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नरसिम्हा (फ़िल्म)

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नरसिम्हा नरसिम्हा.jpg नरसिम्हा का पोस्टर एन चन्द्रा एन चन्द्रा लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल एन चन्द्रा कमलेश पांडे (संवाद) सनी देओल, डिम्पल कपाड़िया, उर्मिला मातोंडकर, रवि बहल, ओम पुरी, जॉनी लीवर 214 मिनट बिनोद प्रधान 5 जुलाई, 1991 भारत हिन्दी नरसिम्हा 1991 में बनी हिन्दी भाषा की एक्शन फ़िल्म है। इसमें सनी देओल, डिम्पल कपाड़िया, उर्मिला मातोंडकर, रवि बहल और ओम पुरी हैं। फिल्म एन चन्द्रा द्वारा निर्देशित है और एक व्यावसायिक सफलता थी। यह फिल्म अभिनेता रवि बहल और अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर की पहली फिल्म थी, हालांकि वह छोटी भूमिकाओं में बड़े घर की बेटी जैसी फिल्मों में दिखाई दीं थीं। संयोग से, दोनों कई फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में दिखाई दिए थे। संक्षेप नरसिम्हा (सनी देओल), एक युवा और सक्षम व्यक्ति है, जो शांत इलाके में अपने परिवार के साथ जीवनयापन करता है। वह अपनी बहन की शादी अपने आसपास रहने वाले युवक से करवाता है। एक दिन वो घर लौटता है और देखता है कि मोहल्ले में दंगा-फसाद हो गया है जो धीरे-धीरे पूरे शहर में फैल जाता है। वह आस-पास के एक आवास क्षेत्र में शरण लेता है। जब वो वापस जाता है तो उसे पता लगता है कि उसके पूरे परिवार की हत्या कर दी गई है। अब उसके जीवन में कोई लक्ष्य नहीं रहने के कारण, नरसिम्हा अपराध और शराब की ओर रुख करने का फैसला करता है। वह बाद में सूरज नारायण सिंह, उर्फ ​​बापजी (ओम पुरी) नामक एक व्यक्ति के लिए काम करने का फैसला करता है, जो शहर का एक बड़ा गुंडा और पूँजीपति है और अपने गुंडों और असीम दौलत से शहर की कानून और व्यवस्था को नियंत्रित करता है। बापजी को नरसिम्हा जैसे व्यक्ति को पाकर खुशी हुई है, जिसके पास बुद्धि भी है और शरीर की शक्ति भी है, लेकिन उसने जीने की इच्छा खो दी है और इसलिए नरसिम्हा उसके सबसे कठिन कामों को अंजाम देता है जो दूसरे पूरा नहीं कर सकते। वह नरसिम्हा को एक हथियार का रूप मानता है। नरसिम्हा पूरे दिन नशे में रहता है और केवल तभी आता है जब उसे बापजी द्वारा कोई काम को अंजाम देने के लिए बुलाया जाता है। हालाँकि, नरसिम्हा ने सारी मानवता नहीं खोई है और वह कभी-कभी लोगों को संकट से उबरने में मदद करता है। लेकिन वह ज्यादातर समय नशे में रहता है और बापजी द्वारा प्रदान किए गए धन पर पूरी तरह से जीवन व्यतीत करता है। बापजी ने शहर में खुले तौर पर घोषणा की, चूँकि वह इतना शक्तिशाली, प्रभावशाली और अमीर है, कि कोई भी उसे नहीं मार सकता, न आदमी न जानवर, न हथियार और न ही कोई उपकरण, न ही दिन में, न ही रात में, इसलिये वो हिरण्यकशिपु है। बापजी ने शहर के लोगों से उसे अपने भगवान के रूप में मानने के लिए कह रखा है। लेकिन जब बापजी ने नरसिम्हा को रवि रस्तोगी (रवि बहल) नाम के एक युवा लड़के को मारने के लिए कहा, जिसको उसकि बेटी मीनू (उर्मिला मातोंडकर) से प्यार हो गया है, नरसिम्हा मना कर देता है। युवा जोड़े के प्रेम के साथ-साथ रवि की बहन अनीता (डिम्पल कपाड़िया) के ईमानदार चरित्र का साक्षी नरसिम्हा, मानवता के बारे में सोचता है और वह रवि और उसकी बहन, अनीता के साथ मिलकर बापजी को युवा जोड़े की शादी करने के लिए मजबूर करता है। नरसिम्हा बापजी के साथ खुले तौर पर संघर्ष करता है और उसे अपने कुछ वफादार दोस्तों और अनीता द्वारा सहायता प्राप्त है। संघर्ष बहुत हद तक बढ़ जाता है और नरसिम्हा की मदद से अनीता, बापजी के दमनकारी और गैरकानूनी शासन के खिलाफ स्थानीय मदद और भीड़ का समर्थन पाने में सफल रहती है। बापजी अपने गुंडों, बाहुबल आदि का इस्तेमाल कर इस बढ़ते विरोध को रोकने की तमाम तरकीबें आजमाता है लेकिन नरसिम्हा द्वारा हर बार असफल कर दिया जाता है। बाद में नरसिम्हा और अनीता के नेतृत्व में शहर के लोगों द्वारा दबाव डाले जाने के कारण बापजी को उसकी अवैध गतिविधियों के कारण पुलिस गिरफ्तार कर लेती है। हालाँकि, बाद में वह अपने पैसे का इस्तेमाल करके जमानत पर रिहा हो जाता है। बापजी जबरन मीनू की शादी करने का फैसला करता है और उसे कैद कर लेता है। वह अंततः नरसिम्हा को पकड़ लेता है और उसे अपने महल में लाता है। वहाँ बापजी, नरसिम्हा को बताता है कि वो ही था जिसने सांप्रदायिक दंगे की योजना बनाई थी, जिसमें नरसिम्हा का परिवार मारा गया। वह तब अपनी तलवार से नरसिम्हा को मारता है और उसे बुरी तरह जख्मी कर देता है। फिर वह अपने आदमियों से उसे अपने महल के एक खंभे के भीतर अधमरा दफनाने का आदेश देता है। अगली सुबह, जब वह मीनू की जबरन शादी करने की कोशिश करता है, तो अनीता और रवि अपने दोस्तों के साथ शादी को रोकने के लिए पहुँचते हैं। जब मीनू शादी करने से इंकार करती है और इसके बजाय रवि के पास जाती है, तो बापजी मीनू और रवि दोनों को अपने महल की दीवार में जिंदा चुनवाने का आदेश देता है। अचानक घायल नरसिम्हा खंभे को तोड़ता है जिसके भीतर वह था और बापजी के गुंडों से लड़ता है जबकि नरसिम्हा की मदद करने के लिए उसके दोस्त और लोग भी आ जाते हैं। वह अपने दोस्तों की मदद से मीनू और रवि को उस दीवार को तोड़कर बचा लेता है। नरसिम्हा द्वारा स्तंभ और दीवारों को तोड़ने से महल की नींव खराब हो जाती है और इसकी छत और अन्य दीवारें गिरने लगती हैं। अंत में बापजी के अपने महल की मीनार टूट कर उस पर गिर जाती है। अंत में अनीता और नरसिम्हा और रवि और मीनू एकजुट हो जाते हैं और शांति शहर में लौटती है। मुख्य कलाकार सनी देओल — नरसिम्हा डिम्पल कपाड़िया — अनीता रस्तोगी उर्मिला मातोंडकर — मीनू सिंह रवि बहल — रवि रस्तोगी ओम पुरी — सूरज नारायण सिंह 'बापजी' जॉनी लीवर — टैम्पो दादा शफ़ी ईनामदार — इंस्पेक्टर विनोद रस्तोगी ओम शिवपुरी — सक्सेना सतीश शाह — अनिल सक्सेना शैल चतुर्वेदी — सीमा के पिता सी एस दुबे — मुंशी दुलारी — श्रीमती रस्तोगी बृज गोपाल — सुलेमान उषा नाडकर्णी — नरसिम्हा की माँ अच्युत पोद्दार — सक्सेना का कर्मचारी निवेदिता सराफ़ — सीमा शरत सक्सेना — घासीराम पाटिल वीरेन्द्र सक्सेना — कॉलेज प्रधानाध्यापक महावीर शाह — जेलर शिंदे अंजान श्रीवास्तव — नरसिम्हा के पिता संगीत गीत गायक जावेद अख्तर लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल हम से तुम दोस्ती कर लो उदित नारायण, अलका याज्ञिक 9:15 जाओ तुम चाहे जहाँ अमित कुमार, अलका याज्ञिक 8:04 लेकिन मोहब्बत बड़ी है मोहम्मद अज़ीज़, अलका याज्ञिक 7:57 पकड़ पकड़ खींच के पकड़ सुदेश भोंसले, जॉली मुखर्जी, कविता कृष्णमूर्ति 6:47 तुम हो अजनबी तो अलका याज्ञिक, लक्ष्मीकांत 2:09 याद करोगे वहाँ अलका याज्ञिक, अमित कुमार 6:01 नामांकन और पुरस्कार प्राप्तकर्ता और नामांकित व्यक्तिपुरस्कार वितरण समारोहश्रेणीपरिणाम ओम पुरीफिल्मफेयर पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार बाहरी कड़ियाँ 0102513 नरसिम्हा श्रेणी:1991 में बनी हिन्दी फ़िल्म श्रेणी:लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल द्वारा संगीतबद्ध फिल्में