411 REFERENCE · Wikipedia
संयम
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
संयम मुक्त भोग और पूर्ण त्याग के मध्य आत्मनियंत्रण की स्थिति है। व्यवहारिक जीवन और आध्यात्मिक साधनाओं में सफलता के लिए इसे अनिवार्य माना गया है। आध्यात्मिक दृष्टि से संयम आत्मा का गुण है। इसे आत्मा का सहज स्वभाव माना गया है। संयम शून्य अबाध भोग से इन्द्रिय की तृप्ति संभव नहीं है। संयम मुक्त इंद्रिय व्यक्ति एवं समाज को पतन की ओर अग्रसर करती है।
संयम और दमन
संयम और दमन में अन्तर है। संयम में नियंत्रण है। दमन का अर्थ दबाना है। बहुत सी साधनाओं में साधक द्वारा अपनी वृत्तियों को दबाने के बजाय नियंत्रित करने को कहा जाता है।
साहित्य और भारतीय महाकाव्यों में संयम
भारतीय महाकाव्य साहित्य में संयम का संबंध कठिन परिस्थितियों में अपने आचरण, भावनाओं और कर्तव्य के प्रति नियंत्रण बनाए रखने से भी जोड़ा गया है। रामायण और महाभारत में ऐसे प्रसंग मिलते हैं जिनमें पात्र संकट, वनवास, संघर्ष या व्यक्तिगत कठिनाइयों के बीच अपने कर्तव्य और धर्म के अनुसार आचरण करते हैं।
रामायण में संयम
रामायण में राम के वनवास का प्रसंग संयम, धैर्य और कर्तव्यपालन के संदर्भ में उल्लेखनीय है। वनवास की परिस्थिति में राम अपने पिता के वचन और धर्म के पालन को स्वीकार करते हैं। वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकाण्ड में राम वनवास के निर्णय को स्वीकार करते हुए पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने की बात कहते हैं। इस प्रसंग को प्रतिकूल परिस्थिति में व्यक्तिगत इच्छा पर कर्तव्य को प्राथमिकता देने के उदाहरण के रूप में देखा जाता है।[संदर्भ]
महाभारत में संयम
महाभारत में भी संयम का संबंध धर्म, आत्मनियंत्रण और कठिन परिस्थितियों में उचित आचरण से मिलता है। वनवास के प्रसंगों में युधिष्ठिर अनेक कठिन परिस्थितियों के बीच धैर्य और धर्म के पालन पर बल देते हैं। महाभारत के शान्तिपर्व में संयम को व्यक्ति के गुणों में सम्मिलित किया गया है और धर्म तथा आत्मनियंत्रण के संदर्भ में इसका उल्लेख मिलता है।[संदर्भ]
इन्हें भी देखें
धैर्य
नियंत्रण
करुणा
आत्मनियंत्रण
अनुशासन
नैतिकता
ध्यान
धारणा
समाधि
योग
सन्दर्भ
श्रेणी:पारिभाषिक शब्दावली
श्रेणी:आध्यात्म
श्रेणी:मनोविज्ञान