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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

रीवा रियासत

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thumb| 250px|thumb| शुंग राज्य के पश्चात ईशा की चौथी तथा पांचवी शताब्दी में रीवा क्षेत्र मगध के गुप्त सम्राटों के अधीन रहा, जिसके पश्चात इस क्षेत्र में कलचुरी राजाओं ने राज्य किया| रीवा के महाराजा की हाथी की सवारी (१९०३ के दिल्ली दरबार के समय) रीवा भारत के मध्य प्रदेश राज्य में स्थित एक रजवाड़ा था, जो वर्तमान रीवा शहर के आसपास बसा हुआ था। रीवा बघेल वंश की राजधानी थी।रीवा संभाग भारत 20 March 2020 https://rewadivisionmp.nic.in/%E0%A4%87%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B8/ hi 26 July 2024 बघेल वंश गुजरात के सोलंकी राजपूतों से निकला है जिन्हें चालुक्य भी कहा जाता है। रीवा राज्य वर्तमान के मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, छत्तीसगढ़ के इलाकों में फैला था । रीवा रियासत में वर्तमानझांसी ,ललितपुर, निवाड़ी ,टीकमगढ़ ,छतरपुर , दामोह( उत्तरी भाग ) पन्ना, सतना, चित्रकूट , बांदा, महोबा (दक्षिणी भाग) , प्रयागराज (इलाहाबाद की दक्षिणी तहसील) ,मिर्जापुर , सोनभद्र , रीवा, सीधी, सिंगरौली, कोरिया जिला, कटनी, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया , [[डिंडोरी] जिले सम्मिलित थे । जिनमें से अधिकतर रीवा राज्य के नीचे शासन करने वाले राजा राज करते थे। thumb|रीवा कोठी (रीवा घाट,बनारस) जो वर्तमान में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत के विद्यार्थियों का छात्रावास है। संबंध इन्हें अग्निकुल का वंशज माना जाता है।इतिहास में समुपलब्ध साक्ष्यों तथा भविष्यपुराण में समुपवर्णित विवेचन कर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय बनारस के विद्वानों के द्वारा बतौर प्रमाण यजुर्वेदसंहिता, कौटिल्यार्थशास्त्र, श्रीमद्भगवद्गीता, मनुस्मृति, ऋकसंहिता पाणिनीय अष्टाध्यायी, याज्ञवल्क्यस्मृति, महाभारत, क्षत्रियवंशावली, श्रीमद्भागवत, भविष्यपुराण, रीवां राजवंश का सजरा, रीवा राज्य का इतिहास, बघेल खण्ड की स्थापत्यकला, अजीत फते नायक रायसा और बघेलखण्ड का आल्हा तथा वरगाहितिप्राप्तोपाधिकानॉ परिहरवंशीक्षत्रियॉणॉ वंशकीर्तनम् नामक पुस्तक में बघेल (बाघेला,सोलांकी) तथा वरग्राही जिसे बघेली बोली में वरगाही ( बरगाही, परिहार) वंश का वर्णन किया गया है।।। सन्दर्भ श्रेणी:मध्य प्रदेश की रियासतें श्रेणी:रीवा ज़िला