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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

आर्यासप्तशती

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आर्यासप्तशती संस्कृत में मुक्तक गीति-कविताओं वाली एक कृति है। यह गोवर्धनाचार्य की रचना मानी जाती है। इसमें 700 आर्याएँ संग्रहीत होनी चाहिए परंतु विभिन्न संस्करणों में आर्याओं की संख्या 760 तक पहुंच गई है। अत: यह कहना कठिन है कि उपलब्ध आर्यासप्तशती क्षेपकों से रहित है। परिचय मध्ययुग में यह संग्रह काफी लोकप्रिय था और उसकी आर्याओं की छाया लेकर बहुत सी फुटकर रचनाएँ लिखी गईं। बिहारी कवि की "सतसई" इस संग्रह से बहुत प्रभावित है। आर्यासप्तशती में ही यह उल्लेख मिलता है कि जो शृंगाररस की धारा प्राकृत में ही उपलब्ध थी उसको संस्कृत में अवतरित करने के लिये यह प्रयास किया गया है। यहाँ संकेत हाल (या शालिवाहन) की "गाथासप्तशती" की ओर है। हाल ने प्राकृत गाथाओं में शृंगारपरक रचनाएँ निबद्ध की है। गोवर्धन ने इन्ही गाथाओं को अपनी आर्याओं का आदर्श बनाया। प्राकृत का गाथाछंद, संस्कृत के आर्याछंदों के अधिक निकट है अत: गोवर्धन ने आर्याछंद को ही रचना के लिये चुना। केवल छंद में ही नहीं अपितु भावचित्रण में भी गोवर्धन हाल का बहुधा अनुकरण करते हैं। परंतु इससे यह नहीं समझना चाहिए कि आर्यासप्तशती, गाथासप्तशती का संस्कृत अनुवाद मात्र है। जब भी गोवर्धन किसी गाथा के भाव को व्यक्त करना चाहते हैं, वे उसमें अपनी मौलिक प्रतिभा के प्रदर्शन से नहीं चूकते। अत: आर्यासप्शती गाथासप्तशती से स्थूलरूप में प्रभावित होते हुए भी अपने आपमें मैलिक है। शृंगार की अभिव्यक्ति के लिये गोवर्धन को आचार्य माना जाता है। इनको रचनाओं में शृंगार का उद्दाम रूप खुलकर आया है। कहीं-कहीं तो नग्न चित्रण अपनी नग्नता के कारण रसाभास उत्पन्न कर देते हैं। एक जगह तो गोवर्धन ने प्रेम में शव के चुंबन की भी बात कही है। परंतु अभिव्यक्ति की तीव्रता, अलंकारसंयोजना तथा व्यंजना की गंभीरता के कारण गोवर्धनाचार्य की गणना सत्कवियों में की जा सकती है। श्रेणी:संस्कृत श्रेणी:ग्रन्थ