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411 समाचार
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गागरौन दुर्ग

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गागरोन् राजस्थान, भारत Gagron fort.JPG गागरोन दुर्ग का दृश्य India Rajasthan 300 24.627937 76.182957 type:landmark inline डोडिया राजपूत, खीची चौहान, भीमकरन महमूद खिलजी, राणा कुंभा, अकबर एवं महाराव भीम सिंह गागरों का युद्ध (१५१९) – राणा सांगा ने मालवा के महमूद खिलजी क्को पराजित किया। Decisive Battles India Lost pg 57 by Jaywant Joglekar yes WHS राजस्थान के पहाड़ी दुर्ग 2013 (36th session) सांस्कृतिक ii, iii 247 देश भारत क्षेत्र एशिया गागरोन का दुर्ग दक्षिण-पूर्वी राजस्थान https://web.archive.org/web/20210611161224/https://ekbharth.com/%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%95/ 11 जून 2021 के सबसे प्राचीन व विकट दुर्गों में से एक गागरोन दुर्ग हैँ प्रमुख जल दुर्ग है ! जिसे झालावाड़ में आहू और कालीसिंध नदियों के संगम स्थल ‘सामेलजी’ के निकट डोड ( परमार ) राजपूत शासक बिजल देव ने करवाया था इन्हीं के नाम पर इसे डोडगढ़ या धूलरगढ़ कहते थे ! गागरोन दुर्ग भारतीय राज्य राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित एक दुर्ग है। यह काली सिंध नदी और आहु नदी के संगम पर स्थित है। 21जूूून, 2013 को राजस्थान के 5 दुर्गों को युनेस्को विश्व विरासत स्थल घोषित किया गया जिसमें से गागरों दुर्ग भी एक है। यह झालावाड़ से उत्तर में 13 किमी की दूरी पर स्थित है। किले के प्रवेश द्वार के निकट ही सूफी संत ख्वाजा हमीनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है।http://hindi.nativeplanet.com/jhalawar/attractions/gagron-fort/ गागरों किला, झालावाड़ 20 नवंबर 2017 https://web.archive.org/web/20171201133047/https://hindi.nativeplanet.com/jhalawar/attractions/gagron-fort/ 1 दिसंबर 2017 dead यह दुर्ग दो तरफ से नदी से, एक तरफ से खाई से और एक तरफ से पहाड़ी से घिरा हुआ है। कभी इस किले 92 मंदिर होते थे और सौ साल का पंचांग भी यहीं बना था। यह तीन ओर से अहू और काली सिंध के पानी से घिरा हुआ है। पानी और जंगलों से सुरक्षित यह किला कुछ ही ऐतिहासिक स्थलों में से एक है जिसमें ‘वन’ और ‘जल’ दुर्ग दोनों हैं। किले के बाहर यात्री सूफी संत मिट्ठे शाह की दरगाह देख सकते हैं। प्रत्येक वर्ष मोहर्रम के अवसर पर यहाँ एक मेला आयोजित किया जाता है। संत पीपा जी का मठ भी, जो संत कबीर के समकालीन के रूप में प्रसिद्ध है, किले के पास स्थित है। इतिहासकारों के अनुसार, इस दुर्ग को मोहम्मद जलालुद्दीन अकबर ने अपने हितैषी पृथ्वीराज राठौर को दिया था तेरहवी शताब्दी में अल्लाउदीन खिलजी ने किले पर चढ़ाई की जिसे राजा जैतसिंह खिंची ने विफल कर दिया था। 1338 ई से 1368 तक राजा प्रताप राव ने गागरों पर राज किया और इसे एक समर्ध रियासत बना दिया। बाद में सन्यासी बनकर वही 'राजा संत पीपा' कहलाए। गुजरात के द्वारका में आज उनके नाम का मठ है। चौदहवी सदी के मध्य तक गागरों किला एक समर्ध रियासत बन चुका था। इसी कारन मालवा के मुस्लिम घुसपैठिये शासको की नजर इस पर पड़ी। होशंग शाह ने 1423 ईस्वी में तीस हजार की सेना और कई अन्य अमीर राजाओ को साथ मिलाकर गढ़ को घेर लिया और अपने इसे जीत लिया। सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ http://jhalawar.nic.in/gagron.htm गागरोन दुर्ग : झालावाड़ गागरोन का किला – त्याग का गवाह है https://web.archive.org/web/20201027063500/https://merarajasthan.in/gagron-fort-kila-jhalawar-history/ 27 अक्तूबर 2020 श्रेणी:भारत के विश्व धरोहर स्थल श्रेणी:राजस्थान में दुर्ग