411 REFERENCE · Wikipedia
अपघर्षक
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
right|thumb|200px|औद्योगिक अपघर्षक
अपघर्षक ऐसे पदार्थ हैं जिन्हें किसी वस्तु के ऊपर रगड़कर उस वस्तु का आकार बदलने या उसे अधिक चिकना (smooth) बनाने का काम आता है। यह प्राकृतिक तथा कृत्रिम पदार्थों को मिलाकर बनाया जाता है और लकड़ी, धातु तथा पत्थरों के प्रमार्जन तथा उनपर चमक पैदा करने के कामों में लाया जाता है। प्राकृतिक अपघर्षकों में कुरुबिंद (कोरंडम, corundum), एमरी, (emery), बालू (sand) तथा विविध प्रकार के पत्थर हैं, जिनका उपयोग पेषण पत्थर और शाणचक्रों (grinding wheels) के बनाने में होता है। दूसरे प्राकृतिक अपघर्षक भी हैं, जो इतने लाभदायक और अधिक उपयोगी नहीं हैं।
कभी-कभी अपघर्षकों का प्रयोग चिकना बनाने के बजाय खुरदरा बनाने के लिए भी किया जाता है।
परिचय
बनावटी अपघर्षकों में कारबोरंडम (carborundum), जो कार्बन तथा कुरुबिंद को मिलाकर बनता है, पिसा हुआ लोहा तथा इस्पात हैं। इस्पात से एमरी भी बनाया जाता है। या तो इस्पात को पीसकर, या फिर इस्पात एमरी बनाकर अपघर्षक बनाते हैं। इस्पात एमरी बनाने का नियम यह है कि अच्छे इस्पात को अधिक तपाकर तुंरत जल में डाल देते हैं। इस ठंढे लोहे को यंत्रों द्वारा पीस लिया जाता है।
इन प्राकृतिक तथा बनावटी अपघर्षकों को चिपकनेवाले पदार्थ के साथ मिलाकर पेषण पत्थर या शाणचक्र बनाए जाते हैं। इन चिपकनेवाले पदार्थों में काचित (Vitrified) सिलिकेट, चपड़ा (shellac), संश्लिष्ट रेजिन और रबर मुख्य हैं। विशेष भारी कामों के लिये, या ऐसे कामों के लिये जहाँ धातु को अधिक तीव्र गति पर घिसना होता है, काचित पदार्थ का उपयोग सबसे अधिक होता है।
रबर ऐसे पतले चक्र बनाने के काम में लाया जाता है जिनसे किसी धातु को दो भागों में काटा जाता है। ये चक्र भंगुर नहीं होते और इस प्रकार इनके टूटने का डर नहीं रहता।
अपघर्षक की संरचना पर ध्यान देना जरुरी है,। संरचना से मतलब धर्षक के कणों की एक दूसरे से दूरी से है। दूर दूर रखे गए कण मृदु और तन्य (ductile) धातु को ठीक प्रकार से काट सकते हैं, परंतु पास पास रखे गए कण कठोर तथा भंगुर धातु के लिये उपयुक्त होते हैं। पास पासवाले कण से अच्छी परिसज्जा (finish) होती है और समतल पर चमक आ जाती है।
अपघर्षक के कणों के परिमाण का भी प्रभाव धातु पर पड़ता है। कठोर और भंगुर धातुएँ छोटे कण के अपघर्षक से अच्छी कटती हैं और इसी प्रकार ये अपघर्षक प्रमार्जन के लिय भी ठीक होते हैं। मोटे कण के अपघर्षकों से अधिक धातु कम समय में कट जाती है, परंतु अच्छी परिसज्जा नहीं हो पाती और धातु पर रेखाएँ पड़ जाती हैं।
श्रेणी:धातु कर्मण