411 REFERENCE · Wikipedia
हरिवंश नारायण सिंह (राघोपुर विधायक)
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
हरिवंश नारायण सिंह हरिवंश नारायण सिंह.png हरिवंश नारायण सिंह (पूर्व विधायक, राघौपुर) सदस्य, बिहार विधानसभा राघोपुर 1952 1962 (पद स्थापित) देवदत्त राय सदस्य, बिहार विधानसभा राघोपुर 1967 1969 संयुक्त विधायक दल देवदत्त राय रामवृक्ष राय अध्यक्ष, भूमि विकास बैंक (बिहार-झारखंड) 18 दिसंबर 1920 चेचर, बिद्दुपुर, वैशाली जिला, बिहार 8 अगस्त 2001 (उम्र 80 वर्ष) हाजीपुर, वैशाली जिला, बिहार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1952–1962)भारतीय जनसंघ (1967) सुमित्रा देवी बाबू वासुदेव सिंह (पिता) एम.ए. (द्वय), एलएलएम (LLM) अधिवक्ता, राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी
हरिवंश नारायण सिंह (18 दिसंबर 1920 – 8 अगस्त 2001) बिहार के एक वरिष्ठ राजनेता, स्वतंत्रता सेनानी और कुशल प्रशासक थे। वे वैशाली जिले के राघौपुर विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक चुने गए थे। उन्होंने तत्कालीन संयुक्त बिहार और झारखंड में भूमि विकास बैंक के अध्यक्ष सहित विभिन्न सरकारी विभागों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाई।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
हरिवंश नारायण सिंह का जन्म 18 दिसंबर 1920 को वैशाली जिले के बिद्दुपुर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक चेचर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम बाबू वासुदेव सिंह था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा की ओर रुख किया। वे अपने दौर के बेहद उच्च शिक्षित व्यक्तियों में से थे। उन्होंने अलग-अलग विषयों में स्नातकोत्तर (M.A.) की उपाधि प्राप्त की और पटना विश्वविद्यालय से कानून की सर्वोच्च डिग्री एलएलएम (LLM) भी उत्तीर्ण की। शिक्षा पूरी करने के बाद वे वकालत के पेशे से जुड़ गए।
स्वतंत्रता आंदोलन और काला पानी की सजा
युवावस्था में ही हरिवंश नारायण सिंह स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े और वैशाली व आस-पास के क्षेत्र में एक प्रखर स्वतंत्रता सेनानी के रूप में उभरे। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के खिलाफ उनके कड़े रुख और गतिविधियों के कारण तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने उन्हें काला पानी की कठोर सजा सुनाई थी। इसके तहत उन्हें अंडमान और निकोबार की कुख्यात 'सेलुलर जेल' में नजरबंद रखा गया था। देश की आजादी के बाद उन्हें एक सम्मानित स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा प्राप्त हुआ।
राजनीतिक सफरनामा
आजादी के बाद जब देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया शुरू हुई, तो हरिवंश नारायण सिंह ने राघौपुर दियारा क्षेत्र के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए चुनावी राजनीति में कदम रखा।
1952 (प्रथम विधानसभा): वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर राघौपुर क्षेत्र के सबसे पहले विधायक बने।
1957 (द्वितीय विधानसभा): उन्होंने कांग्रेस के ही टिकट पर दोबारा शानदार जीत दर्ज की।
1967 (चतुर्थ विधानसभा): वैचारिक मतभेदों के बाद वे भारतीय जनसंघ में शामिल हो गए और तीसरी बार राघौपुर से विधायक चुने गए।
प्रशासनिक एवं संस्थागत भूमिकाएं
विधायक रहने के साथ-साथ उनकी प्रशासनिक क्षमता को देखते हुए उन्हें तत्कालीन बिहार सरकार में 15 से अधिक महत्वपूर्ण सरकारी विभागों और स्वायत्त संस्थाओं के शीर्ष पदों पर काम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
भूमि विकास बैंक (Land Development Bank): वे तत्कालीन संयुक्त बिहार और झारखंड के भूमि विकास बैंक के अध्यक्ष रहे।
उत्पाद शुल्क विभाग (Excise Department)
परिवहन विभाग (Transport Department)
बिहार राज्य खादी ग्रामोद्योग बोर्ड (Khadi Board)
बिस्कोमान (Biscomaun - Bihar State Co-operative Marketing Union)
सामाजिक कार्य और व्यक्तिगत जीवन
उनका मुख्य उद्देश्य गंगा पार के पिछड़े राघौपुर दियारा क्षेत्र का विकास और उत्थान करना था। वे एक परोपकारी और दानवीर राजनेता थे। अपने क्षेत्र में शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रसार के लिए उन्होंने अपनी निजी भूमि दान में दे दी, जिस पर स्थानीय स्कूल, अस्पताल और पुस्तकालय का निर्माण हुआ।
उनका विवाह सुमित्रा देवी से हुआ था। उनका परिवार वैशाली और हाजीपुर क्षेत्र में सामाजिक रूप से बेहद प्रतिष्ठित है। उनके परिवार में उनके चार बेटे, सात पोते और दो पोतियां हैं, जो समाज में उनके सामाजिक और वैचारिक मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।
निधन
8 अगस्त 2001 को हाजीपुर में 80 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। उनके सम्मान में क्षेत्र के कई सामाजिक और शैक्षणिक संस्थानों का नामकरण उनके नाम पर किया गया है।
श्रेणी:1920 में जन्मे लोग
श्रेणी:2001 में निधन
श्रेणी:बिहार के राजनीतिज्ञ
श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी
श्रेणी:बिहार के विधायक