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411 समाचार
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कृष्ण

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वासुदेव मई 2023 Hindu श्री कृष्ण 2 Krishna at Sri Mariamman Temple Singapore.jpg कृष्ण श्री मारिमान मंदिर, सिंगापुर में श्री कृष्ण प्रतिमा प्रेम के ईश्वर Ben-Ami Scharfstein Ineffability: The Failure of Words in Philosophy and Religion https://books.google.com/books?id=tN0KfFitDncC&pg=PA166 1993 State University of New York Press 978-0-7914-1347-0 166 14 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170407235905/https://books.google.com/books?id=tN0KfFitDncC&pg=PA166 7 अप्रैल 2017 live, Quote: "Krishna, god of love, (...)"Edwin Bryant Maria Ekstrand 2004 20–25, Quote: "Three Dimensions of Krishna's Divinity (...) divine majesty and supremacy; (...) divine tenderness and intimacy; (...) compassion and protection.; (..., p.24) Krishna as the God of Love" मथुरा, सौरसेन रज्य (वर्तमान काल के ऊत्तर प्रदेश के अन्तर्गत)Raychaudhuri 1972 124 कृष्णः कृष्ण কৃষ্ণ କୃଷ୍ଣ Kruṣhṇā கிருஷ்ணா Kiruṣṇā ಕೃಷ್ಣ Kr̥ṣṇa स्वयं भगवान्, परमात्मन, गोप, विष्णु, राधा कृष्णBryant 2007 114 सुदर्शन चक्र कुरुक्षेत्र युद्ध गोलोक, वृंदावन, द्वारका, गोकुल, वैकुंठ भागवत पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, विष्णु पुराण, महाभारत, भगवद् गीता, गीत गोविंद, गर्ग संहिता, हरिवंश देवकी (माँ) और वसुदेव (पिता), यशोदा (पालक मां) और नंद बाबा (पालक पिता) बलराम, सुभद्रा राधा, रुक्मिणी, सत्यभामा, जांबवती, नग्नजित्ती, लक्ष्मणा, कालिंदी, भद्रा The Divine Consort: Rādhā and the Goddesses of India John Stratton Hawley, Donna Marie Wulff Motilal Banarsidass Publisher 1982 9780895811028 12note The regional texts vary in the identity of Krishna's wife (consort), some presenting it as Rukmini, some as Radha, some as Svaminiji, some adding all gopis, and some identifying all to be different aspects or manifestation of one Devi Lakshmi.Bryant 2007 443 जन्माष्टमी, होली चंद्र राजवंश (राजूपत) thumb|250px|बाल कृष्ण का लड्डू गोपाल रूप, जिनकी सदियों से घर घर में पूजा की जाती रही है। श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार हैं। उनका जन्म द्वापरयुग में हुआ था। कृष्ण के समकालीन महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवत और महाभारत में कृष्ण का चरित्र विस्तृत रूप से वर्णित है। भगवद्गीता कृष्ण और अर्जुन का संवाद है। कृष्ण वसुदेव और देवकी की 8वीं संतान थे। देवकी कंस की बहन थी। कंस एक अत्याचारी राजा था। उसने आकाशवाणी सुनी थी कि देवकी के पुत्र द्वारा वह मारा जाएगा। इससे बचने के लिए कंस ने देवकी और वसुदेव को मथुरा के कारागार में डाल दिया। मथुरा के कारागार में ही भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को उनका जन्म हुआ। कंस के डर से वसुदेव ने नवजात बालक को रात में ही यमुना पार गोकुल में यशोदा के यहाँ पहुँचा दिया। गोकुल में उनका लालन-पालन हुआ था। यशोदा और नन्द उनके पालक माता-पिता बने। अपने जन्म के कुछ समय बाद ही कंस द्वारा भेजी गई राक्षसी पूतना का वध किया , उसके बाद शकटासुर, तृणावर्त आदि राक्षस का वध किया। बाद में गोकुल छोड़कर नंद गाँव आ गए वहां पर उन्होने गोचारण लीला, गोवर्धन लीला, रास लीला की। इसके बाद मथुरा में मामा कंस का वध किया। सौराष्ट्र में द्वारका नगरी की स्थापना की और वहाँ अपना राज्य बसाया। पाण्डवों की मदद की और विभिन्न संकटों से उनकी रक्षा की। महाभारत के युद्ध में उन्होंने अर्जुन के सारथी की भूमिका निभाई और रणक्षेत्र में ही उन्हें उपदेश दिया। 124 वर्षों के जीवनकाल के बाद उन्होंने अपनी लीला समाप्त की। उनके अवतार समाप्ति के तुरंत बाद परीक्षित के राज्य का कालखंड आता है। राजा परीक्षित, जो अभिमन्यु और उत्तरा के पुत्र तथा अर्जुन के पौत्र थे, के समय से ही कलियुग का आरंभ माना जाता है। नाम और उपशीर्षक "कृष्ण" एक संस्कृत शब्द है, जो "काला", "अंधेरा" या "गहरा नीला" का समानार्थी है।* Monier Williams Sanskrit-English Dictionary (2008 revision) https://web.archive.org/web/20191018224028/https://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/cgi-bin/monier/serveimg.pl?file=%2Fscans%2FMWScan%2FMWScanjpg%2Fmw0306-kRzanAvat.jpg 18 अक्तूबर 2019 Apte Sanskrit-English Dictionary https://web.archive.org/web/20180916122511/http://dsalsrv02.uchicago.edu/cgi-bin/philologic/getobject.pl?c.2:1:1423.apte 16 सितंबर 2018 "अंधकार" शब्द से इसका सम्बन्ध ढलते चंद्रमा के समय को कृष्ण पक्ष कहे जाने में भी स्पष्ट झलकता है। इस नाम का अनुवाद कहीं-कहीं "अति-आकर्षक" के रूप में भी किया गया है।Bryant 2007 382 श्रीमदभागवत पुराण के वर्णन अनुसार कृष्ण जब बाल्यावस्था में थे तब नन्दबाबा के घर आचार्य गर्गाचार्य द्वारा उनका नामकरण संस्कार हुआ था। वसुदेव का पुत्र होने के कारण उनको 'वासुदेव' कहा जाता है। "कृष्ण" नाम के अतिरिक्त भी उन्हें कई अन्य नामों से जाना जाता रहा है, जो उनकी कई विशेषताओं को दर्शाते हैं। सबसे व्यापक नामों में मोहन, गोविन्द, माधव,Monier Monier Williams, Go-vinda https://web.archive.org/web/20040913194109/http://www.ibiblio.org/sripedia/ebooks/mw/0300/mw__0399.html 13 सितंबर 2004 , Sanskrit English Dictionary and Ettymology, Oxford University Press, p. 336, 3rd column और गोपाल प्रमुख हैं।Bryant 2007 17 Hiltebeitel, Alf Rethinking the Mahābhārata: a reader's guide to the education of the dharma king https://archive.org/details/rethinkingmahabh00hilt University of Chicago Press Chicago 2001 251–53, 256, 259 0-226-34054-6 चित्रण कृष्ण का चित्रण आमतौर पर विष्णु जैसे कृष्ण , काले या नीले रंग की त्वचा के साथ किया जाता हैT. Richard Blurton Hindu Art https://books.google.com/books?id=xJ-lzU_nj_MC&pg=PA134 1993 Harvard University Press 978-0-674-39189-5 133–134 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170407061905/https://books.google.com/books?id=xJ-lzU_nj_MC&pg=PA134 7 अप्रैल 2017 live। हालांकि, प्राचीन और मध्ययुगीन शिलालेख ,भारत और दक्षिणपूर्व एशिया दोनों में , और पत्थर की मूर्तियों में उन्हें प्राकृतिक रंग में चित्रित किया है, जिससे वह बनी है। कुछ ग्रंथों में, उनकी त्वचा को काव्य रूप से जांबुल के रंग के रूप में वर्णित किया गया है।Guy, John Lost Kingdoms: Hindu-Buddhist Sculpture of Early Southeast Asia https://books.google.com/books?id=vO_-AgAAQBAJ&pg=PA222 7 April 2014 Metropolitan Museum of Art 978-1-58839-524-5 222–223 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170407061733/https://books.google.com/books?id=vO_-AgAAQBAJ&pg=PA222 7 अप्रैल 2017 live[a] Cooler Richard M. Sculpture, Kingship, and the Triad of Phnom Da Artibus Asiae JSTOR 40 1 1978 29 10.2307/3249812 3249812;[b] Bertrand Porte (2006), "La statue de Kṛṣṇa Govardhana du Phnom Da du Musée National de Phnom Penh." UDAYA, Journal of Khmer Studies, Volume 7, pages 199-205 thumb|हिन्दुओं के इतिहास, साहित्य और धर्म का एक दृश्य, जिसमें उनके शिष्टाचार और रीति-रिवाजों का एक बारीक वर्णन और उनके प्रमुख कार्यों (1863) (147 9 1550762) से अनुवाद शामिल हैं कृष्ण को अक्सर मोर-पंख वाले पुष्प या मुकुट पहनकर चित्रित किया जाता है, और अक्सर बांसुरी बजाते हुए उनका चित्रण हुआ है। इस रूप में, आम तौर पर त्रिभन्ग मुद्रा में एक पैर को दुसरे पैर पर डाले चित्रित है। कभी-कभी वह गाय या बछड़ा के साथ होते है, जो चरवाहे गोविंद के प्रतीक को दर्शाती है। The Encyclopedia Americana Grolier [s.l.] 1988 589 0-7172-0119-8 https://archive.org/details/encyclopediaamer30grol/page/589 The New Encyclopædia Britannica Benton, William 1974 Encyclopædia Britannica 9780852292907 885 https://books.google.com/?id=G8YqAAAAMAAJ&q=Krsna+blue+skin+deity&dq=Krsna+blue+skin+deity thumb|शेषनाग पर नृत्य करते कृष्ण अन्य चित्रण में, वे महाकाव्य महाभारत के युद्ध के दृश्यों का एक हिस्सा है। वहा उन्हें एक सारथी के रूप में दिखाया जाता है, विशेष रूप से जब वह पांडव राजकुमार अर्जुन को संबोधित कर रहे हैं, जो भगवद् गीता को सुनाते हैं। इन लोकप्रिय चित्रणों में, कृष्ण कभी पथ प्रदर्शक के रूप में सामने में प्रकट होते हैं, या तो दूरदृष्टा के रूप में, कभी रथ के चालक के रूप में।Ariel Glucklich The Strides of Vishnu: Hindu Culture in Historical Perspective https://books.google.com/books?id=KtLScrjrWiAC&pg=PA106 2008 Oxford University Press 978-0-19-971825-2 106 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170406120530/https://books.google.com/books?id=KtLScrjrWiAC&pg=PA106 6 अप्रैल 2017 liveT. A. Gopinatha Rao Elements of Hindu iconography https://books.google.com/books?id=MJD-KresBwIC&pg=PA210 1993 Motilal Banarsidass 978-81-208-0878-2 210–212 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170406115732/https://books.google.com/books?id=MJD-KresBwIC&pg=PA210 6 अप्रैल 2017 live thumb|माँ यशोदा के साथ श्री कृष्ण कृष्ण के वैकल्पिक चित्रण में उन्हें एक बालक के रूप में दिखाते हैं, एक बच्चा अपने हाथों और घुटनों पर रेंगते हुए ,नृत्य करते हुए , साथी मित्र ग्वाल बाल को चुराकर मक्खन देते हुए, लड्डू को अपने हाथ में लेकर चलते हुए अथवा प्रलय के समय बरगद के पत्ते पर तैरते हुए एक अलौकिक शिशु जो अपने पैर की अंगुली को चूसता प्रतीत होता है। (ऋषि मार्कंडेय द्वारा विवरणित ब्रह्मांड विघटन) Students' Britannica India Hoiberg Dale Ramchandani, Indu 2000 Popular Prakashan 9780852297605 251 https://books.google.com/?id=kEj-2a7pmVMC&pg=PA251&dq=Bala+Krishna The Qualities of Sri Krsna Satsvarupa dasa Goswami Satsvarupa dasa Goswami GNPress 1998 152 pages 0-911233-64-4 harv कृष्ण की प्रतिमा में क्षेत्रीय विविधताएं उनके विभिन्न रूपों में देखी जाती हैं, जैसे ओडिशा में जगन्नाथ, महाराष्ट्र में विट्ठल या विठोबा। Vithoba is not only viewed as a form of Krishna. He is also by some considered that of Vishnu, Shiva and Gautama Buddha according to various traditions. See: Sri-Vitthal: Ek Mahasamanvay (Marathi) by R. C. Dhere 5 https://books.google.com/books?id=KnPoYxrRfc0C&pg=PA4179&dq=vithoba&as_brr=3&sig=0WHJ4sGcLGYNiZDwjR9YHwDA75k#PPA4180,M1 2008-09-20 Kelkar, Ashok R. Encyclopaedia of Indian literature Sahitya Akademi 4179 2001 1992 https://web.archive.org/web/20161129210240/https://books.google.com/books?id=KnPoYxrRfc0C&pg=PA4179&dq=vithoba&as_brr=3&sig=0WHJ4sGcLGYNiZDwjR9YHwDA75k#PPA4180,M1 29 नवंबर 2016 live and https://books.google.com/?id=vgLZGFH1ZTIC&pg=PA14&dq=Palkhi:+a+pilgrimage+to+Pandharpur Palkhi: a pilgrimage to Pandharpur — translated from the Marathi book Pālakhī by Philip C. Engblom Mokashi, Digambar Balkrishna Engblom, Philip C. State University of New York Press 1987 0-88706-461-2 Albany 35Tryna Lyons The Artists of Nathadwara: The Practice of Painting in Rajasthan https://books.google.com/books?id=cKnGJGOEQukC 2004 Indiana University Press 0-253-34417-4 16–22 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170406122230/https://books.google.com/books?id=cKnGJGOEQukC 6 अप्रैल 2017 liveOfficial website of Nathdwara Temple https://web.archive.org/web/20180421013346/https://www.nathdwaratemple.org/ 21 अप्रैल 2018 of Shrinathji , राजस्थान में श्रीनाथ जी, गुजरात में द्वारकाधीश और केरल में गुरुवायरुप्पन Kunissery Ramakrishnier Vaidyanathan Sri Krishna, the Lord of Guruvayur https://books.google.com/books?hl=de&id=1XLXAAAAMAAJ&dq 1992 Bharatiya Vidya Bhavan 2–5 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20151012223121/https://books.google.com/books?hl=de 12 अक्तूबर 2015 live अन्य चित्रणों में उन्हें राधा के साथ दिखाया जाता है जो राधा और कृष्ण के दिव्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। उन्हें कुरुक्षेत्र युद्ध में विश्वरूप में भी दिखाया जाता है जिसमें उनके कई मुख हैं और सभी लोग उनके मुख में जा रहे हैं। अपने मित्र सुदामा के साथ भी उनको दिखाया जाता है जो मित्रता का प्रतीक है। thumb|माँ यशोदा के साथ श्री कृष्ण वास्तुकला में कृष्ण चिह्नों एवं मूर्तियों के लिए दिशानिर्देशों का वर्णन मध्यकालीन युग में हिन्दू मंदिर कलाओं जैसे वैखानस अगम, विष्णु धर्मोत्तर पुराण, बृहत संहिता और अग्नि पुराण में वर्णित हैT. A. Gopinatha Rao Elements of Hindu iconography https://books.google.com/books?id=MJD-KresBwIC&pg=PA200 1993 Motilal Banarsidass 978-81-208-0878-2 201–204 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170406113640/https://books.google.com/books?id=MJD-KresBwIC&pg=PA200 6 अप्रैल 2017 live। इसी तरह, मध्यकालीन युग के शुरुआती तमिल ग्रंथों में कृष्ण और रुक्मणी की मूर्तियां भी सम्मिलित हैं। इन दिशानिर्देशों के अनुसार बनाई गई कई मूर्तियां सरकारी संग्रहालय,चेन्नई के संग्रह में हैं। thumb|१७५५ के आसपास, भारतीय चित्रकार द्वारा बनाया गया चित्र ऐतिहासिक और साहित्यिक स्रोत एक व्यक्तित्व के रूप में कृष्ण का विस्तृत विवरण सबसे पहले महाकाव्य महाभारत में लिखा गया है http://www.britannica.com/eb/topic-357806/Mahabharata Britannica: Mahabharata 2008-10-13 encyclopedia Encyclopædia Britannica Online 2008 Wendy Doniger https://web.archive.org/web/20080527051743/http://www.britannica.com/eb/topic-357806/Mahabharata 27 मई 2008 live , जिसमें कृष्ण को विष्णु के अवतार के रूप में दर्शाया गया है। महाकाव्य की मुख्य कहानियों में से कई कृष्ण केंद्रीय हैं श्री भगवत गीता का निर्माण करने वाले महाकाव्य के छठे पर्व ( भीष्म पर्व ) के अठारहवे अध्याय में युद्ध के मैदान में श्रीकृष्ण अर्जुन को ज्ञान देते हैं। महाभारत के बाद के परिशिष्ट में हरिवंश में कृष्ण के बचपन और युवावस्था का एक विस्तृत संस्करण है। Maurice Winternitz (1981), History of Indian Literature, Vol. 1, Delhi, Motilal Banarsidass, 978-0836408010, pages 426–431 भारतीय-यूनानी मुद्रण १८० ईसा पूर्व लगभग इंडो-ग्रीक राजा एगैथोकल्स ने देवताओं की छवियों पर आधारित कुछ सिक्के जारी किये थे। भारत में अब उन सिक्को को वैष्णव दर्शन से संबंधित माना जाता है। Osmund Bopearachchi, 2016, Emergence of Viṣṇu and Śiva Images in India: Numismatic and Sculptural Evidence https://web.archive.org/web/20171123154459/http://www.academia.edu/25807197/Emergence_of_Vi%E1%B9%A3%E1%B9%87u_and_%C5%9Aiva_Images_in_India_Numismatic_and_Sculptural_Evidence 23 नवंबर 2017Audouin, Rémy, and Paul Bernard, "Trésor de monnaies indiennes et indo-grecques d'Aï Khanoum (Afghanistan). II. Les monnaies indo-grecques. https://web.archive.org/web/20180602021436/https://www.persee.fr/doc/numi_0484-8942_1974_num_6_16_1062 2 जून 2018 " Revue numismatique6, no.16 (1974), pp.6–41 (in French). । सिक्कों पर प्रदर्शित देवताओं को विष्णु के अवतार बलराम - संकर्षण के रूप में देखा जाता है जिसमें गदा और हल और वासुदेव-कृष्ण , शंख और सुदर्शन चक्र दर्शाये हुए हैं। प्राचीन संस्कृत व्याकरण पतंजलि ने अपने महाभाष्य में भारतीय ग्रंथों के देवता कृष्ण और उनके सहयोगियों के कई संदर्भों का उल्लेख किया है। पाणिनी की श्लोक ३.१.२६ पर अपनी टिप्पणी में, वह कंसवध अथवा कंस की हत्या का भी प्रयोग करते हैं, जो कि कृष्ण से सम्बन्धित किंवदंतियों का एक महत्वपूर्ण अंग है। Bryant 2007 5India through the ages https://archive.org/details/indiathroughages00mada Gopal Madan 1990 73 K.S. Gautam Publication Division, Ministry of Information and Broadcasting, Government of India। हेलीडियोरस स्तंभ और अन्य शिलालेख मध्य भारतीय राज्य मध्य प्रदेश में औपनिवेशिक काल के पुरातत्वविदों ने एक ब्राह्मी लिपि में लिखे शिलालेख के साथ एक स्तंभ की खोज की थी। आधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हुए, इसे १२५ और १०० ईसा पूर्व के बीच का घोषित किया गया है और ये निष्कर्ष निकाला गया कि यह एक इंडो-ग्रीक प्रतिनिधि द्वारा एक क्षेत्रीय भारतीय राजा के लिए बनवाया गया था जो ग्रीक राजा एंटिलासिडास के एक राजदूत के रूप में उनका प्रतिनिधि था। इसी इंडो-ग्रीक के नाम अब इसे हेलेडियोरस स्तंभ के रूप में जाना जाता है। इसका शिलालेख "वासुदेव" के लिए समर्पण है जो भारतीय परंपरा में कृष्ण का दूसरा नाम है। कई विद्वानों का मत है कि इसमें "वासुदेव" नामक देवता का उल्लेख है, क्योंकि इस शिलालेख में कहा गया है कि यह " भागवत हेलियोडोरस" द्वारा बनाया गया था और यह " गरुड़ स्तंभ" (दोनों विष्णु-कृष्ण-संबंधित शब्द हैं)। इसके अतिरिक्त, शिलालेख के एक अध्याय में कृष्ण से संबंधित कविता भी शामिल है। महाभारत के अध्याय ११.७ का सन्दर्भ देते हुए बताया गया है कि अमरता और स्वर्ग का रास्ता सही ढंग से तीन गुणों का जीवन जीना है: स्व- संयम (दमः), उदारता (त्याग) और सतर्कता (अप्रामदाह)Richard Salomon Indian Epigraphy: A Guide to the Study of Inscriptions in Sanskrit, Prakrit, and the other Indo-Aryan Languages https://books.google.com/books?id=XYrG07qQDxkC 1998 Oxford University Press 978-0-19-535666-3 265–267 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20140706004809/http://books.google.com/books?id=XYrG07qQDxkC 6 जुलाई 2014 liveBenjamín Preciado-Solís The Kṛṣṇa Cycle in the Purāṇas: Themes and Motifs in a Heroic Saga https://books.google.com/books?id=JvCaWvjGDVEC&pg=PA34 1984 Motilal Banarsidass 978-0-89581-226-1 34 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170407061604/https://books.google.com/books?id=JvCaWvjGDVEC&pg=PA34 7 अप्रैल 2017 live। हेलियोडोरस शिलालेख एकमात्र प्रमाण नहीं है। तीन हाथीबाड़ा शिलालेख और एक घोसूंडी शिलालेख,जो कि राजस्थान राज्य में स्थित हैं Manohar Laxman Varadpande Krishna Theatre in India https://books.google.com/books?id=TaF603WEv4IC&pg=PA6 1982 Abhinav Publications 978-81-7017-151-5 6–7 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170406122701/https://books.google.com/books?id=TaF603WEv4IC&pg=PA6 6 अप्रैल 2017 live Hindu Gods and Heroes: Studies in the History of the Religion of India Barnett Lionel David 1922 J. Murray 93 https://books.google.com/?id=R-5KAAAAMAAJ Puri, B. N. 1968 India in the Time of Patanjali Bhartiya Vidya BhavanPage 51: The coins of Rajuvula have been recovered from the Sultanpur District...the Brahmi inscription on the Mora stone slab, now in the Mathura Museum, और आधुनिक कार्यप्रणाली के अनुसार जिनका समयकाल १९वी सदी ईसा पूर्व है उनमे भी कृष्ण का उल्लेख किया गया है। पहली सदी ईसा पूर्व, संकर्षण (कृष्ण का एक नाम) और वासुदेव का उल्लेख करते हुए, उनकी पूजा के लिए एक संरचना का निर्माण किया गया था। ये चार शिलालेख प्राचीनतम ज्ञात संस्कृत शिलालेखों में से एक है Richard Salomon Indian Epigraphy: A Guide to the Study of Inscriptions in Sanskrit, Prakrit, and the Other Indo-Aryan Languages https://books.google.com/books?id=t-4RDAAAQBAJ 1998 Oxford University Press 978-0-19-509984-3 86–87 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170417162346/https://books.google.com/books?id=t-4RDAAAQBAJ 17 अप्रैल 2017 live। कई पुराणों में कृष्ण की जीवन कथा को बताया या कुछ इस पर प्रकाश डाला गया है । दो पुराण, भागवत पुराण और विष्णु पुराण में कृष्ण की कहानी की सबसे विस्तृत जानकारी है Elkman, S. M. Gosvami, J. 1986 Jiva Gosvamin's Tattvasandarbha: A Study on the Philosophical and Sectarian Development of the Gaudiya Vaisnava Movement https://archive.org/details/jivagosvaminstat0000elkm Motilal Banarsidass , लेकिन इन और अन्य ग्रंथों में कृष्ण की जीवन कथाएं अलग-अलग हैं और इसमें महत्वपूर्ण असंगतियां हैं। भागवत पुराण में बारह पुस्तकें उप-विभाजित हैं जिनमें ३३२ अध्याय, संस्करण के आधार पर १६,००० और १८,००० छंदो के बीच संचित हैं Barbara Holdrege (2015), Bhakti and Embodiment, Routledge, 978-0415670708, pp.109–110Richard Thompson (2007), The Cosmology of the Bhagavata Purana 'Mysteries of the Sacred Universe, Motilal Banarsidass, 978-8120819191 । पाठ की दसवीं पुस्तक, जिसमें लगभग ४००० छंद (~ २५ %) शामिल हैं और कृष्ण के बारे में किंवदंतियों को समर्पित है, इस पाठ का सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से अध्ययन किया जाने वाला अध्याय है। जीवन और किवदंतियां अवतरण एवं महाप्रयाण कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास में कृष्ण पक्ष में अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र के दिन रात्री के १२ बजे हुआ था https://books.google.com/books?id=qmUssUXUFFYC&pg=PA359 The Poems of Sūradāsa Abhinav publications 1999 । कृष्ण का जन्मदिन जन्माष्टमी के नाम से भारत, नेपाल, अमेरिका सहित विश्वभर में मनाया जाता है। कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था। वे माता देवकी और पिता वासुदेव की ८वीं संतान थे। श्रीमद भागवत के वर्णन अनुसार द्वापरयुग में भोजवंशी राजा उग्रसेन मथुरा में राज करते थे। उनका एक आततायी पुत्र कंस था और उनकी एक बहन देवकी थी। देवकी का विवाह वसुदेव के साथ हुआ था। कंस ने अपने पिता को कारागार में डाल दिया और स्वयं मथुरा का राजा बन गया। कंस की मृत्यु उनके भानजे, देवकी की ८वी संतान के हाथों होनी थी। कंस ने अपनी बहन और बहनोई को भी मथुरा के कारागार में कैद कर दिया और एक के बाद एक देवकी की सभी संतानों को मार दिया। कृष्ण का जन्म आधी रात को हुआ तब कारागृह के द्वार स्वतः ही खुल गए और सभी सिपाही निंद्रा में थे। वासुदेव के हाथो में लगी बेड़िया भी खुल गईं। गोकुल के निवासी नन्द की पत्नी यशोदा को भी संतान प्राप्ति होने वाली थी। वासुदेव अपने पुत्र को सूप में रखकर कारागृह से निकल पड़े Lynne Gibson Merriam-Webster's Encyclopedia of World Religions Merriam-Webster 1999 503 http://www.metmuseum.org/toah/ho/07/sss/ho_1982.220.8.htm Yashoda and Krishna 2011-10-10 Metmuseum.org 2011-10-23 dead https://web.archive.org/web/20081013214426/http://www.metmuseum.org/toah/ho/07/sss/ho_1982.220.8.htm 13 October 2008https://books.google.com/books?id=-UiwMRwcT-kC The Krishna key 2012 Westland 9789381626689 Chennai Key7 en Sanghi Ashwin 9 June 2016अक्तूबर 2021 InternetArchiveBot https://books.google.com/books?id=wT-BAAAAMAAJ The Cattle and the Stick: An Ethnographic Profile of the Raut of Chhattisgarh Anthropological Survey of India, Government of India, Ministry of Tourism and Culture, Department of Culture, 2000 Original from the University of Michigan 2000 978-8185579573 Anthropological Survey of India, Government of India, Ministry of Tourism and Culture, Department of Culture, Delhi 16 Lok Nath Soni । कई भारतीय ग्रंथों में कहा गया है कि पौराणिक कुरुक्षेत्र युद्ध (महाभारत के युद्ध ) में गांधारी के सभी सौ पुत्रों की मृत्यु हो जाती है। दुर्योधन की मृत्यु से पहले रात को, कृष्णा ने गांधारी को उनकी संवेदना प्रेषित की थी । गांधारी कृष्ण पर आरोप लगाती है कि कृष्ण ने जानबूझ कर युद्ध को समाप्त नहीं किया, क्रोध और दुःख में उन्हें श्राप देती है कि उनके अपने "यदु राजवंश" में हर व्यक्ति उनके साथ ही नष्ट हो जाएगा। महाभारत के अनुसार, यादवों के बीच एक त्यौहार में एक लड़ाई की शुरुवात हो जाती है, जिसमे सब एक-दूसरे की हत्या करते हैं।कुछ दिनों बाद एक वृक्ष के नीचे नींद में सो रहे कृष्ण को एक हिरण समझ कर , जरा नामक शिकारी तीर मारता है जो उन्हें घातक रूप से घायल करता है कृष्णा जरा को क्षमा करते है और देह त्याग देते हैं Bryant 2007 148Diana L. Eck India: A Sacred Geography https://books.google.com/books?id=uD_0P6gS-vMC&pg=PA380 2012 Harmony 978-0-385-53190-0 380–381 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170407062404/https://books.google.com/books?id=uD_0P6gS-vMC&pg=PA380 7 अप्रैल 2017 live, Quote: "Krishna was shot through the foot, hand, and heart by the single arrow of a hunter named Jara. Krishna was reclining there, so they say, and Jara mistook his reddish foot for a deer and released his arrow. There Krishna died." Mani, Vettam Puranic Encyclopaedia: A Comprehensive Dictionary With Special Reference to the Epic and Puranic Literature https://archive.org/details/puranicencyclopa00maniuoft Motilal Banarsidass 1975 Delhi 0-8426-0822-2 Vettam Mani 429। गुजरात में भालका की तीर्थयात्रा ( तीर्थ ) स्थल उस स्थान को दर्शाता है जहां कृष्ण ने अपना अवतार समाप्त किया तथा वापस वैकुण्ठ को गए । यह देहोतसर्ग के नाम से भी जाना जाता है। भागवत पुराण , अध्याय ३१ में कहा गया है कि उनकी मृत्यु के बाद, कृष्ण अपनी योगिक एकाग्रता की वजह से सीधे वैकुण्ठ में लौटे। ब्रह्मा और इंद्र जैसे प्रतीक्षारत देवताओं को भी कृष्ण को अपना मानव अवतार छोड़ने और वैकुण्ठ लौटने के लिए मार्ग का पता नहीं लगा Rao Shanta Rameshwar Krishna 2005 Orient Longman New Delhi 9788125026969 108 https://books.google.com/books?hl=en&lr=&id=NJ747fOWTRMC&oi=fnd&pg=PA1 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20160105142523/https://books.google.com/books?hl=en 5 जनवरी 2016 live। बाल्यकाल और युवावस्था कृष्ण ने देवकी और उनके पति, वासुदेव के यहां जन्म लिया। देवकी का भाई कंस नामक दुष्ट राजा था । पौराणिक उल्लेख के अनुसार देवकी के विवाह में कंस को भविष्यद्वक्ताओं ने बताया कि देवकी के पुत्र द्वारा उसका वध निश्चित है। कंस देवकी के सभी बच्चों को मारने की व्यवस्था करता है। जब कृष्ण जन्म लेते हैं, वासुदेव चुपके से शिशु कृष्ण को यमुना के पार ले जाते हैं और एक अन्य शिशु बालिका के साथ उनका आदान-प्रदान करते हैं। जब कंस इस नवजात शिशु को मारने का प्रयास करता है तब शिशु बालिका हिंदू देवी दुर्गा के रूप में प्रकट होती है, तथा उसे चेतावनी देते हुए कि उसकी मृत्यु उसके राज्य में आ गई है, लोप हो जाती हैं। पुराणों में किंवदंतियों के अनुसार ,कृष्ण, नंद और उनकी पत्नी यशोदा के साथ आधुनिक काल के मथुरा के पास पलते बढ़ते हैं। इन पौराणिक कथाओं के अनुसार, कृष्ण के दो भाई-बहन भी रहते हैं,बलराम और सुभद्रा । कृष्ण के जन्म का दिन जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। वयस्कता भागवत पुराण कृष्ण की आठ पत्नियों का वर्णन करता है, जो इस अनुक्रम में( रुक्मिणी , सत्यभामा, जामवंती , कालिंदी , मित्रवृंदा , नाग्नजिती (जिसे सत्य भी कहा जाता है), भद्रा और लक्ष्मणा (जिसे मद्रा भी कहते हैं) प्रकट होती हैं। डेनिस हडसन के अनुसार, यह एक रूपक है, आठों पत्नियां उनके अलग पहलू को दर्शाती हैं। जॉर्ज विलियम्स के अनुसार, वैष्णव ग्रंथों में कृष्ण की पत्नियों के रूप में सभी गोपियों का उल्लेख है, लेकिन यह सभी भक्ति एवं आध्यात्मिक सम्बन्ध का प्रतीक हैं। और प्रत्येक के लिए कृष्ण पूर्ण श्रद्धेय हैं। उनकी पत्नी को कभी-कभी रोहिणी , राधा , रुक्मिणी, स्वामीनिजी या अन्य कहा जाता है। कृष्ण-संबंधी हिंदू परंपराओं में, वह राधा के साथ सबसे अधिक चित्रित होते हैं। उनकी सभी पत्नियां को और उनके प्रेमिका राधा को हिंदू परंपरा में विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी के अवतार के रूप में माना जाता है। गोपियों को राधा के कई रूप और अभिव्यक्तियों के रूप में माना जाता है।George Mason Williams Handbook of Hindu Mythology https://books.google.com/books?id=N7LOZfwCDpEC&pg=PA188 10 March 2013 18 June 2008 Oxford University Press 978-0-19-533261-2 188, 222 कुरुक्षेत्र का महाभारत युद्ध महाभारत के अनुसार, कृष्ण कुरुक्षेत्र युद्ध के लिए अर्जुन के सारथी बनते हैं, लेकिन इस शर्त पर कि वह कोई भी हथियार नहीं उठाएंगे।दोनों के युद्ध के मैदान में पहुंचने के बाद और यह देखते हुए कि दुश्मन उसके अपने परिवार के सदस्य , उनके दादा, और उनके चचेरे भाई और प्रियजन हैं, अर्जुन क्षोभ में डूब जाते हैं और कहते है कि उनका ह्रदय उन्हें अपने परिजनों से लड़ने और मारने की अनुमति नहीं देगा। वह राज्य को त्यागने के लिए और अपने गाण्डीव (अर्जुन के धनुष) को छोड़ने के लिए तत्पर हो जाते है । कृष्ण तब उसे जीवन, नैतिकता और नश्वरता की प्रकृति के बारे में ज्ञान देते है। जब किसी को अच्छे और बुरे के बीच युद्ध का सामना करना पड़ता है तब , परिस्थिति की स्थिरता, आत्मा की स्थायीता और अच्छे बुरे का भेद ध्यान में रखते हुए , कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाते हुए , वास्तविक शांति की प्रकृति और आनंद और विभिन्न प्रकार के योगों को आनंद और भीतर की मुक्ति के लिए ऐसा योध अनिवार्य होता है । कृष्ण और अर्जुन के बीच बातचीत को भगवद् गीता नामक एक ग्रन्थ के रूप में प्रस्तुत किया गया हैKrishna in the Bhagavad Gita, by Robert N. Minor in Bryant 2007 77–79Jeaneane D. Fowler The Bhagavad Gita: A Text and Commentary for Students https://books.google.com/books?id=dHX5XwAACAAJ 2012 Sussex Academic Press 978-1-84519-520-5 1–7 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170406113541/https://books.google.com/books?id=dHX5XwAACAAJ 6 अप्रैल 2017 liveEknath Easwaran The Bhagavad Gita: (Classics of Indian Spirituality) https://books.google.com/books?id=bcnJAAAAQBAJ 2007 Nilgiri Press 978-1-58638-019-9 21–59 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20160914021842/https://books.google.com/books?id=bcnJAAAAQBAJ 14 सितंबर 2016 live। श्रीमद भगवद्गीता कुरु क्षेत्र की युद्धभूमि में श्रीकृष्ण ने अर्जुन को जो उपदेश दिया था वह श्रीमद्भगवदगीता के नाम से प्रसिद्ध है। सभी हिन्दू ग्रंथों में, श्रीमद भगवत गीता को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि इसमें एक व्यक्ति के जीवन का सार है और इसमें महाभारत काल से द्वापर तक कृष्ण के सभी लीलाओ का वर्णन हैं। ऐसी मान्यता है की यह महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित है हालांकि, इसमें कोई प्रमाण नहीं है लेकिन भगवद गीता एक पुस्तक है जो अर्जुन और उनके सारथी श्री कृष्ण के बीच वार्तालाप पर आधारित है। गीता में सांख्य योग , कर्म योग, भक्ति योग, राजयोग, एक ईश्वरावाद आदि पर बहुत ही सुंदर तरीके से चर्चा की गई है। संस्करण और व्याख्याएं कृष्ण की जीवन कथा के कई संस्करण हैं, जिनमें से तीन का सबसे अधिक अध्ययन किया गया है: हरिवंश , भागवत पुराण और विष्णु पुराण Benjamín Preciado-Solís The Kṛṣṇa Cycle in the Purāṇas: Themes and Motifs in a Heroic Saga https://books.google.com/books?id=JvCaWvjGDVEC&pg=PA40 1984 Motilal Banarsidass 978-0-89581-226-1 40 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170408191830/https://books.google.com/books?id=JvCaWvjGDVEC&pg=PA40 8 अप्रैल 2017 live, Quote: "Within a period of four or five centuries [around the start of the common era], we encounter our major sources of information, all in different versions. The Mahabharata, the Harivamsa, the Visnu Purana, the Ghata Jataka, and the Bala Carita all appear between the first and the fifth century AD, and each of them represents a tradition of a Krsna cycle different from the others".। ये सब मूल कहानी को ही दर्शाते हैं लेकिन उनकी विशेषताओं, विवरण और शैलियों में काफी भिन्नताएं हैं। सबसे मूल रचना, हरिवंश को एक यथार्थवादी शैली में बताया गया है जो कृष्ण के जीवन को एक गरीब ग्वाले के रूप में बताता है, लेकिन काव्यात्मक और अलौकिक कल्पना से ओतप्रोत है । यह कृष्ण की अवतार समाप्ति के साथ समाप्त नहीं होती। कुछ विवरणों के अनुसार विष्णु पुराण की पांचवीं पुस्तक हरिवंश के यथार्थवाद से दूर हो जाती है और कृष्ण को रहस्यमय शब्दों और स्तम्भों में आवरण करती है कई संस्करणों में विष्णु पुराण की पांडुलिपियां मौजूद हैं। भागवत पुराण की दसवीं और ग्यारहवीं पुस्तकों को व्यापक रूप से एक कविष्ठ कृति माना जाता है, जो कि कल्पना और रूपकों से भरा हुआ है, हरिवंश में पाये जाने वाले जीवों के यथार्थवाद से कोई संबंध नहीं है। कृष्ण के जीवन को एक ब्रह्मांडीय नाटक ( लीला ) के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जहां उनके पिता धर्मगुरू नंद को एक राजा के रूप में पेश किया गया था। कृष्ण का जीवन हरिवंश में एक इंसान के करीब है, लेकिन भागवत पुराण में एक प्रतीकात्मक ब्रह्मांड है, जहां कृष्ण ब्रह्मांड के भीतर हैं और इसके अलावा, साथ ही ब्रह्मांड भी हमेशा से है और रहेगा । कई भारतीय भाषाओं में भागवत पुराण पांडुलिपियां कई संस्करणों में भी मौजूद हैं। संभावित तिथियां कृष्ण का जन्म हर साल जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है Knott Kim 2000 Hinduism: A Very Short Introduction Oxford University Press, USA 0-19-285387-2 https://books.google.com/books?id=Wv8XK_GU9icC 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20161129210035/https://books.google.com/books?id=Wv8XK_GU9icC 29 नवंबर 2016 live । महाभारत और कुछ पुराणों में किंवदंतियों के अनुसार घटनाओं के आधार पर यह कहा जाता है कि कृष्ण एक वास्तविक ऐतिहासिक व्यक्ति थे। उदाहरण के लिए, लानवान्य वेंसानी कहते हैं कि कृष्ण का पुराणों में ३२२७ ईसा पूर्व - ३१०२ ईसा पूर्व के बीच होने का अनुमान लगाया जा सकता है Krishna in History, Thought, and Culture: An Encyclopedia of the Hindu Lord of Many Names: An Encyclopedia of the Hindu Lord of Many Names Lavanya Vemsani 2016 ABC-CLIO 212 https://books.google.com/books?id=4fw2DAAAQBAJ&pg=PR21 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20171206083031/https://books.google.com/books?id=4fw2DAAAQBAJ 6 दिसंबर 2017 live । इसके विपरीत, जैन परंपरा में पौराणिक कथाओं के अनुसार कृष्ण नेमिनाथ के चचेरे भाई थे, जो जैनों के २२ वें तीर्थंकर थे। ९वीं शताब्दी से जैन परंपरा का मानना ​​है कि नेमिनाथ ८४,००० वर्ष पहले पैदा हुए। "गाय बेक" कहती हैं कि कृष्ण - चाहे मानव हो या दिव्य अवतार - प्राचीन भारत में वास्तविक व्यक्ति को दर्शाता है, जो कम से कम १००० ईसा पूर्व रहते थे, लेकिन इस ऐतिहासिक प्रमाणों से, विशुद्ध रूप से संस्कृत सिद्धांत के अध्ययन से, यह प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता है। लुडो रोशेर और हज़रा जैसे अन्य विद्वानों का कहना है कि पुराण "भारतीय इतिहास" के लिए एक विश्वसनीय स्रोत नहीं है, क्योंकि इसमें राजाओं, विभिन्न लोगों, ऋषियों और राज्यों के बारे में लिखी गई पांडुलिपियों में विसंगतियां हैं। वे कहते हैं कि ये कहानियां संभवतया वास्तविक घटनाओं पर आधारित हैं, जो कि विज्ञान पर आधारित हैं और कुछ भागों में कल्पना द्वारा सुशोभित हैं। उदाहरण के लिए मत्स्य पुराण में कहा गया है कि कुर्म पुराण में १८,००० छंद हैं, जबकि अग्नि पुराण में इसी पाठ में ८००० छंद हैं, और नारदीय यह पुष्टि करते हैं कि कुर्म पांडुलिपि में १७,००० छंद हैं। पुराणिक साहित्य समय के साथ धीमी गति से बदला, साथ ही साथ कई अध्यायों का अचानक विलोप और इसकी नई सामग्री के साथ प्रतिस्थापित किया गया है। वर्तमान में परिणित पुराण उन लोगों के उल्लेख से पूरी तरह अलग है जो ११वीं सदी, या १६वीं सदी से पहले मौजूद थे। उदाहरण के लिए, नेपाल में ताड़ पत्र पांडुलिपि की खोज ८१० ईस्वी में हुई है, लेकिन वह पत्र, पुराने पाठ के संस्करणों से बहुत अलग है जो दक्षिण एशिया में औपनिवेशिक युग के बाद से परिचालित हो रहा है। दर्शन और धर्मशास्त्र हिंदू ग्रंथों में धार्मिक और दार्शनिक विचारों की एक विस्तृत श्रृंखला, जो कृष्ण के माध्यम से प्रस्तुत की जाती है। रामानुज, जो एक हिंदू धर्मविज्ञानी थे एवं जिनके काम भक्ति आंदोलन में अत्यधिक प्रभावशाली थे,Hermann Kulke Dietmar Rothermund A History of India https://books.google.com/books?id=RoW9GuFJ9GIC&pg=PA149 2004 Routledge 978-0-415-32920-0 149 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170216023512/https://books.google.com/books?id=RoW9GuFJ9GIC&pg=PA149 16 फ़रवरी 2017 live ने विशिष्टाद्वैत के संदर्भ में उन्हें प्रस्तुत किया। माधवाचार्य, एक हिंदू दार्शनिक जिन्होंने वैष्णववाद के हरिदास संप्रदाय की स्थापना की,Sharma B. N. Krishnamurti A History of the Dvaita School of Vedānta and Its Literature 2000 Motilal Banarsidass 978-8120815759 514–516 कृष्ण के उपदेशों को द्वैतवाद (द्वैत) के रूप में प्रस्तुत किया। गौदिया वैष्णव विद्यालय के एक संत जीव गोस्वामी, कृष्ण धर्मशास्त्र को भक्ति योग और अचिंत भेद-अभेद के रूप में वर्णित करते थे। धर्मशास्त्री वल्लभाचार्य द्वारा कृष्ण के दिए गए ज्ञान को अद्वैत (जिसे शुद्धाद्वैत भी कहा जाता है) के रूप में प्रस्तुत, जो वैष्णववाद के पुष्टि पंथ के संस्थापक थे Tripurari Swami The Life of Sri Jiva Goswami http://harmonist.us/2009/12/the-life-of-sri-jiva-goswami/ Harmonist dead https://web.archive.org/web/20130324101939/http://harmonist.us/2009/12/the-life-of-sri-jiva-goswami/ 24 March 2013 । भारत के एक अन्य दार्शनिक मधुसूदन सरस्वती, कृष्ण धर्मशास्त्र को अद्वैत वेदांत में प्रस्तुत करते थे, जबकि आदि शंकराचार्य , जो हिंदू धर्म में विचारों के एकीकरण और मुख्य धाराओं की स्थापना के लिए जाने जाते हैं, शुरुआती आठवीं शताब्दी में पंचायत पूजा पर कृष्ण का उल्लेख किया है।Johannes de Kruijf and Ajaya Sahoo (2014), Indian Transnationalism Online: New Perspectives on Diaspora, 978-1-4724-1913-2, page 105, Quote: "In other words, according to Adi Shankara's argument, the philosophy of Advaita Vedanta stood over and above all other forms of Hinduism and encapsulated them. This then united Hinduism; (...) Another of Adi Shankara's important undertakings which contributed to the unification of Hinduism was his founding of a number of monastic centers."Shankara, Student's Encyclopedia Britannia – India (2000), Volume 4, Encyclopaedia Britannica (UK) Publishing, 978-0-85229-760-5, page 379, Quote: "Shankaracharya, philosopher and theologian, most renowned exponent of the Advaita Vedanta school of philosophy, from whose doctrines the main currents of modern Indian thought are derived.";David Crystal (2004), The Penguin Encyclopedia, Penguin Books, page 1353, Quote: "[Shankara] is the most famous exponent of Advaita Vedanta school of Hindu philosophy and the source of the main currents of modern Hindu thought."Christophe Jaffrelot (1998), The Hindu Nationalist Movement in India, Columbia University Press, 978-0-231-10335-0, page 2, Quote: "The main current of Hinduism – if not the only one – which became formalized in a way that approximates to an ecclesiastical structure was that of Shankara". कृष्ण पर एक लोकप्रिय ग्रन्थ भागवत पुराण,असम में एक शास्त्र की तरह माना जाता है, कृष्ण के लिए एक अद्वैत, सांख्य और योग के रूपरेखा का संश्लेषण करता है, लेकिन वह कृष्ण के प्रति प्रेमपूर्ण भक्ति के मार्ग पर चलते हैं। ब्रायंट भागवत पुराण में विचारों के संश्लेषण का इस प्रकार वर्णन करते हैं भागवत का दर्शन, सांख्य, तत्वमीमांसा और भक्ति योग जैसी वेदांत शब्दावली का एक मिश्रण है। दसवीं किताब ईश्वर की सबसे मानवीय रूप में कृष्ण की शिक्षाओं को बढ़ावा देती है। एडविन ब्रायंट, कृष्णा: ए सोर्सबुक शेरिडन और पिंटचमैन दोनों ब्रायंट के विचारों की पुष्टि करते हैं और कहते हैं कि भागवत में वर्णित वेदांतिक विचार भिन्नता के साथ गैर-द्वैतवादी हैं। परंपरागत रूप से वेदांत , वास्तविकता में एक दूसरे पर आधारित हैं और भागवत यह भी प्रतिपादित करता है कि वास्तविकता एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं और बहुमुखी हैं Tracy Pintchman (1994), The rise of the Goddess in the Hindu Tradition, State University of New York Press, 978-0791421123, pages 132–134। विभिन्न थियोलॉजीज और दर्शन के अलावा ,सामान्यतः कृष्ण को दिव्य प्रेम का सार और प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें मानव जीवन और दिव्य का प्रतिबिंब है। कृष्ण और गोपियों की भक्ति और प्रेमपूर्ण किंवदंतियां और संवाद ,दार्शनिक रूप से दिव्य और अर्थ के लिए मानव इच्छा के रूपकों के समतुल्य माना जाता है और सार्वभौमिक शक्ति और मानव आत्मा के बीच का समन्वय है । कृष्ण की लीला प्रेम-और आध्यात्म का एक धर्मशास्त्र है। जॉन कोल्लेर के अनुसार, "मुक्ति के साधन के रूप में प्रेम को प्रस्तुत नहीं किया जाता है, यह सर्वोच्च जीवन है"। मानव प्रेम भगवान का प्रेम है। हिंदू परंपराओं में अन्य ग्रंथ ,जिनमें भगवद गीता सम्मिलित है, ने कृष्ण के उपदेशों पर कई भाष्य (टिप्पणी) लिखने के लिए प्रेरित किया है। प्रभाव वैष्णववाद कृष्ण की पूजा वैष्णववाद का हिस्सा है, जो हिंदू धर्म की एक प्रमुख परंपरा है। कृष्ण को विष्णु का पूर्ण अवतार माना जाता है, या विष्णु स्वयं अवतरित हुए ऐसा माना जाता है। हालांकि, कृष्ण और विष्णु के बीच का सटीक संबंध जटिल और विविध है, कृष्ण के साथ कभी-कभी एक स्वतंत्र देवता और सर्वोच्च माना जाता है। वैष्णव विष्णु के कई अवतारों को स्वीकार करते हैं, लेकिन कृष्ण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। शब्द कृष्णम् और विष्णुवाद को कभी-कभी दो में भेद करने के लिए इस्तेमाल किया गया है, जिसका अर्थ है कि कृष्ण श्रेष्ठतम सर्वोच्च व्यक्ति हैJohn Dowson Classical Dictionary of Hindu Mythology and Religion, Geography, History and Literature Kessinger Publishing 2003 361 0-7661-7589-8 https://books.google.com/?id=6JB-KOXy5k8C&pg=PA361&dq=Vishnu+Sahasranama+Krishna अक्तूबर 2021 InternetArchiveBot । सभी वैष्णव परंपराएं कृष्ण को विष्णु का आठवां अवतार मानती हैं; अन्य लोग विष्णु के साथ कृष्ण की पहचान करते हैं, जबकि गौदीया वैष्णववाद, वल्लभ संप्रदाय और निम्बारका संप्रदाय की परंपराओं में कृष्ण को स्वामी भगवान का मूल रूप या हिंदू धर्म में ब्राह्मण की अवधारणा के रूप में सम्मान करते हैं। जयदेव अपने गीतगोविंद में कृष्ण को सर्वोच्च प्रभु मानते हैं जबकि दस अवतार उनके रूप हैं। स्वामीनारायण संप्रदाय के संस्थापक स्वामीनारायण ने भगवान के रूप में कृष्ण की भी पूजा की। "वृहद कृष्णवाद" वैष्णववाद में , वैसुलिक काल के वासुदेव और वैदिक काल के कृष्ण और गोपाल को प्रमुख मानते हैं http://philtar.ucsm.ac.uk/encyclopedia/hindu/devot/vaish.html Vaishnava 2008-10-13 encyclopedia Division of Religion and Philosophy University of Cumbria yes https://www.webcitation.org/65DKpKa9B?url=http://www.philtar.ac.uk/encyclopedia/hindu/devot/vaish.html 5 February 2012 dmy-all, University of Cumbria website Retrieved on 5-21-2008। आज भारत के बाहर भी कृष्ण को मानने वाले एवं अनुसरण एवं विश्वास करने वालो की बहुत बड़ी संख्या है। प्रारंभिक परंपराएं प्रभु श्रीकृष्ण-वासुदेव ("कृष्ण, वसुदेव के पुत्र") ऐतिहासिक रूप से कृष्णवाद और वैष्णववाद में इष्ट देव के प्रारंभिक रूपों में से एक हैं। प्राचीन काल में कृष्ण धर्म को प्रारंभिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण परंपरा माना जाता था। इसके बाद, विभिन्न समान परंपराओं का एकीकरण हुआ इनमें प्राचीन भगवतवाद , गोपाला का पंथ, "कृष्ण गोविंदा" (गौपालक कृष्ण), बालकृष्ण और "कृष्ण गोपीवलभा" (कृष्ण प्रेमिका) सम्मिलित हैं Klostermaier, Klaus K. 203–204 2005 A Survey of Hinduism https://archive.org/details/surveyhinduismth00klos_502 State University of New York Press; 3 edition 0-7914-7081-4 Present day Krishna worship is an amalgam of various elements. According to historical testimonies Krishna-Vasudeva worship already flourished in and around Mathura several centuries before Christ. A second important element is the cult of Krishna Govinda. Still later is the worship of Bala-Krishna, the Child Krishna—a quite prominent feature of modern Krishnaism. The last element seems to have been Krishna Gopijanavallabha, Krishna the lover of the Gopis, among whom Radha occupies a special position. In some books Krishna is presented as the founder and first teacher of the Bhagavata religion. harv Review: Krishna: Myths, Rites, and Attitudes. by Milton Singer; Daniel H. H. Ingalls https://archive.org/details/sim_journal-of-asian-studies_1968-05_27_3/page/667 The Journal of Asian Studies 27 3 May 1968 Basham A. L. 2051211 667–670 । आंद्रे कोटेर के अनुसार, हरिवंश ने कृष्ण के विभिन्न पहलुओं के रूप में संश्लेषण में योगदान दिया। भक्ति परंपरा भक्ति परम्परा में आस्था का प्रयोग किसी भी देवता तक सीमित नहीं है। हालांकि, हिंदू धर्म के भीतर कृष्ण भक्ति , परंपरा का एक महत्वपूर्ण और लोकप्रिय केंद्र रहा है, विशेषकर वैष्णव संप्रदायों में Klostermaier, K. 1974 The Bhaktirasamrtasindhubindu of Visvanatha Cakravartin https://archive.org/details/sim_journal-of-the-american-oriental-society_january-march-1974_94_1/page/96 Journal of the American Oriental Society 94 1 96–107 10.2307/599733 599733 American Oriental Society harv । कृष्ण के भक्तों ने लीला की अवधारणा को ब्रह्मांड के केंद्रीय सिद्धांत के रूप में माना जिसका अर्थ है 'दिव्य नाटक'। यह भक्ति योग का एक रूप है, तीन प्रकार के योगों में से एक भगवान कृष्ण द्वारा भगवद गीता में चर्चा की हैJacobsen Knut A. 2005 Theory And Practice of Yoga: Essays in Honour of Gerald James Larson 351 Brill Academic Publishers 90-04-14757-8Christopher Key Chapple (Editor) and Winthrop Sargeant (Translator), The Bhagavad Gita: Twenty-fifth–Anniversary Edition, State University of New York Press, 978-1438428420, pages 302–303, 318। भारतीय उपमहाद्वीप दक्षिण में , खासकर महाराष्ट्र में , वारकरी संप्रदाय के संत कवियों जैसे ज्ञानेश्वर , नामदेव , जनाबाई , एकनाथ और तुकाराम ने विठोबा की पूजा को प्रोत्साहित किया।दक्षिणी भारत में, कर्नाटक के पुरंदरा दास और कनकदास ने उडुपी की कृष्ण की छवि के लिए समर्पित गीतों का निर्माण किया। गौड़ीय वैष्णववाद के रूपा गोस्वामी ने भक्ति-रसामृत-सिंधु नामक भक्ति के व्यापक ग्रन्थ को संकलित किया है। दक्षिण भारत में, श्री संप्रदाय के आचार्य ने अपनी कृतियों में कृष्ण के बारे में बहुत कुछ लिखा है, जिनमें अंडाल द्वारा थिरुपावई और वेदांत देसिका द्वारा गोपाल विमशती शामिल हैं Bowen, Paul Themes and issues in Hinduism https://archive.org/details/themesissuesinhi0000unse Cassell London 1998 64–65 0-304-33851-6 Radhakrisnasarma, C. 1975 Landmarks in Telugu Literature: A Short Survey of Telugu Literature Lakshminarayana Granthamala Sisir Kumar Das 2005 A History of Indian Literature, 500–1399: From Courtly to the Popular Sahitya Akademi 49 81-260-2171-3। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और केरल के राज्यों में कई प्रमुख कृष्ण मंदिर हैं और जन्माष्टमी दक्षिण भारत में व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। एशिया के बाहर १९६५ तक कृष्ण-भक्ति आंदोलन भारत के बाहर भक्तवेदांत स्वामी प्रभुपाद (उनके गुरु , भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर द्वारा निर्देशित )द्वारा फैलाया गया। अपनी मातृभूमि पश्चिम बंगाल से वे न्यूयॉर्क शहर गए थे । एक साल बाद १९६६ में, कई अनुयायियों के सानिध्य में उन्होंने कृष्ण चेतना (इस्कॉन) के लिए अंतर्राष्ट्रीय सोसायटी का निर्माण किया था, जिसे हरे कृष्ण आंदोलन के रूप में जाना जाता है। इस आंदोलन का उद्देश्य अंग्रेजी में कृष्ण के बारे में लिखना था और संत चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं को फैलाने का कार्य करना था तथा कृष्ण भक्ति के द्वारा पश्चिमी दुनिया के लोगों के साथ गौद्द्य वैष्णव दर्शन को साझा करना था। चैतन्य महाप्रभु की आत्मकथा में वर्णित जब उन्हें गया में दीक्षा दी गई थी तो उन्हें काली-संताराण उपनिषद के छह शब्द की कविता ,ज्ञान स्वरुप बताई गई थी, जो की "हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्णा कृष्णा हरे हरे, हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे " थी Alanna Kaivalya (2014), Sacred Sound: Discovering the Myth and Meaning of Mantra and Kirtan, New World, 978-1608682430, pages 153–154 । गौड़ीय परंपरा में कृष्ण भक्ति के संदर्भ ने यह महामंत्र या महान मंत्र है। इसका जप हरि-नाम संचरित के रूप में जाना जाता था। महा-मंत्र ने बीटल्स रॉक बैंड के जॉर्ज हैरिसन और जॉन लेनन का ध्यान आकर्षित किया और हैरिसन ने १९६९ को लंदन स्थित राधा कृष्ण मंदिर में भक्तों के साथ मंत्र की रिकॉर्डिंग की। " हरे कृष्ण मंत्र " शीर्षक से, यह गीत ब्रिटेन के संगीत सूची पर शीर्ष बीस तक पहुंच गया और यह पश्चिम जर्मनी और चेकोस्लोवाकिया में भी अत्यधिक लोकप्रिय रहाPeter Clarke (2005), Encyclopedia of New Religious Movements, Routledge, 978-0415267076, page 308 Quote: "There they captured the imagination of The Beatles, particularly George Harrison who helped them produce a chart topping record of the Hare Krishna mantra (1969) and ...".। उपनिषद के मंत्र ने भक्तिवेदांत और कृष्ण को पश्चिम में इस्कॉन विचारों को लाने में मदद की। इस्कॉन ने पश्चिम में कई कृष्ण मंदिर बनाए, साथ ही दक्षिण अफ्रीका जैसे अन्य स्थानों में भी मंदिरो का निर्माण किया। दक्षिण पूर्व एशिया कृष्ण दक्षिणपूर्व एशियाई इतिहास और कला में पाए जाते हैं, लेकिन उनका शिव , दुर्गा , नंदी , अगस्त्य और बुद्ध की तुलना में बहुत कम उल्लेख है । जावा , इंडोनेशिया में पुरातात्विक स्थलों के मंदिरों ( कैंडी ) में उनके गांव के जीवन या प्रेमी के रूप में उनकी भूमिका का चित्रण नहीं है और न ही जावा के ऐतिहासिक हिंदू ग्रंथों में इसका उल्लेख है। इसके बजाए, उनका बाल्य काल अथवा एक राजा और अर्जुन के साथी के रूप में उनके जीवन को अधिक उल्लेखित किया गया है। कृष्ण की कलाओं को , योगकार्ता के निकट सबसे विस्तृत मंदिर , प्रम्बनन हिंदू मंदिर परिसर में J Fontein Nataskha Eilenberg et al Living a life in accord with Dhamma: papers in honor of professor Jean Boisselier on his eightieth birthday https://books.google.com/books?id=--m5oQEACAAJ 1997 Silpakorn University 191–204 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170407154710/https://books.google.com/books?id=--m5oQEACAAJ 7 अप्रैल 2017 liveTriguṇa (Mpu.) Suwito Santoso Krĕṣṇāyana: The Krĕṣṇa Legend in Indonesia https://books.google.com/books?id=341kAAAAMAAJ 1986 IAIC 15488486 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20170407153921/https://books.google.com/books?id=341kAAAAMAAJ 7 अप्रैल 2017 live ,कृष्णायण मंदिरो की एक श्रृंखला के रूप में उकेरा गया है। ये ९वी शताब्दी ईस्वी के है । कृष्ण 14 वीं शताब्दी ईस्वी के मध्य से जावा सांस्कृतिक और धार्मिक परम्पराओं का हिस्सा बने रहे। पनातरान के अवशेषों के अनुसार पूर्व जावा में हिंदू भगवान राम के साथ इनके मंदिर प्रचलन में थे और तब तक रहे जब तक की इस्लाम ने द्वीप पर बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म की जगह ली। वियतनाम और कंबोडिया की मध्यकालीन युग में कृष्ण कला की विशेषता है। सबसे पहली जीवंत मूर्तियां और उनके अवशेष ६ ठी और ७ वीं शताब्दी ईस्वी को प्राप्त हुए थे , इन में वैष्णववाद प्रतिमा का समावेश है। जॉन गाइ , एशियाई कलाओं के निर्देशक,के अनुसार मेट्रोपोलिटन म्यूज़ियम ऑफ साउथ ईस्ट एशिया में , दानंग में ६ ठी / ७ वी शताब्दी ईस्वी के वियतनाम के कृष्ण गोवर्धन कला और ७ वीं शताब्दी के कंबोडिया, अंगकोर 'बोरी में फ्नॉम दा' गुफा में, इस युग के सबसे परिष्कृत मंदिर हैं। सूर्य और विष्णु के साथ कृष्ण की प्रतिमाओं को थाईलैंड में भी पाया गया है , सी-थेप में बड़ी संख्या में मूर्तियां और चिह्न पाए गए हैं। उत्तरी थाइलैंड के फीटबुन क्षेत्र में थिप और कलाग्ने स्थलों पर , फनान और झेंला काल के पुरातात्विक स्थलों से, ये ७ वीं और ८ वीं शताब्दी के अवशेष पाए गए हैं । प्रदर्शन कला भारतीय नृत्य और संगीत थिएटर प्राचीन ग्रंथो जैसे वेद और नाट्यशास्त्र ग्रंथों को अपना आधार मानते हैं PV Kane, History of Sanskrit Poetics, Motilal Banarsidass, 978-8120802742 (2015 Reprint), pages 10–41 । हिंदू ग्रंथों में पौराणिक कथाओं और किंवदंतियों से प्रेरित कई नृत्यनाटिकाओं को और चलचित्रों को , जिसमें कृष्ण-संबंधित साहित्य जैसे हरिवंश और भागवत पुराण शामिल हैं ,अभिनीत किया गया है । कृष्ण की कहानियों ने भारतीय थियेटर, संगीत, और नृत्य के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेष रूप से रासलीला की परंपरा के माध्यम से। ये कृष्ण के बचपन, किशोरावस्था और वयस्कता के नाटकीय कार्य हैं। एक आम दृश्य में कृष्ण को रासलीला में बांसुरी बजाते दिखाया जाता हैं, जो केवल कुछ गोपियों को सुनाई देती है तथा जो धर्मशास्त्रिक रूप से दिव्य वाणी का प्रतिनिधित्व करती है जिसे मात्र कुछ प्रबुद्ध प्राणियों द्वारा सुना जा सकता है। कुछ पाठ की किंवदंतियों ने गीत गोविंद में प्रेम और त्याग जैसे माध्यमिक कला साहित्य को प्रेरित किया है। भागवत पुराण जैसे कृष्ण-संबंधी साहित्य, प्रदर्शन के लिए इसके आध्यात्मिक महत्व को मानते हैं और उन्हें धार्मिक अनुष्ठान के रूप में मानते हैं तथा प्रतिदिन जीवन को आध्यात्मिक अर्थ के साथ जोड़ते हैं। इस प्रकार एक अच्छा, ईमानदार / सत्यनिष्ठा और सुखी जीवन व्यतीत करने का पथ प्रदर्शित करते हैं। इसी तरह, कृष्ण द्वारा प्रेरित प्रदर्शन का उद्देश्य विश्वासयोग्य अभिनेताओं और श्रोताओं के हृदय को शुद्ध करना है। कृष्ण लीला के किसी भी हिस्से का गायन, नृत्य और प्रदर्शन, पाठ में धर्म को याद करने का एक कार्य है। यह पराभक्ति (सर्वोच्च भक्ति) के रूप में है। किसी भी समय और किसी भी कला में कृष्ण को याद करने के लिए, उनकी शिक्षा पर देते हुए, उनकी सुन्दर और दिव्य पूजा की जाती है। विशेषकर कथक , ओडिसी , मणिपुरी , कुचीपुड़ी और भरतनाट्यम जैसे शास्त्रीय नृत्य शैलियां उनके कृष्ण-संबंधी प्रदर्शनों के लिए जाने जाते हैं। कृष्णाट्टम ( कृष्णट्टम ) ने अपने मूल को कृष्ण पौराणिक कथाओं के साथ रखा है और यह कथकली नामक एक अन्य प्रमुख शास्त्रीय भारतीय नृत्य रूप से जुड़ा हुआ है। ब्रायंट, भागवत पुराण में कृष्ण कहानियों के प्रभाव का सारांश देता है, " संभवतः किसी भी अन्य पाठ की तुलना में संस्कृत साहित्य के इतिहास में ,रामायण के अपवाद के साथ ,इतने अधिक व्युत्पन्न साहित्य, कविता, नाटक, नृत्य, थियेटर और कला को प्रेरित नहीं किया। । अन्य धर्म जैन धर्म जैन धर्म की परंपरा में ६३ शलाकपुरुषों की सूची है, जिनमे चौबीस तीर्थंकर (आध्यात्मिक शिक्षक) और त्रिदेव के नौ समीकरण शामिल हैं। इनमें से एक समीकरण में कृष्ण को वासुदेव के रूप में, बलराम को बलदेव के रूप में, और जरासंध को प्रति -वासुदेव के रूप में दर्शाया जाता है। जैन चक्रीय समय के प्रत्येक युग में बड़े भाई के साथ वासुदेव का जन्म हुआ है, जिसे बलदेव कहा जाता है। तीनों के बीच, बलदेव ने ,जैन धर्म का एक केंद्रीय विचार, अहिंसा के सिद्धांत को बरकरार रखा है। खलनायक प्रति -वासुदेव है, जो विश्व को नष्ट करने का प्रयास करता है। विश्व को बचाने के लिए, वासुदेव-कृष्ण को अहिंसा सिद्धांत को त्यागना और प्रति -वासुदेव को मारना पड़ता हैJaini P. S. Padmanabh Jaini 1993 Jaina Puranas: A Puranic Counter Tradition 978-0-7914-1381-4 https://books.google.com/?id=-kZFzHCuiFAC&pg=PA207। इन तीनों की कहानियां, जिनसेना के हरिवंश पुराण (महाभारत के एक शीर्षक से भ्रमित हो )(८ वीं शताब्दी ईस्वी ) में पढ़ी जा सकती है एवं हेमचंद्र की त्रिशक्ति-शलाकापुरुष -चरित में भी इनका उल्लेख है। विमलसुरी को हरिवंश पुराण के जैन संस्करण का लेखक माना जाता है, लेकिन ऐसी कोई पांडुलिपि नहीं मिली है जो इसकी पुष्टि करती है। यह संभावना है कि बाद में जैन विद्वानों, शायद 8 वीं शताब्दी के जिनसेना ने , जैन परंपरा में कृष्ण किंवदंतियों का एक पूरा संस्करण लिखा और उन्हें प्राचीन विमलसुरी में जमा किया। कृष्ण की कहानी के आंशिक और पुराने संस्करण जैन साहित्य में उपलब्ध हैं, जैसे कि श्वेताम्बर अगम परंपरा के अंतगत दसाओ में ये वर्णित है। अन्य जैन ग्रंथों में, कृष्ण को बाइसवे तीर्थंकर, नेमिनाथ के चचेरे भाई कहा जाता है। जैन ग्रंथों में कहा गया है कि नेमिनाथ ने कृष्ण को सर्व ज्ञान सिखाया था जिसने बाद में भगवद गीता में अर्जुन को दिया था। जेफरी डी लांग के अनुसार, कृष्ण और नेमिनाथ के बीच यह संबंध एक ऐसा ऐतिहासिक कारण है जिस कारण जैनियो को भगवद् गीता को एक आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण पाठ के रूप में स्वीकार, पढ़ना, और उद्धृत करना पड़ा तथा कृष्ण- संबंधित त्योहारों और हिंदूओं को आध्यात्मिक चचेरे भाई के रूप में स्वीकार करना पड़ा । बौद्ध धर्म कृष्ण की कहानी बौद्ध धर्म की जातक कहानियों में मिलती है। विदुरपंडित जातक में मधुरा (संस्कृत: मथुरा) का उल्लेख है, घट जातक में कंस , देवभग ( देवकी), उपसागरा या वासुदेव, गोवधन (गोवर्धन), बलदेव (बलराम) और कान्हा या केसव ( कृष्ण, केशव ) का उल्लेख है Law, B. C. 1941 India as Described in Early Texts of Buddhism and Jainism Luzac https://archive.org/stream/in.ernet.dli.2015.513920/2015.513920.India-as#page/n5/mode/2up 99–101 Jaiswal, S. 1974 Historical Evolution of the Ram Legend Social Scientist 3517633 21 3–4 89–97 सिख धर्म कृष्ण को चौबीस अवतार में कृष्ण अवतार के रूप में वर्णित किया गया है, जो परंपरागत रूप से और ऐतिहासिक रूप से गुरु गोबिंद सिंह को समर्पित दशम ग्रंथ है http://www.info-sikh.com/VVPage1.html संग्रहीत प्रति 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20171012112145/http://www.info-sikh.com/VVPage1.html 12 अक्तूबर 2017 dead । बहाई पंथ बहाई पंथिओं का मानना ​​है कि कृष्ण " ईश्वर के अवतार " या भविष्यद्वक्ताओं में से एक है जिन्होंने धीरे-धीरे मानवता को परिपक्व बनाने हेतु भगवान की शिक्षा को प्रकट किया है। इस तरह, कृष्ण का स्थान इब्राहीम , मूसा , जोरोस्टर , बुद्ध , मुहम्मद , यीशु , बाब , और बहाई विश्वास के संस्थापक बहाउल्लाह के साथ साझा करते हैं। Smith Peter A concise encyclopedia of the Bahá'í Faith Manifestations of God 2000 Oneworld Publications Oxford 1-85168-184-1 231 Esslemont, J. E. John Esslemont 1980 Bahá'u'lláh and the New Era 5th Bahá'í Publishing Trust Wilmette, Illinois, USA 0-87743-160-4 http://reference.bahai.org/en/t/je/BNE/bne-6.html#gr5 2 15 अप्रैल 2018 https://web.archive.org/web/20180916122532/http://reference.bahai.org/en/t/je/BNE/bne-6.html#gr5 16 सितंबर 2018 dead । अहमदिया अहमदिया , एक आधुनिक युग का पंथ है , कृष्ण को उनके मान्य प्राचीन प्रवर्तकों में से एक माना जाता है। अहमदी खुद को मुसलमान मानते हैं, लेकिन वे मुख्यधारा के सुन्नी और शिया मुसलमानों द्वारा इस्लाम धर्म के रूप में खारिज करते हैं, जिन्होंने कृष्ण को अपने भविष्यद्वक्ता के रूप में मान्यता नहीं दी है। गुलाम अहमद ने कहा कि वह स्वयं कृष्ण, यीशु और मुहम्मद जैसे भविष्यद्वक्ताओं की तरह एक भविष्यवक्ता थे, जो धरती पर धर्म और नैतिकता के उत्तरार्द्ध पुनरुद्धार के रूप में आए थे Siddiq & Ahmad (1995), Enforced Apostasy: Zaheeruddin v. State and the Official Persecution of the Ahmadiyya Community in Pakistan, Law & Inequality, Volume 14, pp. 275–324Minahan James Ethnic groups of South Asia and the Pacific: An Encyclopedia https://archive.org/details/ethnicgroupsofso0000mina ABC-CLIO Santa Barbara, USA 2012 978-1-59884-659-1 6–8Burhani A. N. (2013), Treating minorities with fatwas: a study of the Ahmadiyya community in Indonesia, Contemporary Islam, Volume 8, Issue 3, pp. 285–301। अन्य कृष्ण की पूजा या सम्मान को १९ वीं के बाद से कई नए धार्मिक आंदोलनों द्वारा अपनाया गया है। उदाहरण के लिए, एडवर्ड शूरे , कृष्ण को एक महान प्रवर्तक मानते है Harvey D. A. 2003 Beyond Enlightenment: Occultism, Politics, and Culture in France from the Old Regime to the Fin-de-Siècle https://archive.org/details/sim_historian_spring-2003_65_3/page/665 The Historian 65 3 665–694 Blackwell Publishing 10.1111/1540-6563.00035 harv , जबकि थियोसोफिस्ट कृष्ण को मैत्रेय ( प्राचीन बुद्ध के गुरुओ में से एक) के अवतार के रूप में मानते हैं, जो बुद्ध के सबसे महत्वपूर्ण आध्यात्मिक गुरु है। Schure Edouard Édouard Schuré Great Initiates: A Study of the Secret History of Religions Garber Communications 1992 0-89345-228-9See for example: Hanegraaff Wouter J. Wouter Hanegraaff New Age Religion and Western Culture: Esotericism in the Mirror of Secular Thought https://archive.org/details/newagereligionwe0000hane_h3e9 Brill Publishers 1996 390 90-04-10696-0, Hammer Olav Olav Hammer Claiming Knowledge: Strategies of Epistemology from Theosophy to the New Age https://archive.org/details/claimingknowledg00hamm Brill Publishers 2004 62, 174 90-04-13638-X, and Ellwood Robert S. Theosophy: A Modern Expression of the Wisdom of the Ages https://archive.org/details/theosophymoderne0000ellw Quest Books 139 1986 0-8356-0607-4 । यह भी देखें Krishna कृष्ण हिन्दू धर्म भगवान दशावतार प्रेम मंदिर वृंदावन राधा वेदान्त श्रीनाथजी हिन्दू धर्म महाभारत गीता सूरसागर सन्दर्भ 2 श्रेणी:कृष्ण श्रेणी:विष्णु अवतार श्रेणी:हिन्दू देवता श्रेणी:यदुकुल <note> श्री कृष्ण जी की गुरू दक्षिणा श्री कृष्ण जी ने अपने गुरू और गुरू माता को दक्षिणा में दिया वचन पूरा किया। पूरा लेख पढ़ने के लिए ब्लॉग पर जाएं_ https://web.archive.org/web/20200711015718/https://sspatul.blogspot.com/2020/07/blog-post_9.html <ref> Akddeos92