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अल-हुरक़ा
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अल-हुरक़ा (हिन्द बिन्त अल-नुमान) الحرقة छठी शताब्दी ई॰ अल-हीरा सातवीं शताब्दी ई॰ ईसाई धर्म (पूर्व का चर्च) लखमीद राजवंश अल-नुमान तृतीय इब्न अल-मुन्ज़िर पूर्व-इस्लामी अरबी कवयित्री, लखमीद राजकुमारी
अल-हुरक़ा (अंग्रेज़ी: Al-Hurqah; अरबी: الحرقة), जिन्हें मुख्य रूप से हिन्द बिन्त अल-नुमान (Hind bint al-Nu'man) के नाम से भी जाना जाता है, एक पूर्व-इस्लामी अरब ईसाई राजकुमारी और एक प्रसिद्ध कवयित्री थीं। वे इराक के प्राचीन शहर अल-हीरा (Al-Hirah) के अंतिम लखमीद (Lakhmid) राजा, अल-नुमान तृतीय इब्न अल-मुन्ज़िर की पुत्री थीं। मध्यकालीन अरबी साहित्य और इतिहास में उनका स्थान अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। उन्हें मुख्य रूप से उनके परिवार के पतन के पश्चात् एक नन (ईसाई संन्यासिनी) के रूप में बिताए गए जीवन, उनकी शोकपूर्ण कविताओं और शास्त्रीय अरबी साहित्य में उनके ऐतिहासिक उल्लेखों के लिए जाना जाता है।Sindawi, Khalid (2022). Pre-Islamic Arab Christian Poetesses: The Biography and Poetry of Hind bint al-Nuʿmān (The Nun of Grief, and the Princess of al-Ḥuraqa). AL-Majma, (17), 63–112.
प्रारंभिक जीवन और शाही पृष्ठभूमि
अल-हुरक़ा का जन्म छठी शताब्दी ई॰ में अल-हीरा के शाही दरबार में हुआ था, जो उस समय अरब संस्कृति, व्यापार और ईसाई धर्म का एक बहुत बड़ा केंद्र था। उनका परिवार 'पूर्व के चर्च' (Church of the East) का अनुयायी था, जिसे ऐतिहासिक दस्तावेजों में अक्सर नेस्टोरियन (Nestorian) कहा गया है।Brock S. P. The Nestorian Church: a lamentable misnomer http://www.manchesterhive.com/view/journals/bjrl/78/3/article-p23.xml Bulletin of the John Rylands Library 78 3 23–35 10.7227/BJRL.78.3.3 2054-9326 एक शाही राजकुमारी के रूप में, उन्होंने उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त की थी और उन्हें तत्कालीन अरबी साहित्य और कविता का गहरा ज्ञान था।
मध्यकालीन दरबारी कविता (Court Poetry) के परिदृश्य में महिलाओं की उपस्थिति अत्यंत सीमित हुआ करती थी, परंतु अल-हुरक़ा ने अपनी साहित्यिक प्रतिभा से इस क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई।Ali Samer M. “Medieval Court Poetry,” Oxford Encyclopedia of Islam and Women. Oxford: Oxford University Press. Vol. 1, pp. 651-654. https://www.academia.edu/5023780/_Medieval_Court_Poetry_Oxford_Encyclopedia_of_Islam_and_Women_Oxford_Oxford_University_Press_Vol_1_pp_651_654 Academia edu
साम्राज्य का पतन और संन्यास
सातवीं शताब्दी ई॰ की शुरुआत में उनके पिता के शासन का दुखद अंत हो गया, जब सस्सानी साम्राज्य (Sasanian Empire) के राजा ने अल-हीरा पर आक्रमण किया और उनके पिता की हत्या कर दी। इस राजनीतिक उथल-पुथल ने अल-हुरक़ा के जीवन को पूरी तरह से बदल दिया। अपने शाही परिवार के पतन और राज्य के विनाश के पश्चात्, उन्होंने सांसारिक सुखों और जीवन का पूर्ण रूप से त्याग कर दिया और एक ईसाई नन का एकांत जीवन अपना लिया।https://books.google.co.in/books?id=SdrtpZQphYUC&redir_esc=y The History of al-Ṭabarī Vol. 5: The Sāsānids, the Byzantines, the Lakmids, and Yemen al-Ṭabarī Abū Jaʿfar Muḥammad ibn Jarīr 1999-11-04 SUNY Press 978-0-7914-9722-7 en
एक मठ (Monastery) में रहते हुए, उन्होंने अपना शेष जीवन ईश्वर की प्रार्थना और साहित्य रचना में व्यतीत किया। इसी अवधि में उनकी काव्य प्रतिभा सबसे अधिक निखर कर सामने आई। उनकी कविताओं में मुख्य रूप से उनके खोए हुए राज्य का दुख, जीवन की नश्वरता और भाग्य के क्रूर मोड़ों का मार्मिक चित्रण मिलता है। उनके इन शोकगीतों के कारण ही अरबी साहित्य में उन्हें 'शोक की नन' (The Nun of Grief) की उपाधि दी गई। उनकी कविताएँ पूर्व-इस्लामी अरब महिलाओं की बौद्धिक क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।Hamad Alajmi, 'Pre-Islamic Poetry and Speech Act Theory: Al-A'sha, Bishr ibn Abi Khazim, and al-Ḥujayjah' (unpublished Ph.D. thesis, Indiana University, 2012), pp. 165-66.
ऐतिहासिक मुलाक़ातें और साहित्यिक विरासत
जब प्रारंभिक मुस्लिम सेनाओं ने इराक और अल-हीरा के क्षेत्रों पर विजय प्राप्त की, तब अल-हुरक़ा के विषय में कई ऐतिहासिक विवरण सामने आते हैं। इस्लामी स्रोतों के अनुसार, मुस्लिम सेनापतियों ने उनका अत्यंत सम्मान किया और उन्हें सुरक्षा प्रदान की। इन मुलाकातों के दौरान जब उनसे उनके अतीत के विषय में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत ही दार्शनिक उत्तर दिए थे। अल-हुरक़ा ने जो भाषण दिए, वे अरबी गद्य साहित्य में उनकी वाक्पटुता, नियतिवाद (Fatalism) और गरिमा के उत्कृष्ट उदाहरण माने जाते हैं।
शास्त्रीय अरबी साहित्य में अल-हुरक़ा का उल्लेख कुछ अन्य सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों में भी मिलता है। प्रसिद्ध साहित्यिक विद्वान सहर आमेर (Sahar Amer) के शोध के अनुसार, कुछ शास्त्रीय कथाओं में अल-हुरक़ा और एक अन्य समकालीन महिला के बीच अत्यंत गहरे संबंधों का वर्णन किया गया है, जो मध्यकालीन अरब समाज में महिलाओं के बीच के जटिल संबंधों और समलैंगिक (Lesbian-like) प्रवृत्तियों के ऐतिहासिक अध्ययन का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।Sahar Amer 2009 Medieval Arab Lesbians and Lesbian-Like Women http://muse.jhu.edu/content/crossref/journals/journal_of_the_history_of_sexuality/v018/18.2.amer.html Journal of the History of Sexuality en 18 2 215–236 10.1353/sex.0.0052 1535-3605
अल-हुरक़ा की ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्ता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि विश्व-प्रसिद्ध कथा संग्रह अरेबियन नाइट्स (The Arabian Nights) में भी उनकी कहानी को शामिल किया गया है।Ulrich Marzolph, Richard van Leeuwen und Hassan Wassouf: The Arabian Nights Encyclopedia, ABC-Clio, Santa Barbara 2004, p. 78 (ANE 140). उनका जीवन राजशाही, पतन, साहित्य और धार्मिक समर्पण की एक अत्यंत अद्वितीय गाथा है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
विकिडाटा पर अल-हुरक़ा
श्रेणी:छठी शताब्दी की महिलाएँ
श्रेणी:सातवीं शताब्दी की महिलाएँ
श्रेणी:अरबी भाषा की कवयित्रियाँ
श्रेणी:अरब ईसाई
श्रेणी:पूर्व-इस्लामी अरब