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ट्रैकाइट
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ट्रैकाइट / रूक्षक Trachyt Herz Jesu Kirche Aachen.jpg जर्मनी के आकिन शहर की एक दीवार में जड़ा ट्रैकाइट का नमूना, जिसमें सैनिडीन के बड़े क्रिस्टल स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। क्षारीय फेल्डस्पार फेल्सिक (Felsic) अफेनिटिक (Aphanitic - महीन दानेदार)
ट्रैकाइट, जिसे हिंदी में कभी-कभी रूक्षक भी कहा जाता है, एक बहिर्भेदी आग्नेय चट्टान है जो मुख्य रूप से क्षारीय फेल्डस्पार से बनी होती है।एन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: ट्रैकाइट चट्टान की परिभाषा, रासायनिक संगठन और भूवैज्ञानिक विशेषताएं यह आमतौर पर हल्के रंग की और महीन दानों वाली या बारीक बुनावट वाली (अफेनिटिक) होती है, जिसमें मैफिक खनिजों की बहुत कम मात्रा मौजूद होती है।
इस चट्टान का निर्माण सिलिका और क्षारीय धातुओं से समृद्ध लावा या उथले अंतर्भेदन के तेजी से ठंडे होने के कारण होता है।आईयूजीएस वर्गीकरण: आग्नेय चट्टानों की व्यवस्थित वर्गीकरण प्रणाली और टीएएस आरेख भूवैज्ञानिक और रासायनिक दृष्टिकोण से, ट्रैकाइट को अंतर्भेदी आग्नेय चट्टान सायनाइट का ज्वालामुखीय या बहिर्भेदी समकक्ष माना जाता है।Philpotts Anthony R. Ague Jay J. 2009 Principles of Igneous and Metamorphic Petrology Cambridge University Press
व्युत्पत्ति और विशिष्ट बनावट
'ट्रैकाइट' शब्द की उत्पत्ति ग्रीक भाषा के शब्द ट्रैकीस से हुई है, जिसका अर्थ होता है "खुरदरा"। इस चट्टान की टूटी हुई सतहों पर अत्यंत सूक्ष्म अनियमित पुटिकाएं पाई जाती हैं, जिसके कारण इसे हाथ से छूने पर यह बेहद खुरदरी और असमान महसूस होती है। इसी विशिष्ट भौतिक गुण के कारण भूवैज्ञानिकों द्वारा इसे यह नाम दिया गया था।
रासायनिक संरचना
लघु|दाएँ|250px|टीएएस (TAS) आरेख, जहाँ ट्रैकाइट और ट्रैकीडेसाइट के रासायनिक क्षेत्र को विशेष रूप से चिह्नित किया गया है।
रासायनिक आधार पर, ट्रैकाइट में सिलिका (SiO2) की मात्रा 60% से 65% के बीच होती है, जबकि क्षारीय ऑक्साइड (Na2O और K2O) की मात्रा 7% से अधिक पाई जाती है।
टीएएस वर्गीकरण आरेख के अनुसार, इसमें रायोलाइट की तुलना में सिलिका की मात्रा कम होती है, लेकिन डेसाइट की तुलना में क्षारीय तत्वों की प्रधानता अधिक होती है।
इसी समूह में ट्रैकीडेसाइट चट्टान भी आती है, जिसे इसके भीतर मौजूद 20% से अधिक क्वार्ट्ज़ की मात्रा के आधार पर ट्रैकाइट से अलग माना जाता है।
खनिज विज्ञान
लघु|बाएँ|220px|क्यूएपीएफ (QAPF) आरेख में ट्रैकाइट के खनिज घटकों के आधार पर उसका सटीक स्थान।
ट्रैकाइट की मुख्य खनिज संरचना में क्षारीय फेल्डस्पार सबसे अनिवार्य घटक है। इसके अलावा इसमें निम्नलिखित खनिज विभिन्न मात्राओं में पाए जाते हैं:
सैनिडीन और अनॉर्थोक्लेज: इसमें मौजूद क्षारीय फेल्डस्पार मुख्य रूप से सोडियम-समृद्ध सैनिडीन के रूप में होता है, जो अक्सर सूक्ष्म परतों वाली क्रिस्टलीय बनावट प्रदर्शित करता है।
पोरफाइरिटिक बनावट: कई ट्रैकाइट चट्टानों में सैनिडीन के बड़े और सुगठित क्रिस्टल बारीक पृष्ठभूमि के बीच तैरते हुए दिखाई देते हैं। इसका सबसे सुंदर उदाहरण जर्मनी के राइन क्षेत्र में स्थित ड्रैचेनफेल्स का ट्रैकाइट पत्थर है, जहाँ एक से दो इंच लंबे चमकदार फेल्डस्पार क्रिस्टल बिखरे हुए मिलते हैं।
सहायक खनिज: इसमें हल्की मात्रा में सोडियम-समृद्ध ऑलिगोक्लेज फेल्डस्पार, बायोटाइट अभ्रक, पायरॉक्सिन (जैसे ऑगाइट) और हॉर्नब्लेंड पाए जाते हैं। क्वार्ट्ज़ इसमें बहुत दुर्लभ होता है, लेकिन सिलिका का ही एक अन्य रूप ट्रिडिमाइट इसके छिद्रों में ओपल या कैल्सेडोनी के साथ जमा हुआ मिल सकता है।
भौगोलिक वितरण
पृथ्वी पर उपस्थिति
जहाँ कहीं भी पृथ्वी पर क्षारीय मैग्मा का उद्गार होता है, वहाँ ट्रैकाइट प्रचुरता से पाई जाती है:
यूरोप: यूरोप की सेनोजोइक कालीन ज्वालामुखीय चट्टानों में ट्रैकाइट का बहुत बड़ा योगदान है। यह जर्मनी के एइफेल और राइन क्षेत्र, फ्रांस के ओवरन और इटली के नेपल्स तथा 'ईशिया द्वीप' के ज्वालामुखीय मैदानों में व्यापक रूप से पाई जाती है।
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया: संयुक्त राज्य अमेरिका में यह टेक्सास के 'बिग बेंड' क्षेत्र, दक्षिणी नेवादा और साउथ डकोटा की 'ब्लैक हिल्स' में सतह पर उजागर है। ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स और क्वींसलैंड के हेटलो क्रीक क्षेत्र में कई ट्रैकाइट प्लग (ज्वालामुखीय ग्रीवा) पाए जाते हैं।
महासागरीय द्वीप: हवाई (हुआलालाई ज्वालामुखी के पुउ वावा क्षेत्र), एज़ोरेस, टेनेरिफ़ और असेंशन द्वीप पर हाल के ज्वालामुखीय उद्गारों में काली और कांच जैसी ट्रैकाइट लावा की परतें देखी गई हैं।
मंगल ग्रह पर खोज
पृथ्वी के बाहर, भूवैज्ञानिक अन्वेषणों में ट्रैकाइट चट्टान के साक्ष्य मंगल ग्रह पर भी मिले हैं। नासा के क्यूरियोसिटी रोवर द्वारा मंगल ग्रह के 'गेल क्रेटर' के अध्ययन के दौरान वहां की प्राचीन चट्टानों में उच्च क्षारीय तत्वों और सिलिका के इस अनूठे संयोजन (ट्रैकाइट) की पुष्टि की गई है, जो मंगल ग्रह के प्राचीन ज्वालामुखीय इतिहास की जटिलता को दर्शाता है।लिथोस जर्नल: ऑर्बिटल और इन-सिटू डेटा के माध्यम से प्रारंभिक मंगल ग्रह पर मैग्मैटिक जटिलता और ट्रैकाइट की उपस्थिति
ऐतिहासिक और आर्थिक उपयोग
लघु|दाएँ|220px|ट्रैकाइट चट्टानी मैट्रिक्स के भीतर जड़ा हुआ और पॉलिश किया गया एक कीमती ओपल रत्न।
ट्रैकाइट एक बेहद टिकाऊ और तराशने योग्य पत्थर है, जिसके कारण इतिहास में इसका व्यापक आर्थिक उपयोग हुआ है:
वास्तुकला और सजावटी पत्थर: रोमन साम्राज्य और वेनिस गणराज्य के काल में महलों, चर्चों और सार्वजनिक स्मारकों के निर्माण में आयामी पत्थर के रूप में इसका अत्यधिक उपयोग किया जाता था। इटली की 'यूगैनियन पहाड़ियों' से निकाला गया ट्रैकाइट पत्थर अपनी मजबूती के लिए आज भी वास्तुकला के इतिहास में प्रसिद्ध है।पर्यावरण पृथ्वी विज्ञान रिपोर्ट: यूगैनियन ट्रैकाइट के पेट्रोफिजिकल गुण और टिकाऊपन का ऐतिहासिक अध्ययन
रत्नों का आधार: कई बार ट्रैकाइट की खुरदरी और पुटिका युक्त संरचनाओं के भीतर बहुमूल्य ओपल जैसे रत्न प्राकृतिक रूप से विकसित हो जाते हैं, जिन्हें तराश कर सुंदर आभूषण बनाए जाते हैं।
इन्हें भी देखें
ग्रेनाइट
शेल
बेंटोनाइट
सन्दर्भ
श्रेणी:ज्वालामुखी विज्ञान
श्रेणी:आग्नेय चट्टानें
श्रेणी:भूविज्ञान