे बढ़ाता है और कॉर्टी के अंग की बाल कोशिकाओं को उत्तेजित करता है। इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न विद्युत संकेत श्रवण तंत्रिका द्वारा मस्तिष्क तक पहुँचते हैं, जहाँ उनका विश्लेषण होता है और व्यक्ति ध्वनि का अनुभव करता है। यदि कर्णावर्त की बाल कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाएँ, तो सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है, क्योंकि ये कोशिकाएँ सामान्यतः पुनः उत्पन्न नहीं होतीं। अत्यधिक शोर, संक्रमण तथा आयु वृद्धि इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।https://www.nidcd.nih.gov/health/how-do-we-hear चिकित्सकीय महत्व आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में कर्णावत प्रत्यारोपण एक महत्वपूर्ण तकनीक है, जिसका उपयोग उन व्यक्तियों में किया जाता है जिनकी श्रवण क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो चुकी होती है। यह उपकरण ध्वनि संकेतों को सीधे श्रवण तंत्रिका तक पहुँचाकर सुनने की क्षमता में सुधार करने में सहायता करता है। कर्णावर्त से संबंधित रोगों में श्रवण ह्रास तथा आंतरिक कान के अन्य विकार शामिल हैं।https://www.nidcd.nih.gov/health/cochlear-implants यह भी देखें कान आंतरिक कान श्रवण तंत्रिका संदर्भ बाहरी कड़ियाँ https://www.britannica.com/science/cochlea https://www.nidcd.nih.gov/health/how-do-we-hear https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK279394/