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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

राजा राधिकारमण सिंह

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अगस्त 2020 राजा राधिकारमण सिंह (10 सितम्बर, 1890–24 मार्च, 1971) हिन्दी साहित्यकार थे। इनकी एक प्रसिद्ध रचना "चुंमन-चाटा" थी। कथा–लेखन में अपनी अत्यन्त l शैली के कारण हिंदी कथा साहित्य में वे ‘शैली–सम्राट‘ के रूप में स्मरण किए जाते हैं। कहानी किस प्रकार पाठकों को आरम्भ से अन्त तक पढ़ने के लिए विवश कर सकती है, इस शिल्प को वो जान गए थे। इसीलिए वे अपने समय के सबसे लोकप्रिय कहानीकार सिद्ध हुए। उन्होने ५० वर्षों तक हिन्दी साहित्य की महनीय सेवा की। राधिकारमण प्रसाद सिंह का जन्म बिहार के शाहाबाद के सूर्यपुरा नामक स्थान पर प्रसिद्ध कायस्थ जमींदार राजा राजराजेश्वरी सिंह 'प्यारे' के यहाँ हुआ था। आरम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। 1907 में आरा जिला स्कूल से इन्ट्रेन्स, 1909-1910 में सेन्ट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से एफ.ए, 1912 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए और 1914 में कलकत्ता विश्वविद्यालय से एम॰ए॰ (इतिहास) की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कीं। कृतियाँ कहानी संग्रह - 'कुसुमांजलि', 'अपना पराया', 'गांधी टोपी', 'धर्मधुरी' कहानियाँ - ‘गाँधी टोपी’ (सन् 1938 ई.), ‘सावनी समाँ’ (सन् 1938 ई.), ‘नारी क्या एक पहेली? (सन् 1951 ई.), ‘हवेली और झोपड़ी’ (सन् 1951 ई.), ‘देव और दानव’ (सन् 1951 ई.), ‘वे और हम’ (सन् 1956 ई.), ‘धर्म और मर्म’ (सन् 1959 ई.), ‘तब और अब’ (सन् 1958 ई.), ‘अबला क्या ऐसी सबला?’ (सन् 1962 ई.), ‘बिखरे मोती’ (भाग-1) (सन् 1965 ई.) कानो मे कंगना (1913) उपन्यास - ‘राम-रहीम’ (सन् 1936 ई.), ‘पुरुष और नारी’ (सन् 1939 ई.), ‘सूरदास’ (सन् 1942 ई.), ‘संस्कार’ (सन् 1944 ई.), ‘पूरब और पश्चिम’ (सन् 1951 ई.), ‘चुंबन और चाँटा’ (सन् 1957 ई.) लघु उपन्यास - ‘नवजीवन’ (सन् 1912 ई), ‘तरंग’ (सन् 1920 ई.), ‘माया मिली न राम’ (सन् 1936 ई.), ‘मॉडर्न कौन, सुंदर कौन’ (सन् 1964 ई.) और ‘अपनी-अपनी नजर’, ‘अपनी-अपनी डगर’ (सन् 1966 ई.)। नाटक - ‘नये रिफारमर’ या ‘नवीन सुधारक’ (सन् 1911 ई.), ‘धर्म की धुरी’ (सन् 1952 ई.), ‘अपना पराया’ (सन् 1953 ई.) और ‘नजर बदली बदल गये नजारे’ (सन् 1961 ई.)। संस्मरण - 'सावनी सभा', टूटातारा, सूरदास गद्यकाव्य - नवजीवन, 'प्रेम लहरी' गद्य कृतियाँ - 'नारी एक पहेली', 'पूरब और पश्चिम', 'हवेली और झोपड़ी', 'देव और दानव', 'वे और हम', 'धर्म और मर्म', 'तब और अब' बाहरी कड़ियाँ आईए जानते है पद्मभूषण से सम्मानित सूर्यपुरा के राजा राधिकारमण के बारे में कानों में कंगना (राजा राधिकारमण सिंह द्वारा रचित कहानी) श्रेणी:हिन्दी साहित्यकार श्रेणी:1890 में जन्मे लोग श्रेणी:१९७१ में निधन श्रेणी:बिहार के लोग