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ज़िन्दगीनामा - ज़िन्दा रुख़
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ज़िन्दगीनामा - ज़िन्दा रुख़ कृष्णा सोबती हिंदी भारत साहित्य उपन्यास साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त कृति
ज़िन्दगीनामा - ज़िन्दा रुख़ हिन्दी की विख्यात साहित्यकार कृष्णा सोबती द्वारा रचित एक उपन्यास है जिसके लिये उन्हें सन् १९८० में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp अकादमी पुरस्कार साहित्य अकादमी 11 सितंबर 2016 https://web.archive.org/web/20160915135020/http://sahitya-akademi.gov.in/sahitya-akademi/awards/akademi%20samman_suchi_h.jsp 15 सितंबर 2016 dead इसका प्रकाशन सन् 1979 में हुआ था।
कथावस्तु
इस उपन्यास पर प्रकाश डालते हुए गोपाल राय लिखते हैं कि- "जिन्दगीनामा बीसवीं शताब्दी के प्रथम पन्द्रह वर्षों में पंजाब के किसानों-ग्रामीणों के जीवन का चित्रण है । यह जिन्दगी निखालिस यथार्थ के रूप में सामने आती है; पंजाबी किसानों की मेहनत-मशक्कत से भरी अक्खड़, सन्तुष्ट और मुक्त जिन्दगी, जिसमें महाजन का शोषण और पुलिस का आतंक भी कोई ज्यादा हलचल नहीं पैदा करता ।"गोपाल राय हिन्दी उपन्यास का इतिहास 2014 राजकमल प्रकाशन नई दिल्ली 978-81-267-1728-6 321
सन्दर्भ
श्रेणी:साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत हिन्दी भाषा की पुस्तकें
श्रेणी:२०वीं सदी का साहित्य
श्रेणी:कृष्णा सोबती