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भारतीय नौसेना का इतिहास

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भारत की नौसेना का इतिहास बहुत सम्पन्न है और ५००० वर्ष से भी पुराना है। विश्व का पहला ज्वार-भाटीय गोदी सम्भवतः लोथल में २३०० ईसापूर्व बनाया गया था। == आधुनिक युग में भारतीय नौसेना == भारतीय नौसेना का इतिहास वर्ष 1612 से मिलता है। 5 सितंबर, 1612 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने समुद्री डकैतों और अपने प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबले के लिए एक छोटे से समुद्री रक्षक बेड़े का गठन किया। इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के 'मरीन' के नाम से जाना गया। यह बेड़ा सूरत (गुजरात) के निकट स्वाली में स्थित था। इसकाअ काम कैम्बे की खाड़ी और ताप्ती एवं नर्मदा नदी में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार की रक्षा करना था। इस फोर्स के अधिकारियों और जवानों ने अरब सागर, फारस की खाड़ी और भारतीय तटों के सर्वे में अहम भूमिका निभाई। === बॉम्बे मरीन === 1662 को बॉम्बे अंग्रेजों के हाथ में चला गया लेकिन औपचारिक रूप से ब्रिटिश शासन ने इसे अपने कब्जे में 8 फरवरी 1665 को लिया। 27 सितंबर, 1668 को ब्रिटिश सरकार ने इस द्वीप को ईस्ट इंडिया कंपनी को दे दिया। इसके बाद बाम्बे से होने वाले व्यापार की रक्षा की जिम्मेदारी भी इस फोर्स को सौंप दी गई। 1686 से कंपनी के व्यापार का केंद्र मुख्य रूप से बॉम्बे बन गया। इसके बाद इस फोर्स का नाम भी बदलकर बॉम्बे मरीन हो गया। इस फोर्स ने न केवल पुर्तगालियों, डचों और फ्रेंच से लड़ने में अहम भूमिका निभाई बल्कि अन्य देशों के समुद्री डकैतों से भी निपटने में अहम भूमिका निभाई। बॉम्बे मरीन ने 1824 में बर्मा युद्ध में भी हिस्सा लिया था। 1830 में बॉम्बे मरीन का नाम बदलकर हर मजेस्टीज इंडियन नेवी हो गया। 1840 में चीन के साथ युद्ध में इस सैन्य बल की क्षमता देखने को मिली थी। अगले कुछ दशकों में ताकत बढ़ने के साथ इसका कई बार नाम भी बदला। 1863 से 1877 तक इसका नाम एक बार फिर बॉम्बे मरीन कर दिया गया, उसके बाद 'हर मजेस्टीज इंडियन मरीन' कर दिया गया। उस समय मरीन के दो डिविजन थे। पूर्वी डिविजन कलकत्ता में था जिसका काम बंगाल की खाड़ी पर नजर रखना। दूसरे डिविजन का नाम पश्चिमी डिविजन था जिसका मुख्यालय बॉम्बे था। इसके जिम्मे अरब सागर की देखरेख का जिम्मा था। इसकी सेवाओं को देखते हुए 1892 में इसे रॉयल इंडियन मरीन की संज्ञा दी गयी। उस समय उसके बेड़े में 50 पोत थे। 1934 में इसका नाम बदलकर रॉयल इंडियन नेवी कर दिया गया। 1935 में नेवी के उल्लेखनीय कामों के लिए किंग्स कलर भेंट किया गया। प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान मरीन ने अहम भूमिका निभाई। इसका इस्तेमाल गश्त के अलावा इराक, मिस्र और पूर्वी अफ्रीका में सैनिकों और साजोसामान के परिवहन के लिए किया गया। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय रॉयल इंडियन नेवी में आठ युद्धपोत थे। युद्ध के अंत तक इसके बेड़े में 117 युद्धक पोत और 30,000 जवान थे। रॉयल इंडियन मरीन में 1928 में सब लेफ्टिनेंट डी०एन०मुखर्जी को कमीशन किया गया था। इंजिनियर ऑफिसर के पद पर नियुक्त हुए मुखर्जी पहले भारतीय थे जिनको रॉयल इंडियन मरीन में कमीशन मिला था। === स्वतन्त्रता के पश्चात === १९४७ में जब भारत स्वतन्त्र हुआ तो उस समय रॉयल इंडियन नेवी के बेड़े में 32 पोत थे जो पुराने हो चुके थे। वे पोत सिर्फ तटीय गश्त के मतलब के ही थे। उस समय नेवी में 11,000 अधिकारी और जवान थे। आजादी के बाद नेवी के पहले कमांडर इन चीफ रीयर एडमिरल आईटीएस हॉल, सीआईई थे। 26 जनवरी, 1950 को भारत के गणराज्य बनने के साथ ही 'रॉयल' उपसर्ग को हटा दिया गया। इंडियन नेवी यानी भारतीय नौसेना के पहले कमांडर इन चीफ एडमिरल सर एडवर्ड पैरी, केसीबी बने जिन्होंने 1951 में एडमिरल सर मार्क पिजी, केबीई, सीबी, डीएसओ को प्रभार सौंप दिया था। एडमिरल पिजी 1955 में पहले चीफ ऑफ नेवल स्टाफ यानी नौसेना प्रमुख बने। 22 अप्रैल, 1958 को वाइस एडमिरल आर.डी. कटारी ने नौसेना के प्रथम भारतीय चीफ के रूप में पद ग्रहण किया। == उल्लेखनीय ऑपरेशन == === ऑपरेशन विजय === ऑपरेशन विजय 1961 में गोवा को पुर्तगालियों से चंगुल से आजाद कराने के लिए चलाया गया था। उसमें पहली बार नौसेना का इस्तेमाल किया गया था। === ऑपरेशन ट्राइडेंट === ऑपरेशन ट्राइडेंट 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ अंजाम दिया गया था। पाकिस्तान के कराची पोर्ट पर भारतीय नौसेना ने हमला करके उसके कई पोतों को तबाह कर दिया था। === ऑपरेशन कैक्टस === ऑपरेशन कैक्टस में आईएनएस गोदावरी और आईएनएस बेतवा शामिल थे 1988 में चलाए गए इस ऑपरेशन का मकसद मालदीव संकट को सुलझाना था। === ऑपरेशन तलवार === 1999 में करगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन तलवार को अंजाम दिया गया था। भारतीय नौसेना ने कराची पोर्ट के करीब पाकिस्तानी पोतों और नौकाओं के लिए अवरोध पैदा कर दिया। इससे पाकिस्तान में तेल और ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई। बाद में पाकिस्तान ने भारत से अवरोध हटाने का आग्रह किया। === ऑपरेशन सुकून === वर्ष 2006 में इजरायल और लेबनान के बीच युद्ध हुआ था। बड़ी संख्या में भारत के अलावा श्रीलंका और नेपाल के लोग लेबनान युद्ध में फंस गए थे। उनलोगों को सुरक्षित निकालने की जिम्मेदारी को भारतीय नौसेना ने निभाया था। === ऑपरेशन राहत === भारतीय सशस्त्र बलों ने 2015 में ऑपरेशन राहत को अंजाम दिया था। इस ऑपरेशन में युद्धग्रस्त यमन से लोगों को सुरक्षित निकाला गया। आईएनएस सुमित्रा को लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए भेजा गया था और आईएनएस मुंबई एवं आईएनएस तरकश को उसकी सुरक्षा के लिए भेजा गया था। इस मिशन में न सिर्फ भारतीय नागरिकों बल्कि विदेशी नागरिकों को भी यमन से सुरक्षित निकाला गया। भारतीय नौसेना ने करीब 3000 से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित निकाला। == इन्हें भी देखें == भारतीय नौसेना भारत का समुद्री इतिहास मराठा नौसेना भारतीय नौसेना दिवस लोथल कान्होजी आंग्रे == बाहरी कड़ियाँ == भारतीय नौसेना की उत्पत्ति गौरवशाली है भारतीय नौसेना का इतिहास और वर्तमान भारतीय नौसेना के जनक छत्रपति शिवाजी == सन्दर्भ ==