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कौशाम्बी जिला
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कौशाम्बी एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक जिला कौशाम्बी जिला उत्तर प्रदेश का जिला कुल India Uttar Pradesh districts 2012 Kaushambi.svg उत्तर प्रदेश में कौशाम्बी जिले की स्थिति देश भारत राज्य उत्तर प्रदेश मंडल प्रयागराज स्थापित 04 अप्रैल 1997 मुख्यालय मंझनपुर तहसील para 3 (सिराथू, मंझनपुर, चायल) 1780 2011 15,99,596 50.30%☸️ 33.20%🕉️ 13.10%☪️ 0.40% 💟 जनसांख्यिकी साक्षरता लिंगानुपात भारतीय मानक समय +05:30 प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग NH 2 लोकसभा क्षेत्र कौशाम्बी लोकसभा क्षेत्र कौशाम्बी http://kaushambi.nic.in
कौशाम्बी ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी है जो भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश का एक जिला है। 4 अप्रैल 1997 को प्रयागराज से अलग होकर नया जिला बना। मंझनपुर इस जनपद का जिला मुख्यालय है। जो प्रयागराज से 50 KM की दूरी पर राम वनगमन मार्ग में स्थित है। राम वनगमन मार्ग अयोध्या को चित्रकूट धाम से जोड़ता है। कौशाम्बी जिला, प्रयागराज मण्डल के अन्तर्गत आता है।
प्रशासनिक स्वरूप: कौशाम्बी जनपद में 3 तहसीलें हैं - सिराथू, मंझनपुर और चायल, इसके अलावा 08 ब्लॉक (विकास क्षेत्र) हैं जिनके नाम सरसवां कड़ा-दारानगर, सिराथू, मूरतगंज, नेवादा, मंझनपुर, बारा गांव में स्थित कौशाम्बी ब्लॉक, चायल आदि,
इस जिले में कुल 13 थाने भी हैं जिनके नाम क्रमशः पश्चिम शरीरा, करारी, मोहब्बतपुर पैंइसा, महेवाघाट (निकट बैरागीपुर), मंझनपुर कोतवाली, सैनी कोतवाली (निकट सिराथू), कौशाम्बी थाना, सराय आकिल, पिपरी, संदीपनघाट (निकट महगांव), कोखराज (निकट भरवारी), कड़ाधाम, महिला थाना (मंझनपुर) आदि,
बाज़ार (Market): कौशाम्बी जिले में सबसे बड़ी बाज़ार (Market) भरवारी, सराय आकिल आदि हैं। जबकि छोटी बाजारों में मूरतगंज, मनौरी, उदहिन, चम्पहा बाज़ार, करारी, कुम्हियांवाँ, तिल्हापुर मोड़, पश्चिम शरीरा, शमसाबाद, अझुवा, बैरागीपुर, बैरमपुर, देवीगंज, बेनीराम कटरा, विजया चौराहा, गोराजू, टेवाँ, नारा, ओसा, समदा, कसेंदा, दुवरा चौराहा, टेनशाह-आलमशाह, नरेंद्र बारा, महगांव आदि हैं।
नगर पालिका/नगर पंचायत: इस जिले में स्थित मंझनपुर भरवारी सबसे घनी आबादी वाले नगर पालिका है। जबकि अजुहा, सिराथू, करारी, चायल, कड़ाधाम-दारानगर, चरवा, पश्चिम शरीरा, सराय आकिल, को नगर पंचायत का दर्ज़ा प्राप्त है।
यातायात: जिला मुख्यालय मंझनपुर से सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन भरवारी और सिराथू हैं। सिराथू स्टेशन से दिल्ली और रीवा के लिए Rewanchal Express और भरवारी रेलवे स्टेशन से दिल्ली और गया के लिए महाबोधि एक्सप्रेस प्रमुख ट्रेनें हैं। दोनों ही स्टेशनों से गोरखपुर, कानपुर, वाराणसी, मऊ, देवरिया के लिए सीधी ट्रेन चौरी चौरा एक्सप्रेस है। साथ ही कानपुर से चित्रकूट धाम को जोड़ने वाली प्रतिदिन इंटरसिटी एक्सप्रेस ट्रेन एवं मेरठ सिटी, हापुड़ को जोड़ने वाली संगम एक्सप्रेस ट्रेन है। भरवारी जिला मुख्यालय मंझनपुर से 12 KM एवं सिराथू 15 KM की दूरी पर स्थित है। सड़क परिवहन और रोडवेज परिवहन सेवा की बात करें तो यहां पर मंझनपुर डिपो सबसे बड़ा बस अड्डा है, इसके अलावा सबसे व्यस्त Bus Stop सैनी बसअड्डा है जो कानपुर-प्रयागराज GT Road (NH 19) पर सैनी थाने के पास सिराथू तहसील के निकट स्थित है। सराय-आकिल, पश्चिम शरीरा अन्य छोटे बस स्टॉप हैं। सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा प्रयागराज है।
राजनीति क्षेत्र: कौशाम्बी एक संसदीय क्षेत्र है। इसमें पांच विधानसभा क्षेत्र बाबागंज और कुण्डा (प्रतापगढ़ जिला) एवं मंझनपुर,सिराथू,चायल सम्मिलित है।सभी जानकारी पूर्ण सही व तथ्यों पर आधारित है जिसे जनता की जानकारी के लिए उपयोगी व ज्ञानपरक बनाया गया है।
धार्मिक/पर्यटन स्थल: धार्मिक स्थलों में शीतला माता मंदिर है जो कड़ा दारानगर में स्थित है; यह 51 शक्ति पीठों में शामिल है, जो गंगा नदी के तट पर स्थित है। इसके अलावा भैरव नाथ मंदिर, ऐतिहासिक राजा जयचंद का किला, संत मलूक दास का निवास स्थान, ख्वाजा कड़क शाह की मजार, दुर्गा मंदिर (मंझनपुर), राम मन्दिर बजहा, प्रभाषगिरी तीर्थक्षेत्र (निकट ग्राम गोराजू) बौद्ध मन्दिर उदहिन बुजुर्ग स्थित राजमहल आदि हैं।
भूगोल: कौशाम्बी जिला, गंगा और यमुना नदी के दोआब में प्रयागराज संगम के निकट स्थित है। जिले के बीचों बीच से ससुर खदेरी नदी बहती है। एक अन्य छोटी नदी किलनहाई नदी का भी यहां पर अस्तित्व है। यहां की सबसे बड़ी झील अलवारा झील है। यमुना नदी में महेवाघाट (रत्नावली), पाली घाट, महिला घाट तथा गंगा नदी में कड़ाघाट, फतेहपुर घाट, संदीपन घाट प्रमुख घाट स्थल हैं। पड़ोसी जिलों में चित्रकूट, फतेहपुर, प्रयागराज, प्रतापगढ़ हैं।
नामकरण: कौशाम्बी जिले का नामकरण कोसम नाम के गांव में स्थित कौशाम्बी पौराणिक स्थल से किया गया है जिसे कौशाम्बी खास के नाम से संबोधित किया जाता हैं यहीं पर कौशाम्बी नाम का थाना भी स्थित है। प्रयागराज के दक्षिण-पश्चिम से 53 किलोमीटर की दूरी पर स्थित व बौद्ध-जैन धर्मों की तीर्थ स्थली कौशाम्बी खास को कोसम गांव के नाम से भी जाना जाता है। आज भी कोसम गांव का अस्तित्व है। जिसे कोसम इनाम और कोसम खुर्द के नाम से जानते है। 1997 में जिला सृजन के समय कौशाम्बी खास में ही जिले का मुख्यालय बनना था लेकिन बाद में 26 KM दूर मंझनपुर में जिला मुख्यालय बना दिया गया। कौशाम्बी स्थल बौद्ध व जैन धर्मों का पुराना केंद्र है।
इतिहास (History): पहले कौशाम्बी नगरी वत्स महाजनपद के राजा उदयन की राजधानी थी। माना जाता है कि बुद्ध छठें व नौवें वर्ष यहाँ घूमने के लिए आए थे।
पुराणों के अनुसार हस्तिनापुर नरेश निचक्षु ने, जो राजा परीक्षित के वंशज (युधिष्ठिर से सातवीं पीढ़ी में) थे, हस्तिनापुर को गंगा द्वारा बहा दिए जाने पर अपनी राजधानी वत्स महाजनपद की कौशाम्बी नगरी में बनाई थी—अधिसीमकृष्णपुत्रो निचक्षुर्भविता नृपः यो गंगयाऽपह्नते हस्तिनापुरे कौशंव्यां निवत्स्यति। इसी वंश की 26वीं पीढ़ी में बुद्ध के समय में कौशांबी के राजा उदयन थे। गौतम बुद्ध के समय में कौशाम्बी नगरी अपने ऐश्वर्य के मध्याह्नाकाल में थी। जातक कथाओं तथा बौद्ध साहित्य में कौशाम्बी नगरी का वर्णन अनेक बार आया है। कालिदास, भास और क्षेमेन्द्र कौशाम्बी नरेश उदयन से संबंधित अनेक लोककथाओं की पूरी तरह से जानकारी थी।
कौशाम्बी में धार्मिक जनसंख्या
बौद्ध धर्म | ☸️
हिंदू धर्म | 🕉️
मुस्लिम धर्म | ☪️
अन्य धर्म |💟
प्राचीनता
पुराणों के अनुसार हस्तिनापुर नरेश निचक्षु ने, जो राजा परीक्षित के वंशज (युधिष्ठिर से सातवीं पीढ़ी में) थे, हस्तिनापुर के गंगा द्वारा बहा दिए जाने पर अपनी राजधानी वत्स देश की कौशांबी नगरी में बनाई थी—अधिसीमकृष्णपुत्रो निचक्षुर्भविता नृपः यो गंगयाऽपह्नते हस्तिनापुरे कौशंव्यां निवत्स्यति। इसी वंश की 26वीं पीढ़ी में बुद्ध के समय में कौशांबी के राजा उदयन थे। इस नगरी का उल्लेख महाभारत में नहीं है, फिर भी इसका अस्तित्व ईसा से कई सदियों पूर्व था। गौतम बुद्ध के समय में कौशांबी अपने ऐश्वर्य के मध्याह्नाकाल में थी। जातक कथाओं तथा बौद्ध साहित्य में कौशांबी का वर्णन अनेक बार आया है। कालिदास, भास और क्षेमेन्द्र कौशांबी नरेश उदयन से संबंधित अनेक लोककथाओं की पूरी तरह से जानकारी थी।
ऐतिहासिक तथ्य
कौशांबी से एक कोस उत्तर-पश्चिम में एक छोटी पहाड़ी थी, जिसकी प्लक्ष नामक गुहा में बुद्ध कई बार आए थे। यहीं श्वभ्र नामक प्राकृतिक कुंड था। जैन ग्रंथों में भी कौशांबी का उल्लेख है। आवश्यक सूत्र की एक कथा में जैन भिक्षुणी चंदना का उल्लेख है, जो भिक्षुणी बनने से पूर्व कौशांबी के एक व्यापारी धनावह के हाथों बेच दी गई थी। इसी सूत्र में कौशांबी नरेश शतानीक का भी उल्लेख है। इनकी रानी मृगावती विदेह की राजकुमारी थी। मौर्य काल में पाटलिपुत्र का गौरव अधिक बढ़ जाने से कौशांबी समृद्धिविहीन हो गई। फिर भी अशोक ने यहाँ प्रस्तरस्तम्भ पर अपनी धर्मलिपियाँ—संवत 1 से 6 तक उत्कीर्ण करवायीं। इसी स्तंभ पर एक अन्य धर्मलिपि भी अंकित है, जिससे बौद्ध संघ के प्रति अनास्था दिखाने वाले भिक्षुओं के लिए दंड नियत किया गया है। इसी स्तंभ पर अशोक की रानी और तीवर की माता कारुवाकी का भी एक लेख है।
मुख्य आकर्षण
● पभोषा गांव में स्थित प्रभाषगिरी पर्वत
● अलवारा झील (वेटलैंड)
● किलनहाई नदी
● कौशाम्बी गांव में स्थित अशोक स्तंभ
● पद्म प्रभु का जन्म स्थल कौशाम्बी गांव में
● शीतला माता कड़ा धाम
● उदहिन बुजुर्ग स्थित राजमहल
● बजहा हनुमान मंदिर
● कुबरी घाट, संदीपन घाट
● संत मलूकदास आश्रम
● चरवा में ऋषि चरक मुनि आश्रम
● भरवारी और सिराथू प्रमुख रेलवे स्टेशन
आदि आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं !
कौशाम्बी पौर काशरामपुर
ऐतिहासिक स्थल कौशाम्बी
अंगूठाकार
तथागत बुद्ध की आवागमन में घोषितराम बिहार एक महत्वपूर्ण बिहार हुआ करता था इस बिहार में कई प्रकार की शिक्षा संस्थान मौजूद हुआ करते हैं यहां सोने और चांदी का व्यापार किया जाता था मुख्य रूप से किए जाते थे कौशाम्बी उन नदियों में से एक है जो मगध साम्राज्य का एक मुख्य केंद्र रहा करते थे
माँ शीतला शक्तिपीठ, कड़ा
अंगूठाकार
माँ शीतला शक्तिपीठ ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मंदिर है। यह मंदिर प्रयागराज के उत्तर-पश्चिम से लगभग 69 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस स्थान को कडा़ धाम के नाम से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त, यहां स्थित प्रमुख मंदिरों में हनुमान मंदिर, छत्रपाल मंदिर और कालेश्वर मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। मां शीतला देवी मंदिर गंगा नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर को देवी के 51 शक्तिपीठों में से सबसे प्रमुख शक्तिपीठ माना जाता है। सभी धर्मो के लोग मंदिर में मां के दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में स्थित शीतला देवी की मूर्ति स्थित है। इस मूर्ति में माता गर्दभ पर बैठी हुई है। ऐसा माना जाता है कि चैत्र माह में कृष्णपक्ष के अष्टमी पर यदि देवी शीतला की पूजा की जाए तो बुरी शक्तियों से पीछा छुटाया जा सकता है। यह मंदिर 1000 ई. में बनाया गया था। यह स्थान प्रसिद्ध संत मलूकदास की जन्मभूमि भी है। यहां पर संत मलूकदास का आश्रम और समाधि भी स्थित है। इसके अलावा, सिक्ख गुरू तेग बहादुर भी यहां आए थे।
प्रभाषगिरी पर्वत
अंगूठाकार
प्रभाषगिरी एक प्रमुख प्राकृतिक एवं धार्मिक महत्व का स्थल है। यमुना नदी के तट पर स्थित यह स्थान मंझनपुर मुख्यालय से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्रभाषगिरी पहाड़ को रोहितगिरी के नाम से भी जाना जाता है और इसे कामदगिरि पर्वत का छोटा भाई भी कहा जाता है। प्रभाषगिरि में दो पर्वत हैं जो कि यहां की समतल एवं उपजाऊ भूमि को देखते हुए बहुत ऊँचे हैं। वर्तमान समय में एक ऊंचे पर्वत पर जैन मंदिर स्थित है जहां जैन धर्म के छठे तीर्थंकर पद्म प्रभु ने तप किया था तथा दूसरे पर्वत पर बहुला गौ धाम मन्दिर है। यहां पर एक नौ फीट लम्बी और सात फीट चौड़ी गुफा स्थित है। इस गुफा में दूसरी शताब्दी की ब्राह्मी लिपि में लिखी हुई मुद्रापत्र प्राप्त हुई थी। इसके अलावा, यह वही स्थान है जहां छठे जैनतीर्थंकर पदमप्रभु ने अपना अधिकांश जीवन व्यतीत किया था। वर्तमान समय में प्रभाषगिरि में प्रत्येक मकर संक्रान्ति को मेला लगता है और यहां आस-पास के जिलों के लोग आकर गृहस्थी के लिए प्रस्तर ( पत्थर ) के सामान खरीदते हैं। कौशाम्बी के निवासियों के लिए पर्वतारोहण का यही सबसे अच्छा एवं नज़दीकी स्रोत माना जाता है।
संदीपन घाट
अंगूठाकार
गंगा नदी के प्रमुख और ऐतिहासिक घाट में से एक कौशाम्बी जनपद के संदीपन घाट है। यह स्थान भरवारी नगर से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित है। इस स्थान पर श्रीकृष्ण जी के गुरु संदीपनी अपने शिष्यों के साथ चातुर्मास करने आये थे जिस कारण से इस स्थान का नाम संदीपन घाट पड़ गया।
सनातन धर्म के विशेष तिथियों और त्योहारों पर इस घाट पर दूर दूर से लोग गंगा दर्शन/स्नान के लिए यहां पर आते हैं।
दुर्गा देवी मंदिर:
मंझनपुर मुख्यालय में स्थित मंदिर में देवी दुर्गा और भगवान शिव की काले पत्थर की बनी मूर्ति स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह मूर्तियां बुद्ध के समय की है। नवरात्रों के अवसर पर काफी संख्या में भक्त देवी दुर्गा की उपासना के लिए आते हैं। यह पर लोगों का मानना है कि लोगो की काफी मंतने पूरी होती है और यह मंदिर क्षेत्र में काफी प्रचलित है
श्री राम मंदिर, बजहा
यह स्थान प्रयागराज से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। श्री राम मंदिर काफी विशाल मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण लगभग बीस वर्ष पूर्व किया गया था। यह मंदिर बजहा ग्राम में बना हुआ है। जो कि मूरतगंज के निकट स्थित है।
संत मलूक आश्रम
: संत मलूकदास को हिंदू व मुस्लिम धर्म के लोग एक समान मानते हैं। इनकी कुटी आज भी कड़ा में मौजूद है। लोग श्रद्धा के साथ यहां आते हैं। खास बात है कि मलूकदास का शिष्य फतेह खान एक मुस्लिम था। आज भी उसकी मजार मलूकदास की समाधी के ठीक सामने बनी है।
उदहिन बुजुर्ग राजमहल
उदहिन बुजुर्ग का राजमहल लगभग 5 से 6 बीघे में फैला है यह प्राचीन कला का एक उत्कृष्ट नमूना है जिसको देखने के बाद इसकी भव्यता का पता चलता है महल के दक्षिण में स्थित एक पुरानी महल है जो अब खंडहर में परिवर्तित हो गई है महल के ठीक आगे एक ठाकुरद्वारा मंदिर है जहां श्री राम लक्ष्मण और जानकी जी की भव्य प्रतिमा स्थापित है तथा यहां भगवान श्री ठाकुर जी के जन्म ( श्री कृष्ण जन्माष्टमी ) के ठीक बारह दिन बाद एक बहुत बड़े मेले का आयोजन होता है तथा एक पवित्र तालाब में भगवान का जलविहार कराया जाता है
ठहरने के स्थान
कौशाम्बी जनपद के मुख्यालय में कई ऐसे होटल हैं। जहां लोग रुक सकते हैं। ठहरने के लिए उचित व्यवस्था है, लेकिन फाइब स्टार होटलोंं की सुविधा नहीं है।
पहुंचने के साधन
वायु मार्ग
कौशांबी का सबसे निकटतम हवाई अड्डा प्रयागराज विमानक्षेत्र है।
रेल मार्ग
कौशांबी रेल मार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। भरवारी और सिराथू ही मुख्य रेलवे स्टेशन है। भरवारी रेलवे स्टेशन बुद्ध सर्किट से कौशांबी को जोड़ता है।
सड़क मार्ग
यह जगह सड़कमार्ग द्वारा भारत के कई प्रमुख स्थानों से जुड़ी हुई है। सबसे निकट प्रयागराज शहर है। कौशांबी जिला प्रयागराज जिले का ही भाग था, जो 4 अप्रैल 1997 को नया जनपद बना दिया गया।
गैलरी
बाहरी कड़ियाँ
http://kaushambhi.nic.in
श्रेणी:बौद्ध तीर्थ स्थल
श्रेणी:उत्तर प्रदेश के जिले
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