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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

तैलप २

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प्रातीच्य चालुक्य राजा 973-997 ईस्वी (11 वर्ष) सत्यश्रय पश्चिमी चालुक्य राजवंश तैलप द्वितीय (शासनकाल लगभग 973–997 ई.), जिन्हें तैला द्वितीय तथा अपनी उपाधि आहवमल्ल के नाम से भी जाना जाता है, दक्कन भारत में पश्चिमी चालुक्य साम्राज्य के संस्थापक थे। तैलप अपने को वातापी (बादामी) के प्राचीन चालुक्य सम्राटों का वंशज बताते थे। प्रारंभ में वे राष्ट्रकूट राजवंश के सामंत के रूप में वे वर्तमान बीजापुर ज़िले में शासन करते थे। जब परमार राजा सीयक हर्ष के आक्रमण के बाद राष्ट्रकूट शक्ति का पतन हुआ, तब तैलप ने राष्ट्रकूट सम्राट कर्क द्वितीय को हरा कर एक नए वंश की स्थापना की।http://archive.org/details/dli.ernet.527925 The Early History Of The Deccan Pat I-vi (1960) Yazdani G. 1960 Oxford University Press. तैलप ने नर्मदा और तुंगभद्रा नदियों के बीच स्थित पश्चिमी दक्कन क्षेत्र पर अपना नियंत्रण सुदृढ़ करने में कई वर्ष लगाए। धीरे-धीरे शिलाहार राजवंश सहित अनेक पूर्व राष्ट्रकूट सामंतों ने उनकी अधीनता स्वीकार कर ली। तैलप ने चोल और परमार वंश के आक्रमणों का सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया तथा आक्रमणकारी परमार वंश के राजा वाक्पति मुंज को बंदी बनाकर उसकी हत्या कर दी। उनके सेनापति बारप ने वर्तमान गुजरात के लाट क्षेत्र पर अधिकार कर लिया, जहाँ लाट चालुक्य प्रमुखों की शाखा की स्थापना हुई। तैलप के उत्तराधिकारियों ने 12वीं शताब्दी तक पश्चिमी दक्कन क्षेत्र पर शासन जारी रखा। सन्दर्भ श्रेणी:भारत का इतिहास श्रेणी:१०वीं शताब्दी के भारतीय शासक