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अलेक्सांदर द्वितीय
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right|thumb|300px|रूस का ज़ार अलेक्सान्दर द्वितीय
अलेक्सांदर द्वितीय (रूसी : Алекса́ндр II Никола́евич; १८१२ - १८८१) रूस का ज़ार (१८५५ से ८१) था। वह निकोलस प्रथम का ज्येष्ठ पुत्र था।
परिचय
२ मार्च १८५५ को निकोलस प्रथम की जब सेवेस्तोपल में भारी पराजय के बाद मृत्यु हुई और जब क्रीमिया का युद्ध चल ही रहा था, यह रूस के सिंहासन पर बैठा। तुर्की से मिली पराजय ने सेना के संगठन और राज्य में आंतरिक सुधार की आवश्यकता को अनिवार्य कर दिया था। यद्यपि अलेक्सांदर स्वभाव से कोमल था, तथापि कम सहिष्णु और प्रतिगामी था। इतिहास में यह 'मुक्तिदाता' और 'महान् सुधारों का युगप्रवर्तक' के नाम से प्रसिद्ध हुआ। मुक्ति कानून द्वारा उसने एक करोड़ भूदासों को स्वाधीन कर दिया, काश्तकारों को बिना मुआवजा दिए वैयक्तिक स्वाधीनता दे दी। १८६४ में जिला और प्रांतिक कौंसिलों (जेम्सहस) की और १८७० में निर्वाचित नगरपालिकाओं की स्थापना हुई। इसी काल स्थानीय स्वायत्तशासन का विकास, न्याय के कानूनों में संशोधन, जूरीप्रणाली का प्रारंभ और शिक्षाप्रणाली में संशोधन हुआ। सैनिक शिक्षा अनिवार्य की गई।
रूस की औद्योगिक क्रांति का आरंभ अलेक्सांदर द्वितीय के शासनकाल में ही हुआ। व्यवसाय और रेलवे का विस्तार हुआ। काकेशस पर आधिकार जम गया। मध्य एशिया में रूस के राज्यविस्तार से रूस और ब्रिटेन के संबंधों में तनाव आ गया।
किंतु अलेक्सांदर के शासनसुधार प्यासे के लिए ओस के समान थे। क्रांतिकारी दल इससे संतुष्ट नहीं था। उसकी शक्ति बराबर बढ़ती गई। उसी मात्रा में ज़ार भी प्रतिक्रियावादी होता गया और जीवन के पिछले सालों में उसका प्रयत्न अपने ही सुधारों को व्यर्थ करने में लगा। १८६३ में पोलैंड से विद्रोह हुआ जो क्रूरतापूर्वक कुचल दिया गया। तुर्की से १८७७ में पुन: युद्ध छिड़ गया। सुदूर पूर्व में आमूर नदी की घाटी का प्रदेश ब्लादीवोस्तक तक (१८६०) और जापान से सखालिन तक (१८७५) लेने में ज़ार भी सफल हुआ।
नारादनाया वोल्या नामक वामपंथी आतंकवादी संगठन द्वारा १३ मार्च १८८१ को सेंट पीटर्सबर्ग में जमीन के नीचे बम रखकर ज़ार अलेक्सांदर की हत्या कर दी गई।
इन्हें भी देखें
नारादनाया वोल्या
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