411 REFERENCE · Wikipedia
अपरिग्रह
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
अपरिग्रह गैर-अधिकार की भावना, गैर लोभी या गैर लोभ की अवधारणा है, जिसमें अधिकारात्मकता से मुक्ति पाई जाती है।। यह विचार मुख्य रूप से जैन धर्म तथा हिन्दू धर्म के राज योग का हिस्सा है। जैन धर्म के अनुसार "अहिंसा और अपरिग्रह जीवन के आधार हैं"।http://navbharattimes.indiatimes.com/-/holy-discourse/religious-discourse/--/articleshow/5136457.cms अहिंसा और अपरिग्रह जीवन के आधार हैं नवभारत टाइम्स आचार्य तुलसी 21 जून 2013 19 अक्टूबर 2009 अपरिग्रह का अर्थ है कोई भी वस्तु संचित ना करना होता है।
जैन धर्म
अहिंसा के बाद, अपरिग्रह जैन धर्म में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण गुण है। अपरिग्रह एक जैन श्रावक के पांच मूल व्रतों में से एक है| जैन मुनि के २८ मूल गुणों में से यह एक है| यह जैन व्रत एक श्रावक की इच्छाओं और संपत्ति को सिमित करने के सिद्धांत है। जैन धर्म में सांसारिक धन संचय को लालच, ईर्ष्या, स्वार्थ और बढ़ती वासना के एक संभावित स्रोत के रूप में माना जाता है। जीवित रहने के लिए पर्याप्त भोजन करना, दिखावे या अहंकार के लिए खाने से ज्यादा महान माना जाता है|Aparigraha - non-acquisition https://web.archive.org/web/20150301054848/http://www.bbc.co.uk/religion/religions/jainism/living/aparigraha.shtml 1 मार्च 2015 , Jainism, BBC Religions
इन्हें भी देखें
जैन धर्म
अहिंसा
सन्दर्भ
श्रेणी:जैन दर्शन
श्रेणी:योग