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411 समाचार
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टोबा टेक सिंह (कहानी)

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टोबा टेक सिंह (उर्दू: ur ٹوبہ ٹیک سنگھ) सादत हसन मंटो द्वारा लिखी गई और १९५५ में प्रकाशित हुई एक प्रसिद्ध लघु कथा है। यह भारत के विभाजन के समय लाहौर के एक पागलख़ाने के पागलों पर आधारित है और समीक्षकों ने इस कथा को पिछले ५० सालों से सराहते हुए भारत-पाकिस्तान सम्बन्धों पर एक "शक्तिशाली तंज़" बताया है।http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urdu/tobateksingh/storynotes.html Toba Tek Singh - About the story - Columbia University 23 फ़रवरी 2012 https://web.archive.org/web/20120615052120/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urdu/tobateksingh/storynotes.html 15 जून 2012 dead कहानी का सार १९४७ में विभाजन के समय भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने एक दुसरे के हिन्दू-सिख और मुस्लिम पागलों की अदला-बदली करने पर समझौता किया। लाहौर के पागलख़ाने में बिशन सिंह नाम का एक सिख पागल था जो टोबा टेक सिंह नामक शहर का निवासी था। उसे पुलिस के दस्ते के साथ भारत रवाना कर दिया गया, लेकिन जब उसे पता चला कि टोबा टेक सिंह भारत में न जाकर बंटवारे में पाकिस्तान की तरफ़ पड़ गया है तो उसने जाने से इनकार कर दिया।Toba Tek Singh https://web.archive.org/web/20120415201102/http://www.columbia.edu/itc/mealac/pritchett/00urdu/tobateksingh/translation.html 15 अप्रैल 2012 , Saadat Hasan Manto, The Pakistan Academy of Letters, 2006 कहानी के अंत में बिशन सिंह दोनों देशों के बीच की सरहद में कंटीली तारों के बीच लेटा, मरा या मरता हुआ दर्शाया गया। कथा का आख़री जुमला है: इधर ख़ारदार (कंटीली) तारों के पीछे हिन्दोस्तान था। उधर वैसे ही तारों के पीछे पाकिस्तान। दरम्यान में ज़मीन के उस टुकड़े पर जिस का कोई नाम नहीं था, टोबा टेक सिंह पड़ा था। बिशन सिंह की बड़बड़ाहटें कहानी में जब भी मुख्य पात्र बिशन सिंह उत्तेजित या ग़ुस्सा होता है तो पंजाबी, हिन्दी-उर्दू और अंग्रेज़ी को मिलाजुलाकर बड़बड़ाने या चिल्लाने लगता है। उसकी बातें वैसे तो बेमतलब होती हैं लेकिन उनमें भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए दबी हुई सी गालियाँ भी दिखती हैं। उदाहरण के लिए: ऊपर दी गुड़-गुड़ दी एनेक्सी दी बेध्याना दी मूंग दी दाल ऑफ़ दी पाकिस्तान एंड हिन्दुस्तान ऑफ़ दी दुर्र फिट्टे मूंहBlooming through the ashes: an international anthology on violence and the human spirit, Clifford Chanin, Aili McConnon, Rutgers University Press, 2008, ISBN 978-0-8135-4213-3, ... Bashan Singh walked away muttering: 'Upar di gur gur di annexe di bedhiyana di mung di daal of di Pakistan and Hindustan of di dar fatay mun!' ... प्रतिक्रियाएँ विभाजन की ६०वीं सालगिरह पर पाकिस्तानी नाटक-मंडली अजोका ने इस कथा पर आधारित नाटक भारत में रचाया। इसपर समाचारों में हुई एक टिप्पणी के अनुसार यह 'दोनों देशों के बीच के मामलों पर एक तबसरा है, जिसमें कमेटियों, उपकमेटियों और मंत्रीय-स्तर के वार्तालापों को ही सभी मसलों का हल बताया जाता है'।http://www.hindu.com/fr/2007/08/17/stories/2007081750370300.htm Beyond the shadows, Friday Review Delhi : The Hindu 23 फ़रवरी 2012 https://web.archive.org/web/20121026042227/http://www.hindu.com/fr/2007/08/17/stories/2007081750370300.htm 26 अक्तूबर 2012 live इन्हें भी देखें सादत हसन मंटो भारत का विभाजन बाहरी कड़ियाँ टोबा टेकसिंह (हिन्दी समय पर) सआदत हसन मंटो की कहानी- 'टोबा टेक सिंह' (अभिव्यक्ति) यु-ट्यूब पर ज़िया मोहियुद्दीन द्वारा पढ़ी गई हिन्दी-उर्दू में 'टोबा टेक सिंह' (भाग १) यु-ट्यूब पर ज़िया मोहियुद्दीन द्वारा पढ़ी गई हिन्दी-उर्दू में 'टोबा टेक सिंह' (भाग २) सन्दर्भ श्रेणी:उर्दू साहित्य श्रेणी:पाकिस्तानी साहित्य श्रेणी:भारत के विभाजन पर आधारित साहित्य श्रेणी:कहानी