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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

धर्मपाल गुलाटी

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धर्मपाल गुलाटी भारत के एक उद्यमी तथा समाजसेवी थे। एम डी एच (महाशिया दी हट्टी) मसाले उनके ही उत्पाद हैं। इनका जन्म सियालकोट, वर्तमान में अब पाकिस्तान में,हुआ था। भारत-पाकिस्तान बटवारे के बाद भारत आकर इन्होंने दिल्ली के करोल बाग से अपना व्यापार प्रारंभhttp://blogs.wsj.com/indiarealtime/2011/12/13/delhi%E2%80%99s-refugees-the-spice-maker। वालस्ट्रीट जनरल किया। अब यह भारत की एक जानी मानी मसाला कंपनी एम डी एच को चलाते हैं। इनको पदम भूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। प्रारम्भिक जीवन धर्मपाल गुलाटी का जन्म 27 मार्च 1923 को पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। उनके पिता महाशाय चिन्नीलाल की कस्बे में एक मसाले की दुकान थी जिसका नाम महाशियान दी हट्टी था। जिसे देगी मवाले के नाम से भी जाना जाता था। सन 1933 में, 10 साल की उम्र में, उन्होंने स्कूल की पढाई छोड़ दी और अपने मसाले के कारोबार में अपने पिता की मदद करने के लिए शामिल हो। https://www.livehindustan.com/business/story-mdh-owner-mahashay-dharampal-gulati-died-at-the-age-of-98-3662893.html MDH के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी का 98 साल की उम्र में निधन Hindustan hindi 2020-12-04 तांगेवाला कैसे बना मसालों का शहंशाह, एमडीएच (महाशियां दी हट्टी) के चेयरमैन और प्रसिद्ध समाजसेवी महाशय धर्मपाल गुलाटी की संघर्ष गाथा है, जिन्होंने एक सामान्य परिवार में जन्म लेकर और बिना कोई खास तालीम हासिल की और पग-पग पर विषम परिस्थितियों का मुकाबला करते हुए भी कामयाबी का एक ऐसा अनोखा कीर्तिमान कायम किया, जो असंभव न सही, मगर सहज संभव हो पाना भी बहुत मुश्किल है। युवावस्था में पदार्पण के बाद ही 1947 में देश विभाजन के दौरान धर्मपाल गुलाटी अपनी जन्मभूमि सियालकोट, जो अब पाकिस्तान में है, में अपना सब कुछ छोड़कर जीवन रक्षा के लिए अपने परिवार के साथ बिलकुल खाली हाथ दिल्ली चले आए और यहां दो वक्त की रोटी के लिए तांगा चलाना शुरू किया। लेकिन बड़ा आदमी बनने का जो ख्वाब था, उसे पूरा करने के लिए इन्होंने बहुत जल्दी यह काम छोड़कर अपने पुश्तैनी करोबार-मसालों का कारोबार की छोटे पैमाने पर शुरूआत की। इसके बाद कठिन संघर्ष और अनोखी सूझ-बूझ से धीरे-धीरे इस कारोबार को गुलाटी ने वह ऊंचाई प्रदान की कि मसाला इंडस्ट्री में दूर-दूर तक इनका कोई प्रतियोगी न रहा, एमडीएच ब्रांड मसाले अपनी शुद्धता और गुणवत्ता को लेकर पूरे भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई दूसरे देशों में भी मशहूर हो गए और आज भी इनका कारोबार तेजी से आगे बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही धर्मपाल गुलाटी ने व्यावसायिक व्यस्तता के बावजूद समाज सेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया, जिसका विवरण इस पुस्तक में है। कुल मिलाकर व्यावसायिक और सामाजिक क्षेत्र में महाशय धर्मपाल एक ऐसा नाम है, जिससे सभी भलीभांति परिचित है। निधन गुलाटी जी का 03 दिसम्बर 2020 को हृदय गति रुक जाने के कारण निधन हो गया।https://khabar.ndtv.com/news/india/mdh-owner-mahashay-dharampal-gulati-dies-at-97-in-delhi-2333497 MDH मसाले के मालिक महाशय धर्मपाल गुलाटी का 97 साल की आयु में देहावसान NDTVIndia 2020-12-04 3 दिसंबर 2020 https://web.archive.org/web/20201203084834/https://khabar.ndtv.com/news/india/mdh-owner-mahashay-dharampal-gulati-dies-at-97-in-delhi-2333497 dead सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ तांगेवाले से शहंशाह बनने तक का सफर (दैनिक नवज्योति) श्रेणी:भारतीय उद्यमी श्रेणी:सियालकोट के लोग श्रेणी:दिल्ली के लोग