Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

दर्शन सिंह

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

दर्शन सिंह 14 सितंबर 1921 30 मई 1989 दिल्ली, भारत भारतीय संत मत सत्संग, ध्यान, आध्यात्मिक प्रवचन, बाबा सावन सिंह, संत कृपाल सिंह हरभजन कौर सावन कृपाल रुहानी मिशन, संत मत राजिंदर सिंह (पुत्र) कृपाल सिंह (पिता) साईंस ऑफ स्पिरिचुएलिटी, [ज्योति मेडिटेशन] मता-ए-नूर, मंज़िल-ए-नूर प्रभु का निवास मानव शरीर में ही है तथा गुरुकृपा व ध्यान द्वारा उसे प्राप्त किया जा सकता है। उर्दू अकादमी सम्मान (४ बार) मता-ए-नूर, मंज़िल-ए-नूर अपने ही यार की तो हैं, जितनी भी हैं निशानियाँ। दैर मिले तो सर झुका, काबा मिले सलाम कर।। दर्शन सिंह मता-ए-नूर, मंज़िल-ए-नूर अपने ही यार की तो हैं, जितनी भी हैं निशानियाँ। दैर मिले तो सर झुका, काबा मिले सलाम कर।। सन्त दर्शन सिंह (1921–1989) भारत के आधुनिक काल के आध्यात्मिक गुरुओं में थे। दिल्ली स्थित सावन कृपाल रुहानी मिशन से संचालित सन्त मत विचारधारा के प्रणेता रहे। उर्दू व फारसी में वे सिद्धहस्त थे तथा सूफ़ी रहस्यात्मक शायरी में कई अत्यंत गहरी रचनाएँ उन्होंने मानवजाति को दीं। प्रारंभिक जीवन दर्शन सिंह जी का जन्म १४ सितंबर १९२१ को हुआ। उनके पिता संत कृपाल सिंह जी बाबा सावन सिंह जी के अनुयायी थे। ५ वर्ष की आयु में ही दर्शन ने बाबा सावन सिंह जी से सुरत शब्द योग की दीक्षा प्राप्त की तथा उनके मार्गदर्शन में रुहानी सफर शुरु किया। 1948-1974 तक पिता कृपाल सिंह के मार्गदर्शन में यह सफर जारी रहा। 1974 में संत कृपाल सिंह जी इन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित करके परमेश्वर के चरणों में लीन हुए। दर्शन सिंह जी की शिक्षा लाहौर के पंजाब विश्वविद्यालय के सरकारी कॉलेज में हुई। ३७ वर्ष की सरकारी नौकरी के पश्चात् १९७९ में वे वित्त मंत्रालय में डिप्टी सचिव के पद से रिटायर हुए। आध्यायात्मिक गुरु उन्होंने दिल्ली में सावन कृपाल रुहानी मिशन की स्थापना की। इनके नेतृत्व में दिल्लि में कृपाल आश्रम की स्थापना हुई तथा इस मिशन के ५५० से अधिक केंद्र ४० देशों में स्थापित हुए। आपने छटे कॉन्फ्रेन्स ऑफ वर्ल्ड फेलोशिप ऑफ रिलिजन्स, एशियन कॉन्फ्रेन्स ऑफ रिलिजन्स फॉर पीस तथा दिल्ली में आयोजित पंद्रहवें मानव एकता सम्मेलन का नेतृत्व भी किया। 1986 में उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा आंतरिक और बाह्य शांति के विषय पर अपना संदेश देने के लिये आमंत्रित किया गया। वहाँ दिये गये अपने संदेश में उन्होंने सकारात्मक अध्यात्म (positive mysticism) पर ज़ोर दिया, जिसके अंतर्गत हम परिवार, समाज और विश्व के प्रति अपने समस्त उत्तरदायित्वों का निर्वाह करने के साथ-साथ अपने आध्यात्मिक लक्ष्य को भी प्राप्त कर सकते हैं। रचनाएँ पुस्तकें तलाश-ए-नूर मता ए नूर मंज़िल-ए-नूर संगीत एलबम संत दर्शन सिंह जी द्वारा रचित कुछ चुनिंदा ग़ज़लों को प्रख्यात ग़ज़ल गायक गुलाम अली ने अपनी आवाज़ में टी-सीरीज़ द्वारा प्रकाशित एलबम कलाम-ए-मोहब्बत में गाया।http://www.hindilyrics.net/lyrics/by-lyricist-Sant%20Darshan%20Singh%20Ji%20Maharaj.html संग्रहीत प्रति 9 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20150511111051/http://www.hindilyrics.net/lyrics/by-lyricist-Sant%20Darshan%20Singh%20Ji%20Maharaj.html 11 मई 2015 dead कुछ चुनिंदा शे'र राज़-ए-निहाँ थी ज़िंदगी, राज़-ए-निहाँ है आज भी। वहम-ओ-गुमाँ अज़ल में थी, वहम-ओ-गुमाँ है आज भी।। सम्मान अपनी रूहानी शायरी की कि़ताबों के लिये चार बार उर्दू अकादमी पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। http://www.sos.org/hi/page/rich-heritage.html संग्रहीत प्रति 9 जनवरी 2015 https://web.archive.org/web/20141230021843/http://www.sos.org/hi/page/rich-heritage.html 30 दिसंबर 2014 dead सन्दर्भ श्रेणी:संत मत श्रेणी:1921 में जन्मे लोग श्रेणी:१९८९ में निधन