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411 समाचार
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ब्रह्मा मन्दिर, पुष्कर

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ब्रह्मा मन्दिर पुष्कर Brahma Temple, Pushkar.jpg ब्रह्मा मन्दिर पुष्कर ब्रह्मा मन्दिर पुष्कर India Rajasthan Location in Rajasthan हिन्दू धर्म 26 29 14 N 74 33 15 E IN title ब्रह्मा मन्दिर Official board pictured in :File:Pushkar05.jpg भारत राजस्थान अजमेर पुष्कर ब्रह्मा राजस्थानी वास्तुकला 14वीं सदी ब्रह्मा मन्दिर (अंग्रेजी :Brahma Mandir) एक भारतीय हिन्दू मन्दिर है जो भारत के राजस्थान राज्य के अजमेर ज़िले में पवित्र स्थल पुष्कर में स्थित है। इस मन्दिर में जगत पिता ब्रह्माजी की मूर्ति स्थापित है। इस मन्दिर का निर्माण लगभग ऋषि विश्वामित्र जी ने किया,कालांतर में आदि शंकराचार्य जी ने इसे पुन स्थापित किया , 10वीशताब्दी में मंडोर के प्रतिहार शासकों ने पुन जीर्णोद्वार किया औरंगजेब के शासन काल में इसे क्षतिग्रस्त हुआ तब निम्बाज ठाकुर शंभू सिंह जी ने इसका जीर्णोद्वार करवाया ,http://ppp.rajasthan.gov.in/PWCreport/Tourism-KD4%20Revised/rev-tourism-vol-III.pdf संग्रहीत प्रति 15 नवंबर 2015 https://web.archive.org/web/20110721161616/http://ppp.rajasthan.gov.in/PWCreport/Tourism-KD4%20Revised/rev-tourism-vol-III.pdf 21 जुलाई 2011 dead कार्तिक पूर्णिमा त्योहार के दौरान यहां मन्दिर में हज़ारों की संख्या में भक्तजन आते रहते हैं।http://www.britannica.com/EBchecked/topic/484285/Pushkar#ref285770 संग्रहीत प्रति 15 नवंबर 2015 https://web.archive.org/web/20140814154520/http://www.britannica.com/EBchecked/topic/484285/Pushkar#ref285770 14 अगस्त 2014 live http://www.hindu.com/mp/2009/01/17/stories/2009011750300300.htm संग्रहीत प्रति 15 नवंबर 2015 https://web.archive.org/web/20121107175709/http://www.hindu.com/mp/2009/01/17/stories/2009011750300300.htm 7 नवंबर 2012 live श्री ब्रह्मा मंदिर को भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग द्वारा 4 मार्च 2005 को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया। left|thumb|ब्रह्मा मन्दिर में मंडपम सन्दर्भ श्रेणी:राजस्थान में हिन्दू मन्दिर श्रेणी:पुष्कर पंकज सोनी प्रयागराज। मूल निवास फतेहपुर ग्राम शाहपुर,तहसील खागा। सबसे पहले इस सृष्टि में केवल ब्रह्म आए, और इस ब्रह्माण्ड में ब्रम्ह केवल एक है इसलिए पूरे पृथ्वी पर ब्रह्मा का मंदिर केवल एक है। गिनती पहले ० से शुरू होती है अर्थात पहले इस पृथ्वी पर शून्य था और उस शून्य से एक अंश बाहर निकला (कोख से एक बच्चा निकला) और वो थे ब्रम्ह अर्थात वह ज्ञान जो सर्वोच्च है, पहली गिनती शून्य से इसीलिए प्रारंभ होती है कि जब शून्य था इस ब्रह्माण्ड पर तब कुछ नहीं था।अब शून्य से एक अंश बाहर निकला और वो थे ब्रम्ह इसलिए पहली गिनती बनी १॥ फिर ब्रम्ह ने अपने से एक अंश को बाहर किया वो थे महादेव,इनकी ये गिनती थी २। महादेव से एक अंश बाहर निकला वो थे हरि और संख्या बनी ३। ऐसे ही सबके अंश से एक-एक चीजे निकलती गई और संख्या बनती गई। एक और सत्य ब्रह्माण्ड इसीलिए फैल रहा है कि चीजे अभी पृथ्वी पर बन रही है हर दिन जितनी जीवात्मा जन्म ले रही है वह सब ब्रम्ह ही दे रहे हैं। एक और सत्य इस देश का वास्तविक नाम भरत ही था क्योंकि तब त्रेतायुग आया तो राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न आए। १४ वर्ष के वनवास के बारे में कभी सोचना कि राम का जितने दिन वनवास था उतने दिन भरत भी महल को त्याग दिए कि जब तक भैया नहीं आएंगे हम महल नहीं जाएंगे। भरत का यह त्याग था इसीलिए इस देश का नाम भरत पड़ा।इस ब्रह्माण्ड में देवताओं ने 14 लोक बनाए है,हिन्दू कैलेंडर चन्द्र कैलेंडर के आधार पर आधारित है,चन्द्र वहां भी 14 के बाद या तो पूर्णिमा होगी या आमावस्या,14 दिन बाद सब पूर्ण हो जाएगा। गिनती बस ऐसे ही बनती गई और वह आज भी जारी है।जितने भी लोग आज हमसे जुड़े है यह सभी बोलते है कि कितने लोग जुड़े हैं तुमसे। इसलिए बोलते है ब्रम्ह ही सत्य है। प्रथम युग सतयुग इसीलिए बोलते हैं कि वह ब्रम्ह का युग था अर्थात सत्य का युग था। राम सत्य थे,और सत्य सिर्फ क्या है,केवल ब्रम्ह।। जय श्री कृष्णा।