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पाणिनि कन्या महाविद्यालय
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मार्च 2026
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पाणिनि कन्या महाविद्यालय वाराणसी में स्थित एक महाविद्यालय है जो गुरुकुल पद्धति से संचालित है। यह एक आवासीय महाविद्यालय है। यहाँ की दिनचर्या खान-पान, रहन-सहन पूर्णतः गुरुकुलीय हैं। भारत के सभी प्रान्तों की कन्यायें शताधिक संख्या में जाति, वर्ग, सम्प्रदाय के भेद से रहित होकर यहाँ शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। यहाँ पाँचवीं से लेकर आचार्या (एम.ए.) पर्यन्त शिक्षा की व्यवस्था हैं। गत वर्षो से यहाँ अन्तर्राष्ट्रीय छात्रावास की सुविधा उपलब्ध हैं जिसमे कि नेपाल आदि के अतिरिक्त कैलिफोर्निया, हालैण्ड, अमेरिका आदि की कन्याओं ने भी अध्ययन किया है। यहाँ आधुनिकता-प्राचीनता का मर्यादित सम्मिश्रण है। एतदर्थ योग्य शिक्षिकाओं की व्यवस्था की गई है। इसी के साथ यहाँ अग्रशिष्य शिक्षा प्रणाली से भी पठन-पाठन होता है। यहाँ पर वेद भी सिखाया जाता है। गुरुकुल में सर्वांगीण विकास पर विशेष बल दिया जाता है। यहाँ शस्त्र और शास्त्र दोनो की शिक्षा दी जाती है।राष्ट्रीय बालिका दिवस : काशी के इस ‘गुरुकुल’ में होठों पर मंत्र और हाथों में शस्त्र लेकर चलती हैं बेटियां
इस गुरुकुल की स्थापना 18 जून 1971 में हुई थी। इस गुरुकुल की संस्थापिका महियसी आचार्या प्रज्ञा देवी एवं आचार्या मेधा देवी जी द्वारा बालिकाओं के उत्थान हेतु,संस्कार के प्रचार हेतु एवं बालिकाओं को वेद पढ़ने का अधिकार दिलाने हेतु इस गुरुकुल की स्थापना की गई थी। इस गुरुकुल में तीन छात्रावास हैं।
गुरुकुल परिसर में पढ़ते समय छात्राएँ आचार्य जी की अनुमति के बाद ही माता-पिता से मिल सकतीं हैं। गुरुकुल में रहने के दौरान छात्रों के सभी पत्राचार (पत्र) कक्षा शिक्षक द्वारा अनुमोदित होने चाहिए। माता-पिता या अभिभावक के अलावा अन्य लोगों को कोई पत्राचार की अनुमति नहीं है। माता-पिता अपने वार्ड से 2 महीने में केवल एक बार रविवार को ही मिल सकते हैं। बैठक की अवधि 2 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए। माता-पिता द्वारा लाए गए किसी भी चीज को छात्र को सौंपने से पहले कक्षा शिक्षक/आचार्य जी द्वारा निरीक्षण किया जाना चाहिए। माता-पिता को छात्रों को सीधे फोन पर कॉल करने की अनुमति नहीं है। वे किसी भी अत्यावश्यकता में आचार्य जी या कक्षा शिक्षक से संपर्क कर सकते हैं। गुरुकुल प्रणाली में छात्रों को किसी भी त्योहार आदि के लिए अवकाश पर जाने की अनुमति नहीं है। चरम स्थितियों में, आचार्य जी ऐसी छुट्टी की स्वीकृति दे सकते हैं। हालांकि, छात्रों को निश्चित समय के भीतर वापस लौटना होगा। वापसी में किसी भी तरह की देरी पर वित्तीय दंड लगाया जाएगा। यदि 10 दिनों से अधिक की देरी होती है तो प्रवेश निरस्त कर दिया जाएगा। छात्रों को परिसर में हर समय गणवेश पहननी चाहिए।
पाणिनी कन्या महाविद्यालय का विस्तार केंद्र महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में महर्षि पाणिनि कन्या वेद पाठशाला है।
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
देश के प्रमुख कन्या गुरुकुलों में शीर्ष गुरुकुल पाणिनि कन्या महाविद्यालय, वाराणसी
श्रेणी:वाराणसी
श्रेणी:भारतीय शिक्षा
श्रेणी:आर्य समाज