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चैत्रगौरी
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हिन्दू चैत्रगौरी आणि सजावट.jpg हिन्दू चैत्र शुक्ल तृतीयासे वैशाख शुक्ल तृतीया तक अप्रैल १ महीना व्रत चैत्रगौरी
चैत्रगौरी यह महाराष्ट्र में किया जानेवाला प्रसिद्ध व्रत है। महिला एवं युवती यह व्रत ; त्योहार के स्वरूप में मनाती है।Mahārāshṭra, loka saṃskr̥ti va sāhitya बाबर सरोजिनी Neśanala Buka Ṭrasṭa, Iṇḍiyā, - Maharashtra (India) 1987
स्वरूप
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथीसे इस व्रत की शुरुआत होती है। वैशाख महिनेकीं तृतीय तिथी तक यह व्रत किया जाता है। इस व्रतका मुख्य उपचार है गौरी देवीको झुलेमें स्थापित करना और एक महीना उनकी पूजा करना।http://marathi.webdunia.com/article/gudipadwa-marathi/chitra-navratra-115032500013_1.html चैत्र गौरी पूजन https://web.archive.org/web/20180919061944/http://marathi.webdunia.com/article/gudipadwa-marathi/chitra-navratra-115032500013_1.html 19 सितंबर 2018 dead
व्रत का स्वरूप
झुलेमें बैठी देवी गौरी के पूजा हेतू कच्चे आमका शरबत और चनेकी दालसे बना हुआ भोग ख़ास तौरसे बनाया जाता है। वसंत ऋतुमें जो फल मिलते है वह देवीको भोगके स्वरूपमें चढ़ाए जाते है। विवाहित महिला को भोजनमें निमंत्रित किया जाता है। हल्दी, कुमकुम और चंदन लगाकर इस महिलाके देवीस्वरूप पूजा की जाती है। शामके समय पड़ोसी महिलाओंको निमन्त्रित किया जाता है और उन्हें हल्दी कुमकुम लगाकर कच्चे आमका शरबत दिया जाता है। https://www.bhaskar.com/mp/ujjain/news/mp-ujj-c-11-65425-nor.html महाराष्ट्रीयन महिलाओं ने मनाया चैत्र गौरी उत्सव २८. ४. २०१३ https://web.archive.org/web/20180919132748/https://www.bhaskar.com/mp/ujjain/news/mp-ujj-c-11-65425-nor.html 19 सितंबर 2018 liveभीगे हुए चने उन्हें भेट दिए जाते है। देवीका वर्णन करनेवाले भक्तिपूर्ण गीत गाएँ जाते है।भारत की लोक संस्कृति
रंगोली
इस व्रतके अवसर पर महाराष्ट्र में नई नवेली दुल्हन पाँच साल तक अपने आंगनमें है विशिष्ट रंगोली बनाती है। उसे चैत्रागण नामसे संबोधित किया जाता है। इस रंगोलीमें भारतवर्ष के त्यौहार तथा भारतीय संस्कृतिके प्रतीक चित्रित किये जाट है। स्वस्तिक, ओमकार, तुलसी का पौधा, गाय के चरण चिह्न , गणेशजी , कृष्ण भगवान, चंद्र, सूर्य इनके चित्र इस रंगोलीमें बनाए जाते है।
यह भी देखिए
चैत्र मास
देवी पार्वती
बाहरी कड़ियाँ
चित्रदालन
सन्दर्भ