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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

माइकल मधुसुदन दत्त

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माइकल मधुसूदन दत्त bn মাইকেল মধুসূদন দত্ত bn Michael Madhusudan Dutta.jpg दत्त का चित्र, 1907 bn mai̯kel mod̪ʱuʃud̪ɔn d̪ɔt̪ːo Madhusudan.ogg मधुसूदन दत्त yes 1824 01 25 सागरदाँड़ी, यशोर, बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत (वर्तमान बांग्लादेश) 8 फ़रवरी 1843 yes 1873 06 29 1824 01 25 कलकत्ता, बंगाल प्रेसिडेंसी, ब्रिटिश भारत (वर्तमान पश्चिम बंगाल, भारत) लोअर सर्कुलर रोड कब्रिस्तान 22.547837 88.363659 inline,title ब्रिटिश भारतीय हिंदू कॉलेज बिशप्स कॉलेज ग्रेज़ इन कवि नाटककार निबंधकार अनुवादक ग्रंथसूची रेबेका थॉम्पसन मैकटैविश 1848 1856 अलग हो गए एमिलिया अँरियेता सोफ़ी व्हाइट (1858–1873) 8जिसमें एक मृतजन्मा बच्चा भी शामिल था। जाह्नवी देवी राजनारायण दत्त जेनिफर पेस (परपोती) लिएंडर पेस (परपरपोता) नीचे देखें yes टिमोथी पेनपोएम बंगाली अंग्रेज़ी आधुनिक महाकाव्य कथात्मक कविता गीतात्मक कविता सॉनेट पद्य नाटक प्रहसन हास्य नाटक त्रासदी पद्य अनुवाद हिंदू पुराण यूनानी पुराण प्यार रूमानी प्यार वीरता युद्ध उपनिवेशवाद निर्वासन राष्ट्रभक्ति बंगाल का नवजागरण शर्मिष्ठा नाटक (1859) तिलोत्तमासंभव काव्य (1860) मेघनादवध काव्य (1861) ब्रजांगना काव्य (1861) वीरांगना काव्य (1862) चतुर्दशपदी कवितावली (1866) 1849–1873 माइकल मधुसूदन दत्तen Michael Madhusudan Dutt, en ˈmaɪkəl ˌmædhuːˈsuːdən dʌt; bn মাইকেল মধুসূদন দত্ত, bn mai̯kel mod̪ʱuʃud̪ɔn d̪ɔt̪ːo pron Madhusudan.ogg। (bn মাইকেল মধুসূদন দত্ত, bn mai̯kel mod̪ʱuʃud̪ɔn d̪ɔt̪ːo pron Madhusudan.ogg; 25 जनवरी 1824 – 29 जून 1873) बंगला भाषा के प्रख्यात कवि और नाटककार थे। नाटक रचना के क्षेत्र मे वे प्रमुख अगुआई थे। उनकी प्रमुख रचनाओ मे मेघनादबध काव्य प्रमुख है। thumb|माइकल मधुसुदन दत्त जीवनी मधुसुदन दत्त का जन्म बंगाल के जेस्सोर जिले के सागादरी नाम के गाँव मे हुआ था। अब यह जगह बांग्लादेश मे है। इनके पिता राजनारायण दत्त कलकत्ते के प्रसिद्ध वकील थे। 1837 ई0 में हिंदू कालेज में प्रवेश किया। मधुसूदन दत्त अत्यंत कुशाग्र बुद्धि के विद्यार्थी थे। एक ईसाई युवती के प्रेमपाश में बंधकर उन्होंने ईसाई धर्म ग्रहण करने के लिये 1843 ई0 में हिंदू कालेज छोड़ दिया। कालेज जीवन में माइकेल मधुसूदन दत्त ने काव्यरचना आरंभ कर दी थी। हिंदू कालेज छोड़ने के पश्चात् वे बिशप कालेज में प्रविष्ट हुए। इस समय उन्होंने कुछ फारसी कविताओं का अंग्रेजी में अनुवाद किया। आर्थिक कठिनाईयों के कारण 1848 में उन्हें बिशप कालेज भी छोड़ना पड़ा। तत्पश्चात् वे मद्रास चले गए जहाँ उन्हें गंभीर साहित्यसाधना का अवसर मिला। पिता की मृत्यु के पश्चात् 1855 में वे कलकत्ता लौट आए। उन्होंने अपनी प्रथम पत्नी को तलाक देकर एक फ्रांसीसी महिला से विवाह किया। 1862 ई0 में वे कानून के अध्ययन के लिये इंग्लैंड गए और 1866 में वे वापस आए। तत्पश्चात् उन्होंने कलकत्ता के न्यायालय मे नौकरी कर ली। 19वीं शती का उत्तरार्ध बँगला साहित्य में प्राय: मधुसूदन-बंकिम युग कहा जाता है। माइकेल मधुसूदन दत्त बंगाल में अपनी पीढ़ी के उन युवकों के प्रतिनिधि थे, जो तत्कालीन हिंदू समाज के राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन से क्षुब्ध थे और जो पश्चिम की चकाचौंधपूर्ण जीवन पद्धति में आत्मभिव्यक्ति और आत्मविकास की संभावनाएँ देखते थे। माइकेल अतिशय भावुक थे। यह भावुकता उनकी आरंभ की अंग्रेजी रचनाओं तथा बाद की बँगला रचनाओं में व्याप्त है। बँगला रचनाओं को भाषा, भाव और शैली की दृष्टि से अधिक समृद्धि प्रदान करने के लिये उन्होनें अँगरेजी के साथ-साथ अनेक यूरोपीय भाषाओं का गहन अध्ययन किया। संस्कृत तथा तेलुगु पर भी उनका अच्छा अधिकार था। मधुसूदन दत्त ने अपने काव्य में सदैव भारतीय आख्यानों को चुना किंतु निर्वाह में यूरोपीय जामा पहनाया, जैसा "मेघनाद वध" काव्य (1861) से स्पष्ट है। "वीरांगना काव्य" लैटिन कवि ओविड के हीरोइदीज की शैली में रचित अनूठी काव्यकृति है। "ब्रजांगना काव्य" में उन्होंने वैष्णव कवियों की शैली का अनुसरण किया। उन्होंने अंग्रेजी के मुक्तछंद और इतावली सॉनेट का बंगला में प्रयोग किया। चतुर्दशपदी कवितावली उनके सानेटों का संग्रह है। "हेक्टर वध" बँगला गद्य साहित्य में उनका उल्लेखनीय योगदान है। ग्रंथसूची कविताएँ कथात्मक कविताएँ King Porus: A Legend of Old (1843) The Captive Ladie (1849) Visions of the Past (1849) तिलोत्तमासंभव काव्य (1860) — তিলোত্তমাসম্ভব কাব্য महाकाव्य मेघनादवध काव्य (1861) — মেঘনাদবধ কাব্য हेक्टर वध (1871) — হেক্‌টর বধ The Upsori: A Story from Hindu Mythology (1942) गीतात्मक कविताएँ ब्रजांगना काव्य (1861) — ব্রজাঙ্গনা কাব্য पत्रात्मक कविताएँ वीरांगना काव्य (1861) — বীরাঙ্গনা কাব্য सॉनेट चतुर्दशपदी कवितावली (1866) — চতুর্দ্দশপদী কবিতাবলী अन्य दुःखेर हेतु (1908) — দুঃখের হেতু विविध काव्य (1940) — বিবিধ কাব্য Collected Poems (1942) नाटक पद्य नाटक Rizia: Empress of Inde (1849) ऐतिहासिक नाटक Nil Darpan, or The Indigo Planting Mirror (1861) — নীলদর্পণ माया-कानन (1878) — মায়া-কানন पौराणिक नाटक शर्मिष्ठा नाटक/Sermisṭá (1859) — শর্ম্মিষ্ঠা নাটক प्रहसन/हास्य नाटक Ratnavali (1858) एकेइ कि बले सभ्यता? ("क्या इसे सभ्यता कहते हैं?"; 1862) — একেই কি বলে সভ্যতা? बूड़ोशालिकेर घाड़े रों ("बूढ़ी मैना की गर्दन के पंख"; 1883) — বুড়সালিকের ঘাড়ে রোঁ त्रासदियाँ कृष्णकुमारी नाटक (1875) — কৃষ্ণকুমারী নাটক निबंध The Anglo-Saxon and the Hindu (1854) On Poetry, Etc. An Essay A Synopsis of the Rukmiṇīharaṇ Nāṭak सन्दर्भ श्रेणी:लेखक श्रेणी:बांग्ला साहित्यकार