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411 समाचार
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तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर

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जून 2016 तिरुपति वेंकटेश्वर मंदिर శ్రీ వెంకటేశ్వర స్వామి వారి ఆలయం Tirumala 090615.jpg India Andhra Pradesh आन्ध्र प्रदेश में अवस्थिति 13 40 59.7 N 79 20 49.9 E type:landmark_region:IN inline,title भारत आन्ध्र प्रदेश तिरुपति तिरुमला 853 वेंकटेश्वर (विष्णु) ब्रह्मोत्सवम्, वैकुण्ठ एकादशी, रथ सप्तमी द्रविड़ शैली 1 द्रविड़ भाषाओं और संस्कृत मेंSpiritual Journey, Imperial City: Pilgrimage to the Temples of Vijayanagara Alexandra Mack Vedams eBooks (P) Ltd, 2002 - Hindu pilgrims and pilgrimages - 227 pages 80 तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम http://www.tirumala.org/ तिरुपति वेंकटेश्वर मन्दिर एक हिंदू मंदिर है जो भारत के आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के पहाड़ी शहर तिरुमला में स्थित है । यह मंदिर भगवान विष्णु के एक रूप भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे मानव जाति को कलियुग की परीक्षाओं और परेशानियों से बचाने के लिए पृथ्वी पर प्रकट हुए थे। इसलिए इस स्थान का नाम कलियुग वैकुंठ भी पड़ा है और यहां के देवता को कलियुग प्रत्यक्ष दैवम कहा जाता है। इस मंदिर को तिरुमला मंदिर, तिरुपती मंदिर और तिरूपति बालाजी मंदिर जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है। वेंकटेश्वर को कई अन्य नामों से जाना जाता है बालाजी, गोविंदा और श्रीनिवास। मंदिर तिरुमला तिरुपती देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा चलाया जाता है, जो आंध्र प्रदेश सरकार के नियंत्रण में है। टीटीडी के प्रमुख की नियुक्ति आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा की जाती है। तमिल के शुरुआती साहित्य में से एक संगम साहित्य में तिरुपति को त्रिवेंगदम कहा गया है। तिरुपति के इतिहास को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं। लेकिन यह स्पष्ट है कि 5वीं शताब्दी तक यह एक प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित हो चुका था। कहा जाता है कि चोल, होयसल और विजयनगर के राजाओं का आर्थिक रूप से इस मंदिर के निर्माण में खास योगदान था। अनुश्रुतियां इस मंदिर के विषय में एक अनुश्रुति इस प्रकार से है। प्रभु वेंकटेश्वर या बालाजी को भगवान विष्णु अवतार ही है। ऐसा माना जाता है कि प्रभु विष्णु ने कुछ समय के लिए स्वामी पुष्करणी नामक सरोवर के किनारे निवास किया था। यह सरोवर तिरुमाला के पास स्थित है। तिरुमाला- तिरुपति के चारों ओर स्थित पहाड़ियाँ, शेषनाग के सात फनों के आधार पर बनीं 'सप्तगिर‍ि' कहलाती हैं। श्री वेंकटेश्वरैया का यह मंदिर सप्तगिरि की सातवीं पहाड़ी पर स्थित है, जो वेंकटाद्री नाम से प्रसिद्ध है। वहीं एक दूसरी अनुश्रुति के अनुसार, 11वीं शताब्दी में संत रामानुज ने तिरुपति की इस सातवीं पहाड़ी पर चढ़ कर गये थे। प्रभु श्रीनिवास (वेंकटेश्वर का दूसरा नाम) उनके समक्ष प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया। ऐसा माना जाता है कि प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात वे 120 वर्ष की आयु तक जीवित रहे और जगह-जगह घूमकर वेंकटेश्वर भगवान की ख्याति फैलाई। इतिहास thumb|मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार- गोपुरम माना जाता है कि इस मंदिर का इतिहास 9वीं शताब्दी से प्रारंभ होता है, जब काँच‍ीपुरम के शासक वंश पल्लवों ने इस स्थान पर अपना आधिपत्य स्थापित किया था, परंतु 15 सदी के विजयनगर वंश के शासन के पश्चात भी इस मंदिर की ख्याति सीमित रही। 15 सदी के पश्चात इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैलनी शुरू हो गई। 1843 से 1933 ई. तक अंग्रेजों के शासन के अंतर्गत इस मंदिर का प्रबंधन हातीरामजी मठ के महंत ने संभाला। हैदराबाद के मठ का भी दान रहा है।https://missiontelangana.com/nizam-gave-funding-for-temples-and-hindu-educational-institutions संग्रहीत प्रति 16 अक्तूबर 2018 https://web.archive.org/web/20181001000447/http://missiontelangana.com/nizam-gave-funding-for-temples-and-hindu-educational-institutions/ 1 अक्तूबर 2018 dead https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-andhrapradesh/A-lsquomiser-who-donated-generously/article15988076.ece संग्रहीत प्रति 26 अगस्त 2018 https://web.archive.org/web/20190205205308/https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/tp-andhrapradesh/A-lsquomiser-who-donated-generously/article15988076.ece 5 फ़रवरी 2019 live 1933 में इस मंदिर का प्रबंधन मद्रास सरकार ने अपने हाथ में ले लिया और एक स्वतंत्र प्रबंधन समिति 'तिरुमाला-तिरुपति' के हाथ में इस मंदिर का प्रबंधन सौंप दिया। आंध्रप्रदेश के राज्य बनने के पश्चात इस समिति का पुनर्गठन हुआ और एक प्रशासनिक अधिकारी को आंध्रप्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त किया गया। वर्णन thumb|200px|left|स्वामि पुष्करिणी सरोवरयहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सबसे बड़ी इच्छा भगवान वैंकटेश्वर के दर्शन करने की होती है। ऐक १ लाख से भी अधिक श्रद्धालु इस मंदिर में प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं। भक्तों की लंबी कतारें देखकर सहज की इस मंदिर की प्रसिद्धि का अनुमान लगाया जाता है। मुख्य मंदिर के अलावा यहां अन्य मंदिर भी हैं। तिरुमला और तिरुपति का भक्तिमय वातावरण मन को श्रद्धा और आस्था से भर देता है। इन तीर्थयात्रियों की देखरेख पूर्णतः टीटीडी के संरक्षण में है। मुख्य मंदिर श्री वेंकटेश्वर का यह पवित्र व प्राचीन मंदिर पर्वत की वेंकटाद्रि नामक सातवीं चोटी पर स्थित है, जो श्री स्वामी पुष्करणी नामक तालाब के किनारे स्थित है। इसी कारण यहाँ पर बालाजी को भगवान वेंकटेश्वर के नाम से जाना जाता है। यह भारत के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है, जिसके पट सभी धर्मानुयायियों के लिए खुले हुए हैं। पुराण व अल्वर के लेख जैसे प्राचीन साहित्य स्रोतों के अनुसार कल‍ियुग में भगवान वेंकटेश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात ही मुक्ति संभव है। पचास हजार से भी अधिक श्रद्धालु इस मंदिर में प्रतिदिन दर्शन के लिए आते हैं। इन तीर्थयात्रियों की देखरेख पूर्णतः टीटीडी के संरक्षण में है। श्री वैंकटेश्वर का यह प्राचीन मंदिर तिरुपति पहाड़ की सातवीं चोटी (वैंकटचला) पर स्थित है। यह श्री स्वामी पुष्करिणी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है। माना जाता है कि वेंकट पहाड़ी का स्वामी होने के कारण ही इन्‍हें वैंकटेश्‍वर कहा जाने लगा। इन्‍हें सात पहाड़ों का भगवान भी कहा जाता है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान वैंकटेश्चर साक्षत विराजमान है। यह मुख्य मंदिर के प्रांगण में है। मंदिर परिसर में अति सुंदरता से बनाए गए अनेक द्वार, मंडपम और छोटे मंदिर हैं। मंदिर परिसर में मुख्श् दर्शनीय स्थल हैं:पडी कवली महाद्वार संपंग प्रदक्षिणम, कृष्ण देवर्या मंडपम, रंग मंडपम तिरुमला राय मंडपम, आईना महल, ध्वजस्तंभ मंडपम, नदिमी पडी कविली, विमान प्रदक्षिणम, श्री वरदराजस्वामी श्राइन पोटु आदि। कहा जाता है कि इस मंदिर की उत्पत्ति वैष्णव संप्रदाय से हुई है। यह संप्रदाय समानता और प्रेम के सिद्धांत को मानता है। इस मंदिर की महिमा का वर्णन विभिन्न धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। माना जाता है कि भगवान वैंकटेश्‍वर का दर्शन करने वाले हरेक व्यक्ति को उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। हालांकि दर्शन करने वाले भक्‍तों के लिए यहां विभिन्‍न जगहों तथा बैंकों से एक विशेष्‍ा पर्ची कटती है। इसी पर्ची के माध्‍यम से आप यहां भगवान वैंकटेश्‍वर के दर्शन कर सकते है। देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में तिरुपति बालाजी मंदिर अत्यंत प्रसिद्ध है। देश-विदेश के कई बड़े उद्योगपति, फिल्म सितारे और राजनेता यहां अपनी उपस्थिति देते हैं. जानें उनके आश्चर्यजनक तथ्य... 1. मुख्यद्वार के दाएं बालरूप में बालाजी को ठोड़ी से रक्त आया था, उसी समय से बालाजी के ठोड़ी पर चंदन लगाने की प्रथा शुरू हुई। 2. भगवान बालाजी के सिर पर रेशमी केश हैं, और उनमें गुत्थिया नहीं आती और वह हमेशा ताजा रहेते है। 3. मंदिर से 23 किलोमीटर दूर एक गांव है, उस गांव में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश निषेध है। वहां पर लोग नियम से रहते हैं। वहीं से लाए गए फूल भगवान को चढ़ाए जाते हैं और वहीं की ही अन्य वस्तुओं को चढाया जाता है जैसे- दूध, घी, माखन आदि। 4. भगवान बालाजी गर्भगृह के मध्य भाग में खड़े दिखते हैं लेकिन, वे दाई तरफ के कोने में खड़े हैं बाहर से देखने पर ऎसा लगता है। 5. बालाजी को प्रतिदिन नीचे धोती और उपर साड़ी से सजाया जाता है। 6. गृभगृह में चढ़ाई गई किसी वस्तु को बाहर नहीं लाया जाता, बालाजी के पीछे एक जलकुंड है उन्हें वहीं पीछे देखे बिना उनका विसर्जन किया जाता है। 7. बालाजी की पीठ को जितनी बार भी साफ करो, वहां गीलापन रहता ही है, वहां पर कान लगाने पर समुद्र घोष सुनाई देता है। 8. बालाजी के वक्षस्थल पर लक्ष्मीजी निवास करती हैं। हर गुरुवार को निजरूप दर्शन के समय भगवान बालाजी की चंदन से सजावट की जाती है उस चंदन को निकालने पर लक्ष्मीजी की छबि उस पर उतर आती है। 9. बालाजी के जलकुंड में विसर्जित वस्तुए तिरूपति से 20 किलोमीटर दूर वेरपेडु में बाहर आती हैं। 10. गर्भगृह मे जलने वाले दिपक कभी बुझते नही हैं, वे कितने ही हजार सालों से जल रहे हैं किसी को पता भी नही है। मंदिर की चढ़ाई right|thumb|200px|तिरुमलापर पर्वतमाला पैदल यात्रियों हेतु पहाड़ी पर चढ़ने के लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम नामक एक विशेष मार्ग बनाया गया है। इसके द्वारा प्रभु तक पहुँचने की चाह की पूर्ति होती है। साथ ही अलिपिरी से तिरुमाला के लिए भी एक मार्ग है। अन्य आकर्षण खानपान तिरुमला में नित्य अन्ना दाना हॉल (मंदिर से एक किमी दूर, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के पास) में शाकाहारी खाना, चटनी, चावल, सांभर, रसम नि:शुल्क मिलता है। रोजाना 25 हजार लोग यहां खाना खाते हैं। दक्षिण भारतीय भोजन के लिए सप्तगिरी वुडलैंड्स रेस्टोरेंट (सप्तगिरी गेस्टहाउस के पास) एक अच्छा विकल्प है। सस्ते खाने के लिए आप स्वामीपुष्कर्नी तीर्थ के पास स्थित ढाबों का मजा ले सकते है। तिरुमला के सभी रेस्टोरेंट्स में खाने की कीमत टीटीडी द्वारा निर्धारित की जाती है। खरीदारी तिरुपति में चंदन की लकड़ी से बनाई गई भगवान वेंकटेश्वर और पद्मावती की मूर्तियां प्रसिद्ध हैं। यहां पर वैसे कलाकार भी है जिससे आप चावल के दानों पर अपना नाम लिखवा सकते है। यह वास्तव में एक अनोखी चीज है जिसे यादगार के तौर पर अपने पास रखा जा सकता है। आंध्र प्रदेश सरकार के लेपाक्षी इंपोरियम में पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्रों की बुनाई के विभिन्न रूप देखने को मिलते हैं। मंदिर में भगवान वैंकटेश्वर की तस्वीर वाले सोने से सिक्के भी बेचे जाते हैं। केशखंड इसके अंतर्गत श्रद्धालु प्रभु को अपने केश समर्पित करते हैं जिससे अभिप्राय है कि वे केशों के साथ अपना दंभ व घमंड छोड़ देते है ओर मानव योनी मे जन्म ओर सम्सत पिढी की तरफ से कृतज्ञता हेतु केश समर्पिण किया जाता हैं । पुराने समय में यह संस्कार घरों में ही नाई के द्वारा संपन्न किया जाता था, पर समय के साथ-साथ इस संस्कार का भी केंद्रीकरण हो गया और मंदिर के पास स्थित 'कल्याण कट्टा' नामक स्थान पर यह सामूहिक रूप से संपन्न किया जाने लगा। अब सभी नाई इस स्थान पर ही बैठते हैं। केशदान के पश्चात यहीं पर स्नान करते हैं और फिर पुष्करिणी में स्नान के पश्चात मंदिर में दर्शन करने के लिए जाते हैं। सर्वदर्शनम सर्वदर्शनम से अभिप्राय है 'सभी के लिए दर्शन'। सर्वदर्शनम के लिए प्रवेश द्वार वैकुंठम काम्प्लेक्स है। वर्तमान में टिकट लेने के लिए यहाँ कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था है। यहाँ पर निःशुल्क व सशुल्क दर्शन की भी व्यवस्था है। साथ ही विकलांग लोगों के लिए 'महाद्वारम' नामक मुख्य द्वार से प्रवेश की व्यवस्था है, जहाँ पर उनकी सहायता के लिए सहायक भी होते हैं। अन्न प्रसाद (भोजन) thumb|200px|right|आदिवाराह मंदिर यहाँ पर प्रसाद के रूप में अन्न प्रसाद की व्यवस्था है जिसके अंतर्गत चरणामृत, मीठी पोंगल, दही-चावल जैसे प्रसाद तीर्थयात्रियों को दर्शन के पश्चात दिया जाता है। रोटी खानेवाले यात्रियों की सुविधा हेतु रोटी सब्जी की व्यवस्था भी है। लड्डू प्रसाद पनयारम यानी लड्डू मंदिर के बाहर बेचे जाते हैं, जो प्रभु को चढ़ाने के पश्चात भक्तों को खरीदने के लिए उपलब्ध कराया जाता हैं। इन्हें खरीदने के लिए पंक्तियों में लगकर टोकन लेना पड़ता है। श्रद्धालु दर्शन के उपरांत लड्डू मंदिर परिसर के बाहर से खरीद सकते हैं। विवाद सितम्बर 2024 जांच के दौरान तिरुपति मंदिर के लड्डू प्रसाद में गाय की चर्बी, सूअर की चर्बी, मछली का तेल पाया गया | इस पर काफी विवाद हुआ और इससे हिन्दूओं की आस्था को गहरा धक्का लगा है |https://www.bhaskar.com/national/news/tirupati-prasadam-controversy-jagan-reddy-accuces-cm-naidu-on-lab-report-claims-133675396.html तिरुपति मंदिर प्रबंधन बोला- प्रसाद अब पवित्र:कहा- जांच में एनिमल फैट की पुष्टि, पूर्व राष्ट्रपति बोले- ऐसा हर मंदिर में हो सकता हैhttps://www.abplive.com/news/india/tirupati-laddu-controversy-health-ministry-show-cause-notice-ghee-supplying-company-whose-samples-failed-quality-test-2789667 तिरुपति लड्डू विवाद में मोदी सरकार का बड़ा एक्शन! इस कंपनी को थमा दिया शो कॉज नोटिस डेस्क एबीपी लाइव 2024-09-23 www.abplive.com hi 2024-09-24 उत्सव thumb|275px|left|ब्रह्मोत्सव के समय रात्रि में मंदिर परिसर का जगमगाता दृश्य|कड़ी=Special:FilePath/Tirumala.jpg ब्रह्मोत्सव तिरुपति का सबसे प्रमुख पर्व 'ब्रह्मोत्सवम' है जिसे मूलतः प्रसन्नता का पर्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाला यह पर्व साल में एक बार तब मनाया जाता है, जब कन्या राशि में सूर्य का आगमन होता है (सितंबर, अक्टूबर)। इसके साथ ही यहाँ पर मनाए जाने वाले अन्य पर्व हैं - वसंतोत्सव, तपोत्सव, पवित्रोत्सव, अधिकामासम आदि। विवाह संस्कार यहाँ पर एक 'पुरोहित संघम' है, जहाँ पर विभिन्न संस्कारों औऱ रिवाजों को संपन्न किया जाता है। इसमें से प्रमुख संस्कार विवाह संस्कार, नामकरण संस्कार, उपनयन संस्कार आदि संपन्न किए जाते हैं। यहाँ पर सभी संस्कार उत्तर व दक्षिण भारत के सभी रिवाजों के अनुसार संपन्न किए जाते हैं। रहने की व्यवस्था तिरुमाला में मंदिर के आसपास रहने की काफी अच्छी व्यवस्था है। विभिन्न श्रेणियों के होटल व धर्मशाला यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इनकी पहले से बुकिंग टीटीडी के केंद्रीय कार्यालय से कराई जा सकती है। यह केन्द्रीय कार्यालय सुबह ६ बजे खुलता है। कमरे की बुकिंग के लिए लंबी लाइनें लगती हैं। सामान्यतः पूर्व बुकिंग के लिए अग्रिम धनराशि के साथ एक पत्र व सौ रुपए का एक ड्राफ्ट यहाँ पर भेजना पड़ता है। टीटीडी के स्वामित्व वाले भवनों में रहने की व्यवस्था केवल २४ घंटे के लिए दी जाती है। भाषा यहां के लोग मुख्यत:तेलुगु बोलते हैं। लेकिन तमिल, कन्नड़ और अंग्रेजी समझने वाले लोगों की भी बड़ी संख्या हैं। इस शहर के ज्यादातर व्यापारी एवं होटल कर्मी हिंदी समझते है एवं हिंदी में ही उत्तर देते है (टूटी फूटी हिंदी)। तापमान गर्मियों में अधिकतम 43 डि. और न्यूनतम 22 डि., सर्दियों में अधिकतम 32 डि. और न्यूनतम 14 डि. तापमान रहता है। मौसम तिरुपति में आमतौर पर वर्षभर गर्मी होती है। तिरुमला की पहाड़ियों में वातावरण ठंडा होता है। आवागमन हवाई मार्ग यहां से निकटतम हवाई अड्डा तिरुपति है। इंडियन एयरलाइंस की हैदराबाद, दिल्ली और तिरुपति के बीच प्रतिदिन सीधी उडा़न उपलब्‍ध है। तिरुपति पर एक छोटा-सा हवाई अड्डा भी है, जहाँ पर मंगलवार और शनिवार को हैदराबाद से फ्लाइट मिल सकती है। तत्पश्चात एपीएसआरटीसी की बस सेवा भी उपलब्ध है जो परिसर तक पहुँचाने में केवल ३० मिनट का समय लेती है। रेल मार्ग यहां से सबसे पास का रेलवे स्टेशन तिरुपति है। यहां से बैंगलोर, चेन्नई और हैदराबाद के लिए हर समय ट्रेन उपलब्‍ध है। तिरुपति से रेनिगुंटा जंक्शन जो कि तिरुपति से केवल १० किलोमीटर दूर है और गुटूंर तक भी ट्रेन चलती है। रेनिगुंटा जंक्शन से ट्रेन के विकल्प ज्यादा मौजूद हैं। सड़क मार्ग राज्य के विभिन्न भागों से तिरुपति और तिरुमला के लिए एपीएसआरटीसी की बसें नियमित रूप से चलती हैं। टीटीडी भी तिरुपति और तिरुमला के बीच थोड़ी-बहुत नि:शुल्क बस सेवा उपलब्ध कराती है। यहां के लिए टैक्सी भी मिलती है। भ्रमण समय मौसम के हिसाब से यहां आने का उपयुक्त समय सितंबर से फरवरी के बीच है। आंध्र प्रदेश वैंकटेश्वर मंदिर की श्रंखला भारत में कुरुक्षेत्र ( हरयाणा ) देहरादून (उत्तराखंड ) चेन्नई (तमिलनाडु ) नई दिल्ली http://timesofindia.indiatimes.com/india/Tirupati-temple-will-be-built-in-Dehradun-other-places-TTD/articleshow/49432432.cms?utm_source=twitter.com&utm_medium=referral&utm_campaign=TOI संग्रहीत प्रति 19 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20180105184849/https://timesofindia.indiatimes.com/india/Tirupati-temple-will-be-built-in-Dehradun-other-places-TTD/articleshow/49432432.cms?utm_source=twitter.com&utm_medium=referral&utm_campaign=TOI 5 जनवरी 2018 live मुजफ्फरपुरhttps://www.livebiharnews.in/news/construction-of-tirupati-balaji-temple-in-muzaffarpur-including-seven-district-of-bihar.html संग्रहीत प्रति 28 मार्च 2018 https://web.archive.org/web/20180328165848/https://www.livebiharnews.in/news/construction-of-tirupati-balaji-temple-in-muzaffarpur-including-seven-district-of-bihar.html 28 मार्च 2018 dead पटना गया नालंदा वैशाली भागलपुर<ref name बांका इंदौर (मध्यप्रदेश) विदेश में ऑहियो (यू ० एस ० )http://timesofindia.indiatimes.com/india/Lord-Venkateswara-Temple-to-be-built-in-US/articleshow/48206810.cms संग्रहीत प्रति 19 अक्तूबर 2015 https://web.archive.org/web/20150727043229/http://timesofindia.indiatimes.com/india/Lord-Venkateswara-Temple-to-be-built-in-US/articleshow/48206810.cms 27 जुलाई 2015 live सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ तिरुपति तिरुमला देवस्थानम वेबसाइट ्टी.टी.डी के विभिन्न सेवाओं के चित्र तिरुमाला यात्रा की जानकारी तिरुपति मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य https://web.archive.org/web/20230404104540/https://factsgazab.com/tirupati-balaji-unknown-facts-in-hindi/ 4 अप्रैल 2023 तिरुपति मंदिर दर्शन के नियम समय https://web.archive.org/web/20240103140530/https://dussera.co.in/tirupati-kaise-jae-tirupati-itihash-darshan-ke-timing-niyam/ 3 जनवरी 2024 श्रेणी:आंध्र प्रदेश में हिन्दू मन्दिर श्रेणी:तिरुपति