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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

गिलोय

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टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया Tinospora cordifolia.jpg पादप मैग्नोलियोफाइटा मैग्नोलियोप्सीडा Ranunculales Menispermaceae Tinospora T. cordifolia Tinospora cordifolia (Thunb.) Miers गिलोय (वानस्पतिक नाम: Tinospora cordifolia एक बहुवर्षीय लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं। आयुर्वेद में इसको कई नामों से जाना जाता है यथा अमृता, गुडुची, ततो येयु प्रदेशेषु कपिगात्रात् परिच्युताः। पीयुषबिन्दवः पेतुस्तेभ्यो जाता गुडूचिका॥ छिन्नरुहा, चक्रांगी, आदि। आयुर्वेद साहित्य में इसे ज्वर की महान औषधि माना गया है एवं जीवन्तिका नाम भी दिया गया है। गिलोय की लता जंगलों, खेतों की मेड़ों, पहाड़ों की चट्टानों आदि स्थानों पर सामान्यतः कुण्डलाकार चढ़ती पाई जाती है। नीम, आम्र के वृक्ष के आस-पास भी यह मिलती है। जिस वृक्ष को यह अपना आधार बनाती है, उसके गुण भी इसमें समाहित रहते हैं। इस दृष्टि से नीम पर चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है। इसका काण्ड छोटी अंगुली से लेकर अँगूठे जितना मोटा होता है। बहुत पुरानी गिलोय में यह बाहु जैसा मोटा भी हो सकता है। इसमें से स्थान-स्थान पर जड़ें निकलकर नीचे की ओर झूलती रहती हैं। चट्टानों अथवा खेतों की मेड़ों पर जड़ें जमीन में घुसकर अन्य लताओं को जन्म देती हैं। गिलोय का उपयोग विभिन्न बीमारियों सेे लड़ने एवं रोग प्रतिरोधक क्षमताा बढ़ाने कियााा जाता हैl डा सुनील बैल जी----गिलोय एक प्लान्ट मेंडिसिन है।।गिलोय ज़हरीला गुण रखती है। Antibiotic ।।किटाणु मारने‌ की पावरhttps://accounts.google.com/v3/signin/identifier?continue=https%3A%2F%2Fmail.google.com%2Fmail%2Fu%2F0%2F&dsh=S-469476577%3A1761926813683577&emr=1&followup=https%3A%2F%2Fmail.google.com%2Fmail%2Fu%2F0%2F&ifkv=ARESoU3VObMfKSTEOfzyu4D52MT2950R-l6nbVbzcvw4SAmh0blo_u2UI6gb29Uyyvn7A7DWA0-gmg&osid=1&passive=1209600&service=mail&flowName=GlifWebSignIn&flowEntry=ServiceLogin Gmail accounts.google.com 2025-10-31।जहर शरीर की क्रियाओं को उत्तेजित करता है ।तथा किटाणु भी मारता है।जो उसमें साल्ट है जैसे कैल्नशियम , मैग्नीशियम, आयरन, पोटेशियम, सोडियम आदि है नयी सेल का निर्माण करता है।इसी का नाम है आयुर्वेद।आयु को बढ़ाने वाला पूर्ण सत्य विज्ञान ।पुरजे को बदल कर ठीक करने वाला विज्ञानगिलोय thumb|200px|left|तालकटोरा उद्यान, दिल्ली में गिलोय के पौधे thumb|गिलोय के फल। बेल के काण्ड की ऊपरी छाल बहुत पतली, भूरे या धूसर वर्ण की होती है, जिसे हटा देने पर भीतर का हरित मांसल भाग दिखाई देने लगता है। काटने पर अन्तर्भाग चक्राकार दिखाई पड़ता है। पत्ते हृदय के आकार के, खाने के पान जैसे एकान्तर क्रम में व्यवस्थित होते हैं। ये लगभग 2 से 4 इंच तक व्यास के होते हैं। स्निग्ध होते हैं तथा इनमें 7 से 9 नाड़ियाँ होती हैं। पत्र-डण्ठल लगभग 1 से 3 इंच लम्बा होता है। फूल ग्रीष्म ऋतु में छोटे-छोटे पीले रंग के गुच्छों में आते हैं। फल भी गुच्छों में ही लगते हैं तथा छोटे मटर के आकार के होते हैं। पकने पर ये रक्त के समान लाल हो जाते हैं। बीज सफेद, चिकने, कुछ टेढ़े, मिर्च के दानों के समान होते हैं। उपयोगी अंग काण्ड है। पत्ते भी प्रयुक्त होते हैं। ताजे काण्ड की छाल हरे रंग की तथा गूदेदार होती है। उसकी बाहरी त्वचा हल्के भूरे रंग की होती है तथा पतली, कागज के पत्तों के रूप में छूटती है। स्थान-स्थान पर गाँठ के समान उभार पाए जाते हैं। सूखने पर यही काण्ड पतला हो जाता है। सूखे काण्ड के छोटे-बड़े टुकड़े बाजार में पाए जाते हैं, जो बेलनाकार लगभग 1 इंच व्यास के होते हैं। इन पर से छाल काष्ठीय भाग से आसानी से पृथक् की जा सकती है। स्वाद में यह तीखी होती है, पर गन्ध कोई विशेष नहीं होती। पहचान के लिए एक साधारण-सा परीक्षण यह है कि इसके क्वाथ में जब आयोडीन का घोल डाला जाता है तो गहरा नीला रंग हो जाता है। यह इसमें स्टार्च की उपस्थिति का परिचायक है। सामान्यतः इसमें मिलावट कम ही होती है, पर सही पहचान अनिवार्य है। कन्द गुडूची व एक असामी प्रजाति इसकी अन्य जातियों की औषधियाँ हैं, जिनके गुण अलग-अलग होते हैं। सन्दर्भ श्रेणी:मेनिस्पर्मेसी श्रेणी:औषधीय पौधे श्रेणी:एशिया के वनस्पति