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411 समाचार
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आंग्ल-मैसूर युद्ध

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एंग्लो-मैसूर युद्ध चार युद्धों की एक शृंखला थी जो 18वीं शताब्दी के अंतिम तीन दशकों के दौरान एक तरफ मैसूर साम्राज्य और दूसरी तरफ ईस्ट इण्डिया कम्पनी (मुख्य रूप से पड़ोसी मद्रास प्रैज़िडन्सी द्वारा प्रतिनिधित्व), मराठा साम्राज्य, त्रावणकोर राज्य व हैदराबाद राज्य के बीच लड़े गए थे। हैदर अली और उनके उत्तराधिकारी पुत्र टीपू ने चार मोर्चों पर युद्ध लड़े: अंग्रेजों ने पश्चिम, दक्षिण और पूर्व से हमला किया तथा निज़ाम की सेना ने उत्तर से हमला किया।Battles of the honourable East India Company: making of the Raj https://archive.org/details/battlesofhonoura0000nara नरवणे मुकुंद श्रीधर 2006 एपीएच पब्लिकेशन्स 978-81-313-0034-3 नई दिल्ली 172–181 en ईस्ट इंडिया कंपनी की लड़ाइयाँ: राज का निर्माण युद्ध के परिणामस्वरूप हैदर अली और टीपू (चौथे युद्ध में सन् १७९९ में मारा गया) के शासन का अंत हो गया। इंडिया कंपनी के लाभ के लिए मैसूर को खत्म कर दिया गया। चार आंग्ल-मैसूर युद्ध प्रथम युद्ध प्रथम आंग्ल-मैसूर युद्धप्रथम आंग्ल-मैसूर युद्ध (1767-1769) में हैदर अली को अंग्रेजों के विरुद्ध कुछ हद तक सफलता मिली तथा वह मद्रास पर लगभग कब्ज़ा करने में सफल रहा। द्वितीय युद्ध द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्धद्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1780-1784) में अत्यधिक खूनी लड़ाइयां हुईं तथा दोनों राज्यों की किस्मत में उतार-चढ़ाव आते रहे। तृतीय युद्ध तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्धतृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (1790-1792) में, टीपू सुल्तान, जो अब फ्रांस का सहयोगी था, ने 1789 में ब्रिटिश सहयोगी, निकटवर्ती त्रावणकोर राज्य पर आक्रमण किया। चतुर्थ युद्ध चौथा आंग्ल-मैसूर युद्धचौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध (1798-1799) में टीपू सुल्तान की मृत्यु हो गई और मैसूर के क्षेत्र में और अधिक कमी आई। सन्दर्भ श्रेणी:भारत का इतिहास