411 REFERENCE · Wikipedia
गणकारिका
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
गणकारिका हरदत्ताचार्य मिनोरु हारा अनुमानित ८७९ ईस्वी संस्कृत भारत पाशुपत दर्शन
गणकारिका पाशुपत दर्शन का एक महत्वपूर्ण मौजूदा ग्रन्थ है। यह एक पुस्तिका है जो पाशुपत दर्शन के गणों के लिये दर्शन के सिद्धांतों और मुख्य विशेषताओं का संक्षेप में वर्णन करता है।https://books.google.co.in/books?id=D3yWTpC5hzIC&pg=PA8&lpg=PA8&dq=ganakarika&source=bl&ots=AAoSgI9-ux&sig=v9FX_Thdcp9zBEYR2BksEva-o6U&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiUw9nD8KPWAhWHKY8KHXcoCX4Q6AEISTAF#v=onepage&q=ganakarika&f=false Nyāyasāra of Bhāsarvajña, a Critical Study मित्तल प्रकाशन टी.के. नारायणन १९९२ ८-९ 8170993911
रचेता
गणकारिका के रचेता हरदत्ताचार्य थे जो ८७९ ईस्वी के आसपास रहते थे। लेकिन ये रचनाकारिता भी विवादित है। इस ग्रन्थ के रचना का श्रेय भासर्वग्न्य को भी दिया जाता है जो दसवीं शताब्दी के विद्वान थे। पर कई विशेषज्ञों का मानना है कि भासर्वग्न्य ने सिर्फ रत्नटीका को लिखा है जो गणकारिका की टीका है। गणकारिका का एकमात्र अनुवाद भारतविद और संस्कृत एवं बौद्ध साहित्य के विद्वान मिनोरु हारा के निबंध में पाया जाता है।https://books.google.co.in/books?id=pQNi6kAGJQ4C&pg=PA131&lpg=PA131&dq=ganakarika&source=bl&ots=9fxwuYuux5&sig=ccFTbfd_Hm3em7Xisl3WCkiv_bs&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiUw9nD8KPWAhWHKY8KHXcoCX4Q6AEIQTAD#v=onepage&q=ganakarika&f=false The Iconography and Ritual of Siva at Elephanta: On Life, Illumination, and Being स्टेट यूनिवर्सिटी औफ न्यु यार्क प्रेस चार्ल्स डिलार्ड कोलिन्स १९८८ १२१, १३१-१३३ 0887067735 14 सितंबर 2017 https://web.archive.org/web/20170918110559/https://books.google.co.in/books?id=pQNi6kAGJQ4C&pg=PA131&lpg=PA131&dq=ganakarika&source=bl&ots=9fxwuYuux5&sig=ccFTbfd_Hm3em7Xisl3WCkiv_bs&hl=en&sa=X&ved=0ahUKEwiUw9nD8KPWAhWHKY8KHXcoCX4Q6AEIQTAD#v=onepage&q=ganakarika&f=false 18 सितंबर 2017 live
ग्रन्थ की सामग्री
लकुलीश पाशुपत दर्शन के प्रमुख माने जाते है। गणकारिका को प्रारूप में लकुलीश के रचीत पाशुपत सुत्र से अधिक व्यवस्थित बताया गया है हालांकि यह बहुत छोटा है। गणकारिका नए विद्यार्थियों की शुरुआत के बारे में बताते वक्त सामग्री घटक, पुजा का समय, उचित अनुष्ठान, भगवान की छवि, और गुरू के बारे में जानकारी देता है। सामग्री घटकों मे दर्भ, राख, चंदन, फूल, धूप और मंत्रों का उल्लेख है। इसमें पुजा का समय सुबह का बताया है और उचित अनुष्ठान के लिये यह दूसरे ग्रन्थ संस्कारकारिका को संदर्भित करता है; जो खोया हुआ हैं।
सन्दर्भ
श्रेणी:शैव धर्म
श्रेणी:हिन्दू ग्रन्थ
श्रेणी:९वीं सदी का साहित्य