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अनुच्छेद 143 (भारत का संविधान)
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भारत का संविधान भाग 5 संघ की न्यायपालिका अनुच्छेद 144 (भारत का संविधान) अनुच्छेद 142 (भारत का संविधान) भारतीय संविधान सभा भारत हिंदी :श्रेणी:संविधान 1949 प्रकाशित
अनुच्छेद 143 भारत के संविधान के भाग 5 में शामिल है जो उच्चतमन्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति का वर्णन करता है।4 February 2015 Advisory Jurisdiction (Article 143) - Academike https://www.lawctopus.com/academike/advisory-jurisdiction-article-143 10 December 2025 en-US अनुच्छेद 143 न्यायपालिका और कार्यपालिका के मध्य संतुलित संवाद की एक अद्वितीय संवैधानिक व्यवस्था का परिचायक है। यह प्रावधान राष्ट्रपति को यह अधिकार प्रदान करता है कि वे जनहित या विधिक महत्व के किसी प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श प्राप्त कर सकें।सईद सैयद मोहम्मद 1978 Bhāratīya rājanītika praṇālī https://www.google.co.th/books/edition/Bh%C4%81rat%C4%ABya_r%C4%81jan%C4%ABtika_pra%E1%B9%87%C4%81l%C4%AB/orstAQAAIAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9B%E0%A5%87%E0%A4%A6+143+(%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4+%E0%A4%95%E0%A4%BE+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8)&dq=%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%81%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9B%E0%A5%87%E0%A4%A6+143+(%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4+%E0%A4%95%E0%A4%BE+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8)&printsec=frontcover 29 अप्रैल 2010 मैकामिलाना इस प्रकार यह अनुच्छेद न केवल शासन के विभिन्न अंगों के बीच समन्वय स्थापित करता है, बल्कि जटिल संवैधानिक और विधिक प्रश्नों के समाधान में एक मार्गदर्शक तंत्र के रूप में भी कार्य करता है।https://forumias.com/blog/article-143-of-indian-constitution/ Article 143 of Indian Constitution 2022-01-07 फोरमआईएएस 2024-04-18
पृष्ठभूमि
संविधान-निर्माण के दौरान यह अनुभव किया गया कि स्वतंत्र भारत में अनेक ऐसे जटिल प्रश्न उत्पन्न हो सकते हैं, जिनका सीधा समाधान विधायिका या कार्यपालिका के स्तर पर संभव नहीं होगा। विशेषतः संवैधानिक व्याख्या,आर रंगराजन 19 May 2025 What is a Presidential reference? Explained https://www.thehindu.com/news/national/what-is-a-presidential-reference-explained/article69591439.ece 10 दिसंबर 2025 द हिंदू en-IN अंतर-राज्यीय विवादों या व्यापक जनहित से जुड़े विषयों पर न्यायिक दृष्टिकोण की आवश्यकता अनुभव की गई। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अनुच्छेद 143 का सृजन किया गया, ताकि राष्ट्रपति, जो राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख हैं, ऐसे मामलों में सर्वोच्च न्यायालय से सलाह प्राप्त कर सकें।
यह प्रावधान ब्रिटिश परंपरा से भिन्न एक भारतीय नवाचार है, जिसमें न्यायपालिका को केवल विवादों के निपटारे तक सीमित न रखकर उसे एक परामर्शदात्री भूमिका भी प्रदान की गई है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि शासन के महत्वपूर्ण निर्णय विधिक दृष्टि से सुदृढ़ और संतुलित हों।
अनुच्छेद 143 को संविधान के अन्य प्रावधानों, विशेषकर अनुच्छेद 131 (सर्वोच्च न्यायालय का मूल अधिकार-क्षेत्र) और अनुच्छेद 74 (मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह) के साथ जोड़कर देखा जाता है। यह स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति द्वारा किया गया संदर्भ वास्तव में मंत्रिपरिषद की सलाह पर आधारित होता है, तथा सर्वोच्च न्यायालय की राय विधिक मार्गदर्शन प्रदान करती है, यद्यपि वह बाध्यकारी नहीं होती।
इतिहास में इस प्रावधान का उपयोग कई महत्वपूर्ण मामलों में किया गया है, जैसे कि केरल शिक्षा विधेयक, अयोध्या विवाद से संबंधित प्रश्न, तथा अन्य संवैधानिक जटिलताओं के समाधान हेतु।
मूल पाठ
(1) यदि किसी समय राष्ट्रपति को ऐसा प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है या उत्पन्न होने की संभावना है, जो ऐसे स्वरूप और ऐसे सार्वजनिक महत्व का है कि उस पर सर्वोच्च न्यायालय की राय प्राप्त करना समीचीन है, तो वह उस प्रश्न को सर्वोच्च न्यायालय के विचार के लिए संदर्भित कर सकता है, और न्यायालय, ऐसी सुनवाई के पश्चात जो वह उचित समझे, उस पर अपनी राय राष्ट्रपति को रिपोर्ट कर सकता है।
(2) राष्ट्रपति, किसी भी ऐसे विवाद को, जो अनुच्छेद 131 के परंतु के अंतर्गत आता है, सर्वोच्च न्यायालय को उसके मत के लिए संदर्भित कर सकता है, और न्यायालय उस पर अपनी राय राष्ट्रपति को रिपोर्ट करेगा।भारत का संविधान भारत का संविधान (संपा॰) प्रसाद राजेन्द्र 1957 53 पृष्ठ:भारत का संविधान (१९५७).djvu/१४९
(I) If at any time it appears to the President that a question of law or fact has arisen or is likely to arise, which of such a nature and of such public importance that it is expedient to obtain the opinion of the Supreme Court upon it, he may refer the question to that Court for consideration and the Court may, after such hearing as it thinks fit, report to the Pre-sident its opinion thereon.
(2) The President may. notwithstanding anything inThe words "clause (i) of" omitted by the Constitution (Seventh Amendment) Act, 1956, s.29 and Sch.* * * the proviso to article I3I, refer a dispute of the kind mentioned in theSubs, by the Constitution (Seventh Amendment) Act, 1956, 29 and Sch., for "said clause". [said proviso] to the Supreme Court for opinion and the Supreme Court shall after such hearing as it thinks fit, report to the President its opinion thereon.http://constitutionofindia.etal.in/article_143/ Power of President to consult Supreme Court. 2013-10-10 भारत का संविधान 2024-04-18Power of President to consult Supreme Court https://www.constitutionofindia.net/articles/article-143-power-of-president-to-consult-supreme-court/ संविधान सरलीकृत 2023-10-10
उपयोग
अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श लेने की व्यवस्था का प्रयोग स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात समय-समय पर किया जाता रहा है, जो इसकी प्रासंगिकता और उपयोगिता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। वर्ष 1950 से अब तक इस प्रावधान के अंतर्गत कुल सोलह बार न्यायालय को संदर्भ भेजे जा चुके हैं। इन संदर्भों ने अनेक जटिल विधिक और संवैधानिक प्रश्नों पर स्पष्टता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इस श्रृंखला का प्रथम संदर्भ वर्ष 1951 में दिल्ली विधि अधिनियम प्रकरण के रूप में सामने आया, जिसमें विधायी शक्तियों के प्रत्यायोजन से संबंधित जटिल प्रश्नों पर सर्वोच्च न्यायालय की राय प्राप्त की गई। यह आरंभिक प्रयास इस बात का संकेत था कि नवगठित गणराज्य अपने संवैधानिक मार्ग को सुनिश्चित करने के लिए न्यायिक मार्गदर्शन को कितना महत्त्व देता है।
समय के साथ इस प्रावधान का उपयोग विभिन्न संवेदनशील और व्यापक जनहित से जुड़े विषयों पर किया गया। हाल के वर्षों में, वर्ष 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा एक महत्वपूर्ण संदर्भ सर्वोच्च न्यायालय को भेजा गया, जिसमें राज्यपालों और राष्ट्रपति द्वारा विधेयकों की स्वीकृति, उन्हें रोकने अथवा आरक्षित रखने से संबंधित चौदह जटिल विधिक प्रश्नों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।कुमार सुमित राष्ट्रपति के वो 14 सवाल, जिसने सुप्रीम कोर्ट में छेड़ी 'संविधान मंथन'... 5 जजों ने राज्यपाल की शक्तियों पर क्या दिया जवाब? https://hindi.news18.com/news/nation/president-droupadi-murmu-14-questions-supreme-court-constitution-bench-governor-powers-answer-9878574.html न्यूज़18 21 नवंबर 2025 14 अप्रैल 2026 17 दिसंबर 2025 https://web.archive.org/web/20251217185445/https://hindi.news18.com/news/nation/president-droupadi-murmu-14-questions-supreme-court-constitution-bench-governor-powers-answer-9878574.html dead यह संदर्भ संघीय ढाँचे, विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक मर्यादाओं के बीच संतुलन स्थापित करने की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना गया।
संदर्भ
टिप्पणी
lower-alpha
अनुच्छेद 143 भारतीय संवैधानिक ढाँचे में एक सेतु के रूप में कार्य करता है, जो कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संवाद को संस्थागत रूप प्रदान करता है। यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि अत्यंत महत्वपूर्ण और जटिल प्रश्नों पर निर्णय लेने से पूर्व न्यायिक दृष्टिकोण प्राप्त किया जा सके, जिससे संभावित विवादों और संवैधानिक संकटों को टाला जा सके।
हालाँकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दी गई राय बाध्यकारी नहीं होती, फिर भी उसका नैतिक और विधिक महत्व अत्यंत उच्च होता है, और सामान्यतः उसका सम्मान किया जाता है। इस प्रकार अनुच्छेद 143 न केवल संवैधानिक व्याख्या को सुदृढ़ करता है, बल्कि शासन में संतुलन, विवेक और दूरदर्शिता को भी सुनिश्चित करता है।अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति की शक्ति https://www.drishtiias.com/hindi/daily-updates/prelims-facts/presidential-reference-under-article-143 दृष्टि आईएएस 20 मई 2025
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