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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

भांगरे वंश

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भांगरे महाराष्ट्र मे पाई जाने वाली कोली जाती का गोत्र (वंश) है। ब्रिटिश कालीन कुछ दस्तावेजों मे भांगरे शब्द को कभी-कभी भांगरिया भी लिखा गया है। भांगरे गोत्र के कोली मराठा काल से लेकर ब्रिटिश काल तक अपनी मौजूदगी दाख़िल करते आए हैं। भांगरे कोलीयों ने पेशवा के खिलाफ, हैदराबाद के निज़ाम, अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए थे। भांगरे एवं भांगरिया File:Jawhar flag.svg कोलीयों की जव्हार रियासत का ध्वज File:Statue of Naik Raghoji Rao Bhangre in Akola, Maharashtra.jpg स्वतंत्रता सेनानी नाईक राघोजी राव भांगरे महाराष्ट्र, गोवा, हैदराबाद मराठी भाषा, कोंकणी भाषा, वर्हाडी बोली, आगरी बोली, मालवनी बोली हिन्दू मराठा साम्राज्य मे भांगरे कोली नायक और सरदार भी थे। लेकिन उनका उल्लेख मुख्यत विरोधी के रुप मे ही मिला है। thumb|राघोजी भांगरे जयंती २००७ महाराष्ट्र पुलिस|1000px इतिहास एवं विद्रोह thumb|राघोजी भांगरे की प्रतिमा अहमदनगर, महाराष्ट्र|500px भांगरे कोलीयों ने काफी उद्दंड इतिहास बनाया है क्योंकि वो हमेसा से लगते ही आए है। जिनमे से एक तो यह है की १७६१ गामाजी भांगरे नाम के एक साधारण से कोली ने हैदराबाद के निज़ाम के खिलाफ मोर्चा खोला था। गामाजी भांगरे ने अन्य कोलीयों के सिथ मिलकर निज़ाम से ट्रिम्बक किला छीन लिया और पेशवा के हवाले कर दिया फलस्वरूप ने काफी प्रशंसा की पेशवा ने भांगरे को काफी जमीन दी और देशमुख की उपाधि से सम्मानित किया।https://books.google.co.in/books/about/Histories_for_the_subordinated.html?id=b49uAAAAMAAJ&redir_esc=y Histories for the subordinated Hardiman David 2006 Permanent Black 978-81-7824-099-2 enhttps://books.google.co.in/books?id=tbQIAAAAQAAJ&dq=gamaji+kolis&source=gbs_navlinks_s Gazetteer of the Bombay Presidency: Ahmadnagar 1884 Government Central Press en १७७६ मे खोड भांगरे नाम के एक कोली ने जावजी बोमले के साथ मिलकर पेशवा से तीन किले छीन लिए जो बाद मे इंदौर के महाराजा तूकोजी होलकर के कहने पर बापिस लोटा दिए।https://books.google.co.in/books?id=GSa5blriOYcC&dq=khod+bhangare&source=gbs_navlinks_s Environment and Ethnicity in India, 1200-1991 Guha Sumit 2006-11-02 Cambridge University Press 978-0-521-02870-7 enhttps://books.google.co.in/books?id=LOMBAAAAMAAJ The Indian Historical Quarterly 1939 Calcutta Oriental Press en १७९८ मे वालोजी भांगरे नाम के कोली ने अपने दो भाई मानाजी भांगरे और गोविंदजी भांगरे के साथ मिलकर पेशवा के विरुद्ध हथियार उठाए और तीनो भाईयों को मार दिया गया। वालोजी भांगरे को जुन्नर के सूबेदार ने तोप से उड़ा दिया था जिसके बाद वालोजी के भतीजे और मानाजी के बेटे रामजी भांगरे ने विद्रोह को व्यापक रुप दे दिया और पेशवा की सारी व्यवस्था हिला के रख दि।https://books.google.co.in/books?id=QNA-AQAAIAAJ Histories for the Subordinated Hardiman David 2007 Seagull Books 978-1-905422-38-8 en १८१८ मे ब्रिटिश सरकार से मराठाओं के हार जाने के बाद रामजी भांगरे ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हल्ला बोल दिया। रामजी एक क्रांतिकारी के रूप में उभरा और रामजी को ब्रिटिश सरकार ने काले पानी की सजा सुनाई और अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह पर स्थित सेल्यूलर जेल मे भेज दिया।https://books.google.co.in/books?id=lYSd-3yL9h0C&dq=ramji+bhangria&source=gbs_navlinks_s The Castes and Tribes of H.E.H. the Nizam's Dominions Hassan Syed Siraj ul 1989 Asian Educational Services 978-81-206-0488-9 en 22 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20190331154217/https://books.google.co.in/books?id=lYSd-3yL9h0C 31 मार्च 2019 livehttps://books.google.co.in/books?id=6T-6AAAAIAAJ Fields and farmers in western India, 1850-1950 Nand Brahma 2003 Bibliomatrix en १८४४ मे रामजी के बेटे बापूजी भांगरे ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाए। बापूजी ने ब्रिटिश अधिक्रत क्षेत्रों मे हमला किया और सरकारी खजाने को लूट लिया। १८४५ मे कैप्टन गिवर्न के नेतृत्व मे अंग्रेजी सेना ने हमला किया और फांसी की सज़ा सुनाई गई।https://books.google.co.in/books?id=8EsfAQAAIAAJ Feeding the Baniya: Peasants and Usurers in Western India Hardiman David 1996 Oxford University Press 978-0-19-563956-8 en इसके बाद सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी राघोजी भांगरे ने अंग्रेजों की कमर तोड के रख दी। राचोजी ने सतारा रियासत के शासक छत्रपति प्रतापसिंहजी भोंसले को सतारा की राजगद्दी पर पुनःस्थापित करने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राघोजी भांगरे ने अंग्रेजों का साथ दे रहे वनिया, पारसी और तेली लोगों के कान और नाक काट दिए थे। अंग्रेजी सरकार ने राघोजी पर ५००० का इनाम घोषित किया था जिंदा या मुर्दा। २ मई १८४८ को ब्रिटिश सरकार ने राघोजी भांगरे को फांसी दे दी।https://books.google.co.in/books?id=PFY9fz68KEsC&dq=Raghuji+Bahngre&source=gbs_navlinks_s Mahatma Jotirao Phooley: Father of the Indian Social Revolution Keer Dhananjay 1997 Popular Prakashan 978-81-7154-066-2 en संदर्भ