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नाभिराज
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jain Parents of Tirthankara.jpg ऋषभदेव भगवान के पिता नाभिराज और माता मरूदेवी की प्रतिमा मरूदेवी ऋषभदेव
राजा नाभिराज इस काल के चौदहवें और अन्तिम कुलकर थे।Jain 1929 51-56 https://books.google.co.in/books?id=bWsAAAAAMAAJ Ādipurāṇa इनकी ऊँचाई 525 धनुष (1575 मी०) थी।"वैदिक गणित के अनुसार 1 धनुष = 5 मीटर, देखें अगला संदर्भ।"http://www.academia.edu/4451742/Units_of_Length_Measurement_and_Speed_of_Light_in_Ancient_India Units of Length Measurement and Speed of Light in Ancient India डा० एम.आर. गोयल academia.edu 30 मई 2013 21-09-2015 https://web.archive.org/web/20150919041651/http://www.academia.edu/4451742/Units_of_Length_Measurement_and_Speed_of_Light_in_Ancient_India 19 सितंबर 2015 live वे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव केे पिता थे ।
http://www.jainworld.com/jainbooks/tirthankar/first-tir.htm RISHABHDEV BHAGAVAN, THE FIRST TIRTHANKAR - 1 http://www.jainworld.com
नाभीराज के पिता का नाम मरूदेव और माता का नाम श्रीकांता (सत्या)है।मरुदेव 12वें कुलकर है।
मरुदेव के बाद उनके पुत्र प्रसेनजीत और नाभीराय कुलकर हुए ।
कुलकर
thumb|जैन कालचक्र- ३ आरा, सुखमा-दुखमा में नाभिराज हुए थे।
जैन आगम के अनुसार, समय के चक्र के दो भाग होते है: अवसर्पणी और उत्सर्पणी। अवसर्पणी में जब भोगभूमि का अंत होने लगता है, तब कल्पवृक्ष ख़त्म होने लगते है। तब १४ कुलकर जन्म लेते हैं। कुलकर अपने समय के सबसे बुद्धिमान व्यक्ति होते हैं। वह लोगों को संसारी क्रियाएँ सिखाते है।Jain 1929 55
परिचय
इनकी रानी का नाम मरुदेवी था। तीर्थंकर ऋषभदेव के जन्म से पूर्व माता मरुदेवी ने 16 स्वप्न देखे थे जिनका अर्थ राजा नाभिराज ने समझाया था।Jain 1929 51
नाभिराज ने 13 लाख वर्ष की आयु के बाद जैन मुनि बनकर मोक्ष को प्राप्त किया था।
इन्हें भी देखें
शलाकापुरुष
कुलकर
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सन्दर्भ
सन्दर्भ सूची
Risabha Deva - The Founder of Jainism Champat Rai Jain K. Mitra, The Indian Press Ltd., Allahabad 1929 https://archive.org/details/RisabhaDeva-TheFounderOfJainism
Jain Vijay K. Acarya Samantabhadra’s Svayambhustotra: Adoration of The Twenty-four Tirthankara 2015 https://books.google.co.in/books?id=xI8HBgAAQBAJ Dehradun Vikalp Printers 81-903639-7-2
श्रेणी:जैन धर्म