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ब्रह्मा
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thumb हंस पर आरूढ़ भगवान ब्रह्मा ब्रह् ब्रह्मा Brahmā हिन्दू देवता सृष्टि के रचयिता ब्रह्मलोक ॐ ब्रह्मणे नमः ।। देवेया धनुष, ब्रह्मास्त्र, वेद, जप माला सरस्वती (क्रिया शक्ति , प्रथम पत्नी , मुख्य पत्नी)
सावित्री (ज्ञान शक्ति , द्वितीय पत्नी),
गायत्री (इच्छा शक्ति , तृतीय पत्नी) , सनकादि ऋषि,नारद मुनि और दक्ष प्रजापति और सप्तर्षि आदि हंस (हन्स का नाम है हन्सकुमार) विधाता, स्वयंभू, चतुरानन आदि
ब्रह्मा सृजन के देव है। ब्राह्म, पौराणिक कथाओं में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
ये हिन्दू दर्शनशास्त्र की परम सत्य की आध्यात्मिक संकल्पना ब्रह्मन् से अलग हैं।James Lochtefeld, Brahman, The Illustrated Encyclopedia of Hinduism, Vol. 1: A–M, Rosen Publishing. ISBN 978-0823931798, page 122PT Raju (2006), Idealistic Thought of India, Routledge, ISBN 978-1406732627, page 426 and Conclusion chapter part XII ब्रह्मन् लिंगहीन हैं परन्तु ब्रह्मा पुलिंग हैं। प्राचीन ग्रंथों में इनका सम्मान किया जाता है पर इनकी पूजा बहुत (श्राप के कारण) कम होती है।http://m.khabar.ibnlive.com/news/dharm-karm/41963.html संग्रहीत प्रति 26 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20160304202841/http://m.khabar.ibnlive.com/news/dharm-karm/41963.html 4 मार्च 2016 dead Brian Morris (2005), Religion and Anthropology: A Critical Introduction, Cambridge University Press, ISBN 978-0521852418, page 123 भारत और थाईलैण्ड में इन पर समर्पित मंदिर हैं। राजस्थान के पुष्कर का ब्रह्मा मंदिरhttp://aajtak.intoday.in/story/story-of-pushkar-about-brahma-and-savitri-1-750836.html संग्रहीत प्रति 26 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20160706093919/http://aajtak.intoday.in/story/story-of-pushkar-about-brahma-and-savitri-1-750836.html 6 जुलाई 2016 live http://www.shreebrahmajimandir.com/brahma_mandir_history.html संग्रहीत प्रति 26 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20151027020454/http://www.shreebrahmajimandir.com/brahma_mandir_history.html 27 अक्तूबर 2015 dead SS Charkravarti (2001), Hinduism, a Way of Life, Motilal Banarsidass, ISBN 978-8120808997, page 15 और बैंकॉक का इरावन मंदिर (Erawan Shrine)http://www.bangkok.com/shrines/erawan-shrine.htm संग्रहीत प्रति 26 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20151020183831/http://www.bangkok.com/shrines/erawan-shrine.htm 20 अक्तूबर 2015 dead Ellen London (2008), Thailand Condensed: 2,000 Years of History & Culture, Marshall Cavendish, ISBN 978-9812615206, page 74 इसके उदाहरण हैं।
ब्रह्मा जी आयु
श्रीमद्भागवत के अनुसार ब्रह्मा जी का 51 वां वर्ष चल रहा हैब्रह्मा जी आयु Srimad Bhagavat Mahapuran https://archive.org/details/srimad-bhagavat-mahapuran-2-volume-set-sanskrit-hindi/Srimad%20Bhagavat%20Mahapuran%20Volume%201%20Sanskrit%20Hindi/page/n479/mode/2up?sort=title_asc Canto 3 Chap 11 Verse 34, 100 वर्ष आयु भगवान ब्रह्मा की बताई गई है। संसार में तीनों देवताओं को अजर-अमर बताया गया है जबकि वास्तविकता कुछ ओर है, ब्रह्मा जी कुल आय (सात करोड़ बीस लाख) चतुर्युग बताई गई है, ब्रह्मा जी के एक दिन में 14 इन्द्रों का शासन काल समाप्त हो जाता है। एक इंद्र का शासन काल बहत्तर चतुर्युग का होता है। इसलिए वास्तव में ब्रह्मा जी का एक दिन (72 गुणा 14) = 1008 चतुर्युग का होता है तथा इतनी ही रात्रि, परन्तु इस को एक हजार चतुर्युग मानकर चलते हैं। 1 महीना = 30 गुणा 2000 = 60000 (साठ हजार) चतुर्युग. 1 वर्ष = 12 गुणा 60000 = 720000 (सात लाख बीस हजार) चतुर्युग की। 100 वर्ष = 100 गुण 720000 = 72000000 (सात करोड़ बीस लाख चतुर्युग) इस प्रकार जब ब्रह्मा जी के 100 वर्ष पूरे हो जाते हैं तब वे अपना शरीर छोड़ देते हैं ब्रह्मा जी की आयु पूरी होने पर उनकी मृत्यु हो जाती है अत: फिर ब्रह्मा के पद पर ब्रह्म द्वार किसी और को नियुक्त किया जाता है
अंगूठाकार
व्युत्पत्ति
thumb|कर्नाटक के सोमनाथपुरा में १२ वीं शताब्दी के चेनाकेस्वा मंदिर में ब्रह्मा की मूर्ति।
हिंदू त्रिमूर्ति में भगवान ब्रह्मा इक्कीस ब्रह्मांडो के स्वामी है। भगवान ब्रह्मा,सृष्टि के तीन गुणों सत्व रजस् और तमस् में से रजस् गुण प्रधान है। इसी प्रकार, भगवान विष्णु सतोगुण और भगवान शिव तमोगुण प्रमुख हैं।
क्षात्र धर्म की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा क्षत्रियों के पुत्र है और उनके १० पुत्रों को जन्म दिया जिन्हें मानसपुत्र कहा जाता है। भागवत पुरान के अनुसार ये मानसपुत्र ये हैं- अत्रि, अंगरिस, पुलस्त्य, मरीचि, पुलह, क्रतु, भृगु, वसिष्ठ, दक्ष, और नारद हैं। इन ऋषियों को प्रजापति भी कहते हैं।
इतिहास
वैदिक साहित्य
विष्णु और शिव के साथ ब्रह्मा के सबसे पुराने उल्लेखों में से एक पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व में लिखित मैत्रायणी उपनिषद् के पांचवे पाठ में है। ब्रह्मा का उल्लेख पहले कुत्सायना स्तोत्र कहलाए जाने वाले छंद ५.१ में है। फिर छंद ५.२ इसकी व्याख्या करता है।Robert Ernest Hume The Thirteen Principal Upanishads Oxford University Press 1921 422–424EB Cowell (Translator), Cambridge University, Bibliotheca Indica, page 255-256
सर्वेश्वरवादी कुत्सायना स्तोत्र कहता है कि हमारी आत्मा ब्रह्मन् है और यह परम सत्य या ईश्वर सभी प्राणियों के भीतर मौजूद है। यह आत्मा का ब्रह्मा और उनकी अन्य अभिव्यक्तियों के साथ इस प्रकार समीकरण करता है: तुम ही ब्रह्मा हो, तुम ही विष्णु हो, तुम ही रूद्र (शिव) हो, तुम ही अग्नि, वरुण, वायु, इंद्र हो, तुम सब हो।Max Muller, The Upanishads, Part 2, Maitrayana-Brahmana Upanishad https://web.archive.org/web/20160311103600/https://archive.org/stream/upanishads02ml#page/302/mode/2up 11 मार्च 2016 , Oxford University Press, pages 303-304
छंद ५.२ में विष्णु और शिव की तुलना गुण की संकल्पना से की गई है। यह कहता है कि ग्रन्थ में वर्णित गुण, मानस और जन्मजात प्रवृत्तियां सभी प्राणियों में होती हैं।Jan Gonda (1968), The Hindu Trinity, Anthropos, Vol. 63, pages 215-219 मैत्री उपनिषद का यह अध्याय दावा करता है कि ब्रह्माण्ड अंधकार (तमस) से उभरा है। जो पहले आवेग (रजस) के रूप में उभरा था पर बाद में पवित्रता और अच्छाई (सत्त्व) में बदल गया। फिर यह ब्रह्मा की तुलना रजस से इस प्रकार करता है:Paul Deussen, Sixty Upanishads of the Veda, Volume 1, Motilal Banarsidass, ISBN 978-8120814684, pages 344-346
फिर उसका वो भाग जो तमस है, हे पवित्र ज्ञान के विद्यार्थियों (ब्रह्मचारी), रूद्र है।
उसका वो भाग जो रजस है, हे पवित्र ज्ञान के विद्यार्थियों, ब्रह्मा है।
उसका वो भाग जो सत्त्व है, हे पवित्र ज्ञान के विद्यार्थियों, विष्णु है।
वास्तव में वो एक था, वो तीन बन गया, आठ, ग्यारह, बारह और असंख्य बन गया।
यह सबके भीतर आ गया, वो सबका अधिपति बन गया।
यही आत्मा है, भीतर और बाहर, हाँ भीतर और बाहर। मैत्री उपनिषद ५.२
हालांकि मैत्री उपनिषद ब्रह्मा की तुलना हिन्दू धर्म के गुण सिद्धांत के एक तत्व से करता है, पर यह उन्हें त्रिमूर्ति का भाग नहीं बताता है। त्रिमूर्ति का उल्लेख बाद के पुराणिक साहित्य में मिलता है।GM Bailey (1979), Trifunctional Elements in the Mythology of the Hindu Trimūrti https://web.archive.org/web/20160317123213/http://www.jstor.org/stable/3269716 17 मार्च 2016 , Numen, Vol. 26, Fasc. 2, pages 152-163
पौराणिक साहित्य
भागवत पुराण में कई बार कहा गया है कि ब्रह्मा वह है जो "कारणों के सागर" से उभरता है।.Richard Anderson (1967), Hindu Myths in Mallarmé: Un Coup de Dés https://web.archive.org/web/20151208115534/http://www.jstor.org/stable/1769398 8 दिसंबर 2015 , Comparative Literature, Vol. 19, No. 1, pages 28-35 यह पुराण कहता है कि जिस क्षण समय और ब्रह्माण्ड का जन्म हुआ था, उसी क्षण ब्रह्मा हरि (विष्णु, जिनकी प्रशंसा भागवत पुराण का मुख्य उद्देश्य है) की नाभि से निकले एक कमल के पुष्प से उभरे थे। यह पुराण कहता है कि ब्रह्मा निद्रा में हैं, गलती करते हैं और वे ब्रह्माण्ड की रचना के समय अस्थायी रूप से अक्षम थे। जब वे अपनी भ्रान्ति और निद्रा से अवगत हुए तो उन्होंने एक तपस्वी की तरह तपस्या की, हरि को अपने हृदय में अपना लिया, फिर उन्हें ब्रह्माण्ड के आरंभ और अंत का ज्ञान हो गया, और फिर उनकी रचनात्मक शक्तियां पुनर्जीवित हो गईं। भागवत पुराण कहता है कि इसके बाद उन्होंने प्रकृति और पुरुष: को जोड़ कर चकाचौंध कर देने वाली प्राणियों की विविधता बनाई।
भागवत पुराण माया के सृजन को भी ब्रह्मा का काम बताता है। इसका सृजन उन्होंने केवल सृजन करने की खातिर किया। माया से सब कुछ अच्छाई और बुराई, पदार्थ और आध्यात्म, आरंभ और अंत से रंग गया।Richard Anderson (1967),
Hindu Myths in Mallarmé: Un Coup de Dés https://web.archive.org/web/20151208115534/http://www.jstor.org/stable/1769398 8 दिसंबर 2015 , Comparative Literature, Vol. 19, No. 1, page 31-33
पुराण समय बनाने वाले देवता के रूप में ब्रह्मा का वर्णन करते हैं। वे मानव समय की ब्रह्मा के समय के साथ तुलना करते हैं। वे कहते हैं कि महाकल्प (जो कि एक बहुत बड़ी ब्रह्मांडीय अवधि है) ब्रह्मा के एक दिन और एक रात के बराबर है।Frazier Jessica The Continuum companion to Hindu studies 2011 Continuum London 978-0-8264-9966-0 72
ब्रह्मा के बारे में विभिन्न पुराणों की कथाएँ विविध और विसंगत हैं। उदाहरण के लिए स्कन्द पुराण में पार्वती को "ब्रह्माण्ड की जननी" कहा गया है। यह ब्रह्मा, देवताओं और तीनों लोकों को बनाने का श्रेय भी पार्वती को देता है। यह कहता है कि पार्वती ने तीनों गुणों (सत्त्व, रजस और तपस) को पदार्थ (प्रकृति) में जोड़ कर ब्रह्माण्ड की रचना की।Nicholas Gier (1997), The Yogi and the Goddess, International Journal of Hindu Studies, Vol. 1, No. 2, pages 279-280
पौराणिक और तांत्रिक साहित्य ब्रह्मा के रजस गुण वाले देव के वैदिक विचार को आगे बढ़ाता है। यह कहता है कि उनकी पत्नी सरस्वती में सत्त्व (संतुलन, सामंजस्य, अच्छाई, पवित्रता, समग्रता, रचनात्मकता, सकारात्मकता, शांतिपूर्णता, नेकता गुण) है। इस प्रकार वे ब्रह्मा के रजस (उत्साह, सक्रियता, न अच्छाई न बुराई पर कभी-कभी दोनों में से कोई एक, कर्मप्रधानता, व्यक्तिवाद, प्रेरित, गतिशीलता गुण) को अनुपूरण करती हैं।H Woodward (1989), The Lakṣmaṇa Temple, Khajuraho and Its Meanings, Ars Orientalis, Vol. 19, pages 30-34Alban Widgery (1930), The principles of Hindu Ethics, International Journal of Ethics, Vol. 40, No. 2, pages 234-237Joseph Alter (2004), Yoga in modern India, Princeton University Press, page 55
ब्रह्मा के अवतार
विष्णुपुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में ब्रह्मा के सात अवतारों का वर्णन है और रामायण के जामवंत जी को भी ब्रह्मा का अंश कहा गया है।
महर्षि वाल्मीकि
महर्षि कश्यप
महर्षि बछेस
चंद्रदेव
बृहस्पति
कालिदास
महर्षि खट
जामवंत
इन्हें भी देखें
ब्रह्म
पुराण
श्रेणी:हिन्दू देवता
श्रेणी:सृष्टा देवता