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अनुच्छेद 12 (भारत का संविधान)
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अनुच्छेद 12 भारत के संविधान का एक अनुच्छेद है। यह संविधान के भाग 3 में शामिल है जो भारतीय नागरिकों और कुछ मामलों में सभी व्यक्तियों को दिए गए मौलिक अधिकारों की गारंटी का वर्णन करता है। इन्हें छह श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें उल्लंघन की स्थिति में समाधान भी शामिल है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 12 में मौलिक अधिकारों के दृष्टि से "राज्य" की परिभाषा बताई गई है।
== पृष्ठभूमि ==
25 नवंबर 1948 को, संविधानसभा के सदस्यों ने मसौदा अनुच्छेद 7 (अनुच्छेद 12) पर चर्चा की, जो मौलिक अधिकारों पर भाग III के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान था। इस लेख में 'राज्य' शब्द को परिभाषित किया गया है जिसका उपयोग इस पूरे भाग में किया गया था।
बहस के दौरान, कुछ संविधानसभा सदस्यों ने चिंता व्यक्त की कि अनुच्छेद की शब्दावली बहुत अस्पष्ट है। उन्होंने इसे स्पष्ट करने के लिए कुछ संशोधन पेश किये। सदस्यों में से एक ने 'अन्य प्राधिकरण' शब्द पर आपत्ति जताई, जिसमें 'राज्य' के दायरे में लगभग सभी सरकारी एजेंसियां या अधिकारी शामिल होंगे। एक अन्य सदस्य ने जिला बोर्डों और नगर पालिकाओं को 'राज्य' मानने के खिलाफ तर्क दिया।
मसौदा समिति के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि 'अन्य प्राधिकारियों' का तात्पर्य उन लोगों से होगा जिनके पास 'कानून बनाने की शक्ति या विवेक निहित होने की शक्ति' है। उन्होंने आगे कहा कि उन सभी संस्थानों को सूचीबद्ध करना बहुत जटिल होगा जिन पर भाग III बाध्यकारी है। अत: 'राज्य' शब्द इस संबंध में उपयोगी था।
संविधानसभा ने 25 नवंबर 1948 को केवल एक मामूली संशोधन के साथ अनुच्छेद को अपनाया।
== मूल पाठ ==
== सन्दर्भ ==
== टिप्पणी ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
https://www.mea.gov.in/Images/pdf1/Part3.pdf
https://www.surveyofindia.gov.in/documents/coi-hindi.pdf
Constitution of India