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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन

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रिचर्ड फेयनमन Feynman at Los Alamos.jpg रिचर्ड फिलिप फेयनमन 1918 5 11 y क्वीन्स न्यू यॉर्क, अमेरिका 1988 2 15 1918 5 11 y लोस एंजिलिस, कइलिफोरनिआ, अमेरिका Mountain View Cemetery and Mausoleum, Altadena, California, US सैद्धांतिक भौतिकी Cornell UniversityCalifornia Institute of Technology मैसीचयुसेटस् प्रोद्योगिकी संस्थान (बिज्ञान स्नातक १९३९)प्रिंसटन विस्वविद्यालय (पीएचडी १९४३) The Principle of Least Action in Quantum Mechanics https://cds.cern.ch/record/101498/files/Thesis-1942-Feynman.pdf 1942 John Archibald Wheeler James M. Bardeen Laurie Brown (physicist) Thomas Curtright Albert Hibbs Giovanni Rossi Lomanitz George Zweig Robert Barro W. Daniel Hillis Douglas D. Osheroff Paul Steinhardt Stephen Wolfram Manhattan Project Acoustic wave equation Bethe–Feynman formula Feynman checkerboard Feynman diagrams Feynman–Kac formula Feynman parametrization Feynman point Feynman propagator Feynman slash notation Feynman sprinkler Hellmann–Feynman theorem V−A theory Brownian ratchet Feynman–Stueckelberg interpretation Nanotechnology One-electron universe Parton (particle physics) Path integral formulation Bongo drum Playing the bongos Quantum cellular automata Quantum computing Quantum electrodynamics Quantum hydrodynamics Quantum turbulence Shaft passer Sticky bead argument Synthetic molecular motor The Feynman Lectures on Physics Universal quantum simulator Superfluid helium-4 Vortex ring model Wheeler–Feynman absorber theory]] अल्बर्ट आइंस्टीन पुरस्कार (१९५४) अर्नेस्ट ऑरलैंडो लॉरेंस पुरस्कार (१९६२) भौतिकी के नोबेल पुरस्कार (१९६५) रॉयल सोसाइटी के बिदेसी सदस्य (१९६५) ओरेस्टेड मेडल (1972) राष्ट्रीय बिज्ञान मेडल (१९७९) Richard Feynman signature.svg Arline Greenbaum 1941 1945 diedMary Louise Bell 1952 1956Gweneth Howarth 1960 2 रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन (11 मई, 1918 – 15 फरवरी, 1988) बीसवी शताब्दी के अन्तिम भाग के सबसे चर्चित वैज्ञानिक थे। वे 1966 मे नोबेल पुरस्कार से सम्मानित हुए। बीसवीं शताब्दी के बीच मे अच्छे विश्वविद्यालयों मे भौतिक शास्त्र को पढ़ाये जाने के तरीके पर विवाद चल रहा था। क्या भौतिक शास्त्र मे उसी तरह से उन्ही विषयों के साथ पढ़ाया जाय जैसे अभी तक पढ़ाया जा रहा था; या फिर नयी तरह से नये विषयों के साथ पढ़ाया जाये। इस विवाद को फाइनमेन जैसा ही व्यक्ति अन्जाम दे सकता था क्योंकि उनका रुतबा सभी मानते थे। उनका सम्मान इसलिये नहीं था कि वह कैल टेक मे थे पर कैल टेक दुनिया का सबसे अचछा भौतिक शास्त्र का विश्वविद्यालय इसलिये माना जाता था क्योंकि फाइनमेन वहां थे। फाइनमेन ने १९६१-६३ मे कैल-टेक मे स्नातक के विद्यार्थियों को भौतिक शास्त्र पढ़ाया। इन तीन साल ने भौतिक शास्त्र को पढ़ाने की नयी दिशा दी और भौतिक शास्त्र नयी तरह से नये विषयों के साथ पढ़ाया जाने लगा। इन लेक्चरों को तीन किताबों ने बदला गया। यह लाल बाईंडिंग मे थीं और 'Lectures on Physics by Richard P Feynman के नाम से मशहूर हुईं। जीवन रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन, का जन्म ११ मई १९१८ में हुआ था और मृत्यु १९८८ में कैंसर से हो गयी। छुटपन में फाइनमेन अक्सर सोचा करते थे कि वह बडे होकर क्या बनें: विदूषक या वैज्ञानिक। बडे होकर उन्होंने इन दोनो भूमिकाओं को एक साथ बाखूबी निभाया। लोग कहते हैं कि वह इतने मशहूर क्यों हुये पर उनके बारे में वैज्ञानिक ठीक ही कहते हैं: ' फाइनमेन तो ऐतिहासिक व्यक्ति हैं उनको जितना सम्मान मिला वे उस सब के अधिकारी हैं।' फाईनमेन का बचपन फाइनमेन के पिता का बातों को बताने का अपना ही ढंग था। एक बार का किस्सा है कि पिता और पुत्र पार्क मे घूम रहे थे पिता ने एक चिड़िया की तरफ वह इशारा करके बताया कि यह चिड़िया दुनिया में अलग-अलग नामो से जानी जाती है। यह जरूरी नहीं है कि आप उन सब नामो को जाने, न ही महत्वपूर्ण है। पर महत्वपूर्ण यह है कि वह क्या और कैसे करती है। वे बच्चे के मन मे जिज्ञासा जगाने की कोशिश करते थे यह बताने की जरूरत नहीं है कि फाइनमेन बचपन से जिज्ञासु तथा कुतुहली थे। शिक्षा स्कूल में वह गणित में सबसे अच्छे और गणित टीम के हीरो थे। पर उन्होंने गणित को छोड़ दिया। उन्हे लगा कि गणित मे उच्च शिक्षा प्राप्त करके वे दूसरों को गणित पढ़ाने के अलावा और कुछ नहीं कर सकते। वह कुछ व्यवहारिक करने का सोच कर, पहले इलेक्ट्रिकल इन्जीनियरिंग की तरफ गये पर बाद में भौतिक शास्त्र की पढ़ाई की। फाइनमेन ने स्नातक की शिक्षा मैसाचुसेट इं‍स्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलोजी से पूरी की। वह वहीं पर शोध कार्य करना चाहते थे पर फिर प्रिंक्सटन मे शोध कार्य करने के लिये चले गये। बाद में वे कहा करते थे, 'यह ठीक ही था। मैने वहां जाना कि दुनिया बहुत बड़ी है और काम करने के लिये बहुत सी अच्छी जगहें हैं।' व्हीलर और घड़ी प्रिंक्सटन मे युवा फाइनमेन को व्हीलर के साथ शोध करने का मौका मिला। उस समय तक व्हीलर को नोबेल पुरूस्कार तो नहीं मिला था पर वे वह काम कर चुके थे जिस पर उन्हे बाद मे नोबेल पुरूस्कार मिला। वे कुछ आडम्बर प्रिय थे कुछ अपनी अहमियत भी जताते थे। उन्होंने फाइनमेन को सप्ताह में एक दिन का कुछ निश्चित समय मिलने का दिया। पहले दिन मुलाकात के समय वह सूट पहने थे उन्होंने अपनी जेब से अपनी सोने की विराम घडी निकाल कर मेज पर रख दी ताकि फाइनमेन को पता चल सके कि कब उसका समय समाप्त हो गया है। फाइनमेन उस समय विद्यार्थी थे। उन्होंने एक बाजार से एक सस्ती विराम घड़ी खरीदी - उनके पास मंहगी घड़ी खरीदने के लिये पैसे नहीं थे। अगली मीटिंग पर उन्होंने अपनी सस्ती घड़ी उस सोने की घड़ी के पास रख दी। व्हीलर को भी पता चलना चाहिये कि उनका समय भी महत्वपूर्ण है। व्हीलर को मजाक समझ में आया और दोनो दिल खोल कर हंसे। दोनों ने घड़ियां हटा ली। उनका रिश्ता औपचारिक नहीं रहा, वे मित्र बन गये, उनकी बातें हंसी मजाक में बदल गयीं और हंसी-मजाक नये मौलिक विचारों मे। लॉस एलमॉस इसी बीच दूसरा महायुद्ध शुरू हो गया। जर्मनी मे परमाणु बम बनाने का काम हो रहा था, यदि पहले वहां बन जाता तो हिटलर अजेय था। अमेरिका की लॉस एलमॉस लेबॉरेटरी मे दुनिया के वैज्ञानिक इक्कठा होकर परमाणु बम बनाने के लिये एकजुट हो गये। फाइनमेन को भी वहां बुलाया गया और उन्होने वहां काम किया। लॉस एलमॉस मे सुरक्षा का जिम्मा सेना का था जिनके अपने नियम अपने कानून थे। यह नियम फाइनमेन को अक्सर समझ मे नहीं आते थे। फाइनमेन ताले खोलने मे माहिर थे। वे सेना के अधिकारियों को तंग करने के लिये की लेबोरेटरी की तिजोरियों खोल कर उसमे कागज पर guess who लिख कर छोड़ देते थे पर तिजोरियों से कुछ निकालते नहीं थे। यह वह केवल, सेना के अधिकारियों को बताने के लिये करते थे कि उनकी सुरक्षा प्रणाली कितनी गलत है। अरलीन स्कूल के दिनों में फाइनमेन का अपनी सहपाठिनी अरलीन से प्रेम हो गया। उन्होने शादी तब करने की सोची जब फाइनमेन को कोई नौकरी मिल जाय। जब फाइनमेन शोध कार्य कर रहे थे तब अरलीन को टी.बी. हो गयी उसके पास केवल चन्द सालों का समय था। उन दिनों टी.बी. का कोई इलाज नहीं था। अरलीन को टी.बी. हो जाने के कारण, फाइनमेन उसे चूम भी नहीं सकते थे। उन्हे मालुम था कि अरलीन के साथ उसके सम्बन्ध केवल अध्यात्मिक (Platonic) ही रहेंगें। इन सब के बावजूद, फाइनमेन अरलीन से शादी करना चाहते थे। उनके परिवार वाले और मित्र इस शादी के खिलाफ थे। इस बारे मे उनकी अपने पिता से अनबन भी हो गयी। इसके बावजूद फाइनमेन ने अरलीन के साथ शादी की। फाइनमेन, जब लॉस एलमॉस में काम कर रहे थे तो वहां के निदेशक रौबर्ट ओपेन्हाईमर ने अरलीन को पास ही के सैनीटेरियम में भरती करवा दिया ताकि फाइनमेन उससे मिल सके। फाइनमेन के लॉस एलमॉस रहने के दौरान ही अरलीन की मृत्यु हो गयी। इस घटना चक्र पर एक पिक्चर भी बनी है जिसका नाम इंफिनिटी (:en:Infinity (film)) है इसे मैथयू बौरडविक (:en:Matthew Broderick) ने निर्देशित किया है। कौरनल विश्वविद्यालय फाइनमेन जीवन्त थे और अक्सर मौज मस्ती के लिये काम करते थे। मौज मस्ती मे ही उन्होने उस विषय पर काम किया जिस पर उन्हे नोबेल पुरुस्कार मिला। यह भी एक रोचक किस्सा है। दूसरे महायुद्ध के दौरान लॉस एलमॉस लेबॉरेटरी में फाइनमेन की मित्रता बेथ से हुई जिनसे उनकी काफी पटती थी। बेथ कौरनल में थे, इसलिये फाइनमेन भी कौरनल चले गये। एक दिन वे कौरनल के अल्पाहार गृह में बैठे थे। वहां एक विद्यार्थी ने एक प्लेट को फेंका। प्लेट सफेद रंग की थी और उसमें बीच में कौरनल का लाल रंग का चिन्ह था। प्लेट डगमगा भी रही थी और घूम भी रही थी। यह अजीब नज़ारा था। फाइनमेन इसके डगमगाने और घूमने और के बीच में सम्बन्ध ढ़ूढ़ने लगे। इसमे काफी मुश्किल गणित के समीकरण लगते थे। इसमे उनका बहुत समय लगा। उन्होंने पाया कि दोनो मे 2:1 का सम्बन्ध है। उनके साथियों ने उनसे कहा कि वह इसमे समय क्यों बेकार कर रहे हैं। उनका जवाब था, 'इसका कोई महत्व नहीं है मैं यह सब मौज मस्ती के लिये कर रहा हूं।' पर वह इसके महत्व के बारे मे ठीक नहीं थे। वे जब एलेक्ट्रौन के घूमने के बारे में शोध करने लगे तो उन्हें कौरनल की डगमगाती और घूमती प्लेट में लगी गणित फिर से याद आने लगी। इसी ने उस सिद्धान्त को जन्म दिया जिसके कारण उन्हें नोबेल पुरूस्कार मिला। सच है जीवन में बहुत कुछ वह भी आवश्यक है जो केवल मौज मस्ती के लिये हो, चाहे उसका कोई और महत्व हो या न हो - मौज मस्ती ही अपने आप मे एक महत्व की बात है। यदि आप मौज मस्ती में ही अपनी जीविका ढ़ूढ सके तो क्या बात है, यदि यह नहीं हो सकता तो शायद जीविका में ही मौज मस्ती ढ़ूढ पाना दूसरी अच्छी बात है। कैल-टेक फाइनमेन न ही एक महान वैज्ञानिक थे पर एक महान अध्यापक भी थे। उन्हे मालुम था कि अपनी बात दूसरे तक कैसे पहुंचायी जाय। व्याख्यानशाला उनके लिये रंगशाला थी, जिसमें नाटक भी था और आतिशबाजी भी। फाइनमेन के द्वारा भौतिक शास्त्र पर कैल-टेक के लेक्चरों का जिक्र मैने इस लेख को शुरूवात मे किया है। इन लेक्चरों को उन्होने सितम्बर 1961-मई 1963 मे दिया था। यह लेक्चर खास थे इसलिये इन्हें हमेशा के लिये सुरक्षित रखा गया और बाद मे ये तीन लाल किताबों के रूप में छापे गये। फाइनमेन सप्ताह में केवल दो लेक्चर देते थे बाकी समय वह इन लेक्चरों को तैयार करने में लगाते थे। लेक्चर की हर लाइन, हर मजाक को (जो वह लेक्चरों के दौरान करते थे) पहले से सोच विचार कर रखते थे। कभी भी उनके साथ लेक्चर के नोटस नहीं होते थे। बस केवल एक छोटा सा कागज रहता था जिसमें आगे बताने के लिये कुछ खास शब्द केवल संकेत देने के लिये रहते थे। यह तीन साल, संसार मे किसी भी विश्वविद्यालय के, किसी भी विषय पर के लेक्चरों मे अद्वितीय हैं। न कभी ऐसे हुये न शायद फिर कभी होंगे। क्योंकि मालुम नहीं कि फिर कभी ऐसा व्यक्ति आयेगा कि नहीं। फाइनमेन के लिये अंग्रेजी - बेकार और दर्शन शास्त्र - तिरस्कृत विषय था। Religion से उनका कोई वास्ता नहीं था। चक्करों पर बात करना उनकी फिज़ा में नहीं था। वह हमेशा सीधी बात करते थे। उनका मतलब वही होता था जो वे कहते थे। वे इस बात से भ्रमित हो जाते थे यदि उनकी सीधी बात दूसरे को परेशान कर देती थी। चैलेंजर दुर्घटना जांच कमीशन फाइनमेन को लोग अलग अलग तरह से याद रखते हैं - कुछ लोग, उस लडके की तरह जो केवल सोच कर रेडियो ठीक करता था; उस वैज्ञानिक की तरह से जो भौतिक शास्त्र की गणना टौपलेस रेस्तराँ में करना पसन्द करता था; उस चंचल युवा के रूप में याद रखते हैं जो लौस एलमौस की लेबॉरेटरी के तिजोरियों को खोल कर अलग अलग तरह के नोट लिखे कागज को रख कर, सेना के अधिकारियों को तंग करता था; उन्हें बोंगों बजाने वाले की तरह याद करते हैं। सम्भवत: सबसे ज्यादा लोग उन्हें उस व्यक्ति की तरह से याद करते हैं जिसने टीवी के सामने सार्वजनिक रूप से बताया कि चैलेंजर-दुर्घटना क्यों हुई। 28 जनवरी 1986 में चैलेंजर स्पेसशिप का विस्फोट आकाश में हो गया था, इसकी जांच करने के लिये एक कमीशन बैठा। फाइनमेन उसमें वैज्ञानिक की हैसियत से थे। यह विस्फोट, स्पेसशिप में कुछ घटिया किस्म का सामान लगाने के कारण हुआ था। नासा का प्रशासन (जिस पर सेना का जोर है) इसे दबाना चाहता था पर वैज्ञानिक इसे उजागर करना चाहते थे। कमीशन ने अपने निष्कर्ष को टीवी के सामने सीधे प्रसारण मे बताना शुरू किया (इसमें घटिया किस्म के सामान लगाने की बात स्पष्ट नहीं थी)। उस समय टीवी पर ही, सबके सामने फाइनमेन ने एकदम ठन्डे पानी के अन्दर घटिया सामान को डाल कर दिखाया कि वास्तव में विस्फोट क्यों हुआ था। यह सीधा प्रसारण था इसलिये फाइनमेन का प्रदर्शन रोका नहीं जा सका और यह दो मिनट की क्लिप कुछ घन्टो के अन्दर दुनिया की टीवी पर सबसे ज्यादा दिखायी जाने वाली न्यूस क्लिप बन गयी। टौपलेस परिवेषिकायें फाइनमेन पैसाडीना में अक्सर वहीं के एक रेस्तराँ मे जाते थे, जहां पर टौपलेस परिवेषिकायें (Waitress) रहती थीं। उस रेस्तराँ में वे उसके मालिक को भौतिक शास्त्र बताते थे और वह उन्हे चित्रकारी। एक बार पुलिस वालों को लगा कि उस रेस्तराँ में कुछ गड़बड़- सड़बड़ होता है और रेस्तराँ के मालिक पर अश्लीलता का मुकदमा चलाया। वास्तव में वहां पर इस तरह का कोई कार्य नहीं होता था। उस रेस्तराँ में कई प्रतिष्ठित व्यक्ति आते थे रेस्तराँ के मालिक ने उन सबसे गवाही देने की प्रार्थना की। सबने चुप्पे से कन्नी काट ली, पर फाइनमेन ने नहीं। उन्होंने रेस्तराँ मालिक के पक्ष में गवाही दी और अगले दिन अखबारों के पहले पन्ने पर सबसे मुख्य खबर के रूप में छपी। 'Caltech's Feynman tells lewd case jury, he watched the girls while doing his equations' फाइनमेन पर किताबें Surely You’re Joking, Mr. Feynman! by Richard Feynman & Ralph Leighton; What Do You Care What Other People Think? by Richard Feynman & Ralph Leighton; Richard Feynman-A life in Science’ by John Gribbin & Mary Gribbin; Tuva or Bust! by Ralph Leighton; No Ordinary Genius: The Illustrated Richard Feynman; edited by Christopher Sykes; Most of the Good stuff; edited by Laurie Brown & John Rigden; Genius: Richard Feynman and Modern Physics by James Gleik; The Beat of The Different Drum; by Jagdish Mehra. यह सब पढ़ने यो‍ग्य हैं। स्रोत उन्मुक्त - रिचर्ड फिलिप्स फाइनमेन इन्हें भी देखें नोबेल पुरस्कार विजेताओं की सूची बाहरी कड़ियाँ रिचर्ड फाइनमैन श्रेणी:1918 में जन्मे लोग श्रेणी:भौतिक विज्ञानी श्रेणी:नोबेल पुरस्कार विजेता श्रेणी:नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक श्रेणी:नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी श्रेणी:१९८८ में निधन