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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

गाय

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right|thumb|300px|भारत में गोपालन को एक पवित्र कार्य माना जाता है। गाय (Cow) एक महत्त्वपूर्ण पालतू पशु है, जो संसार के लगभग सभी हिस्सों में पाई जाती है। यह उत्तम गुणवत्ता वाले दूध का प्रमुख स्रोत है। भारत में वैदिक काल से ही गाय का गहरा सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक महत्व रहा है। प्राचीन काल में गाय का उपयोग विनिमय (लेन-देन) के माध्यम के रूप में भी होता था, और किसी व्यक्ति की समृद्धि का आकलन उसके पास मौजूद गायों की संख्या से किया जाता था।https://www.britannica.com/topic/sanctity-of-the-cow Sanctity of the cow Hinduism, Religious Significance & Cultural Impact Britannica Encyclopedia Britannica 2026-04-10 en हिन्दू धर्म में गाय को 'माता' (गौमाता) का दर्जा प्राप्त है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसके नर बछड़े (बैल) बड़े होकर गाड़ी खींचने और खेतों की जुताई करने जैसे कृषि कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रजनन और शारीरिक चक्र प्रजनन काल: वर्षभर। मद चक्र (Heat period): गाय में हर 21 दिन में मद चक्र आता है (ब्याने के 30 से 60 दिन बाद)। मदकाल की अवधि: 12 से 36 घंटे तक। गर्भकाल: गाय का गर्भकाल लगभग 283 से 290 दिनों का होता है।https://www.icar.org.in/en/product/22 Handbook of Animal Husbandry ICAR www.icar.org.in 2026-04-10 भारतीय गाय की विशेषताएँ भारतीय गायों (ज़ेबू / Zebu / Bos indicus) की दो प्रमुख शारीरिक विशेषताएँ होती हैं:https://www.fao.org/4/t0582e/T0582E02.htm Strategies for sustainable animal agriculture in developing countries www.fao.org 2026-04-10 1. पीठ पर एक स्पष्ट और सुन्दर कूबड़ (Hump)। 2. गर्दन के नीचे लटकती हुई त्वचा, जिसे गलकंबल (Dewlap) कहा जाता है। भारत में गाय की 30 से अधिक मान्यता प्राप्त नस्लें हैं।https://www.nddb.coop/hi/services/animalbreeding/geneticimprovement/breeds नस्‍लें nddb.coop www.nddb.coop 2026-04-10 उपयोगिता के आधार पर भारतीय गायों को मुख्य रूप से तीन वर्गों में बाँटा जाता है: दुधारू नस्लें: जो प्रचुर मात्रा में दूध देती हैं (जैसे- साहीवाल, सिंधी, गिर)। भारवाही नस्लें (कर्मठ): जो दूध कम देती हैं, लेकिन इनके बछड़े कृषि और बोझा ढोने के काम में उत्कृष्ट होते हैं (जैसे- नागौरी, मालवी)। द्विप्रयोजनी नस्लें (सर्वांगी): जो अच्छा दूध भी देती हैं और इनके बैल खेती के लिए भी मजबूत होते हैं (जैसे- हरियाना, कांकरेज, थारपारकर)। भारत की कुछ प्रमुख नस्लें साहीवाल: मुख्य रूप से पंजाब, राजस्थान और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में पाई जाने वाली यह भारत की बेहतरीन दुधारू नस्लों में से एक है। इसके दूध में वसा (Fat) की अच्छी मात्रा होती है। सिंधी: मूल रूप से सिंध (वर्तमान पाकिस्तान) के कोहिस्तान क्षेत्र की यह नस्ल बादामी या गेहुँए रंग की होती है। इनमें विभिन्न जलवायु परिस्थितियों को सहने और रोगों से लड़ने की अद्भुत क्षमता होती है। काँकरेज: यह सर्वांगी नस्ल गुजरात के कच्छ, काठियावाड़ और राजस्थान के सांचोर क्षेत्र (जहाँ इसे 'सांचोरी गाय' भी कहते हैं) में पाई जाती है। ये अपनी अनोखी 'सवाई चाल' के लिए जानी जाती हैं। मालवी: मध्य प्रदेश के मालवा क्षेत्र की इस नस्ल के बछड़े बेहद मजबूत होते हैं, जो कृषि कार्यों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। नागौरी: राजस्थान के जोधपुर और नागौर के आस-पास पाई जाने वाली इस नस्ल के बैल भारवाहन और खेती के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं। थारपारकर: राजस्थान (जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर) और सिंध के रेगिस्तानी क्षेत्रों की यह नस्ल कम चारे और विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छा दूध देने के लिए जानी जाती है। हरियाना: रोहतक, हिसार, सिरसा और गुरुग्राम (गुडगाँव) क्षेत्रों में पाई जाने वाली यह एक बेहतरीन द्विप्रयोजनी नस्ल है। इनका रंग आमतौर पर सफेद या हल्का भूरा होता है। गीर (गिर): गुजरात के गीर जंगलों की मूल निवासी यह गाय भारत की सबसे उत्कृष्ट दुधारू नस्लों में गिनी जाती है। राठी: राजस्थान के बीकानेर और श्रीगंगानगर क्षेत्रों में मिलने वाली यह नस्ल अलग-अलग तरह की जलवायु में खुद को आसानी से ढाल लेती है। विदेशी नस्ल की गाएँ विदेशी नस्ल की गाएँ (Bos taurus), जैसे कि जर्सी (Jersey) और होल्स्टीन-फ्रीज़ियन (Holstein Friesian), यूरोपीय और अमेरिकी मूल की हैं। ये मुख्य रूप से अपने अत्यधिक दुग्ध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं। चूँकि इनका विशुद्ध रूप से भारतीय जलवायु में पालन करना मुश्किल होता है, इसलिए दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए अक्सर भारतीय नस्लों के साथ इनका संकरण (Crossbreeding) कराया जाता है। भारतीय गायों (Bos indicus) की तुलना में इन विदेशी नस्लों की पीठ एकदम सपाट होती है और इनमें कूबड़ (Hump) का अभाव होता है।https://www.sciencedirect.com/topics/biochemistry-genetics-and-molecular-biology/taurine-cattle Taurine Cattle - an overview ScienceDirect Topics www.sciencedirect.com 2026-04-10 वैश्विक स्तर पर गायों की आबादी पूरी दुनिया में डेयरी और मांस उद्योग के लिए गोवंश का बड़े पैमाने पर पालन किया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के आँकड़ों के अनुसार, भारत, ब्राज़ील और चीन दुनिया के सबसे बड़े गोवंश आबादी वाले देश हैं।https://www.fao.org/faostat/en/#data/QCL FAOSTAT www.fao.org 2026-04-10 + प्रमुख देशों में गोवंश की आबादी (2009 के अनुमानित आँकड़े) रैंक देश / क्षेत्र गायों की कुल संख्या संख्या (करोड़ में) 1 भारत 281,700,000 28.17 2 ब्राज़ील 187,087,000 18.70 3 चीन 139,721,000 13.97 4 संयुक्त राज्य अमेरिका 96,669,000 9.66 5 यूरोपीय संघ 87,650,000 8.76 6 अर्जेंटीना 51,062,000 5.10 7 ऑस्ट्रेलिया 29,202,000 2.92 हिन्दू धर्म में महत्व हिन्दू धर्म में गाय को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। भागवत पुराण व अन्य हिन्दू ग्रंथों के अनुसार, समुद्र मन्थन के समय दिव्य कामधेनु की उत्पत्ति हुई थी। हिन्दू मान्यताओं में यह विश्वास किया जाता है कि गाय के भीतर 33 कोटि (प्रकार) के देवी-देवताओं का वास होता है। हिन्दू संस्कारों और यज्ञों में गाय के दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर से निर्मित पंचगव्य का विशेष आध्यात्मिक और औषधीय महत्व है। कार्तिक शुक्ल अष्टमी के दिन हिन्दू धर्म में गो-पूजन का पर्व गोपाष्टमी के रूप में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।https://books.google.co.in/books/about/Sacred_cows_sacred_places.html?id=-JXX-k034nwC&redir_esc=y Sacred Cows, Sacred Places: Origins and Survivals of Animal Homes in India Lodrick Deryck O. 1981 University of California Press 978-0-520-04109-7 15-25 en सन्दर्भ इन्हें भी देखें पंचगव्य गोमूत्र कामधेनु पशुपालन बाहरी कड़ियाँ भारत सरकार - पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) की आधिकारिक वेबसाइट श्रेणी:गोवंश श्रेणी:स्तनधारी श्रेणी:भारत के पशु * श्रेणी:पालतू जानवर