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411 समाचार
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कृष्णदेवराय

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श्रीकृष्णदेवराय महाराजाधिराजकन्नड़ राज्य राम रमणआंध्र भोज दक्षिण समुद्राधीश्वरहिंदू धर्म धारक गौब्राह्मण प्रतिपालक Sri Krishna Deva Raya.jpg विजयनगर का सम्राट २३/२४ जनवरी १५१० २६ जुलाई १५०९ – १७ अक्टूबर १५२९ वीरनृसिंह राय अच्युत देव राय 1471 01 17 yes विजयनगर साम्राज्य (आधुनिक दिन हम्पी, कर्नाटक, भारत) 1529 10 17 1471 01 17 yes विजयनगर साम्राज्य (आधुनिक दिन हम्पी, कर्नाटक, भारत) * तिरुमलम्बा (तिरुमाला देवी के गर्भ से) वेंगलम्बा (चिन्ना देवी के गर्भ से) तिरुमलराय (तिरुमाला देवी के गर्भ से) तुलुव नरसा नायक नगला देवी Krishnadevaraya signature.png हिंदू धर्म (वैष्णव) तिरुमाला देवीचिन्ना देवीअन्नपूर्णा देवी तुलुव yes विजयनगर साम्राज्य १५०९–१५२९ See list कृष्णदेवराय का दक्कन अभियान दीवानी की लड़ाई कोइलकोंडा का युद्ध रायचूर पर कब्ज़ा गुलबर्गा की घेराबंदी बीदर की घेराबंदी विजयनगर–गजपति युद्ध उदयगिरि की घेराबंदी कोंडाविदु की घेराबंदी मेदुरु की लड़ाई कोंडाविदु पर कब्ज़ा कोंडापल्ली पर कब्ज़ा कलिंग पर विजय रायचूर की लड़ाई कृष्णदेवराय (१७ जनवरी १४७१ – १७ अक्टूबर १५२९) विजयनगर के सर्वाधिक कीर्तिवान सम्राट थे। वे स्वयं कवि और कवियों के संरक्षक थे। तेलुगु भाषा में उनका काव्य अमुक्तमाल्यद साहित्य का एक रत्न है। इनकी भारत के प्राचीन इतिहास पर आधारित पुस्तक वंशचरितावली तेलुगू के साथ-साथ संस्कृत में भी मिलती है। संभवत तेलुगू का अनुवाद ही संस्कृत में हुआ है। तेलुगु भाषा के आठ प्रसिद्ध कवि इनके दरबार में थे जो अष्टदिग्गज के नाम से प्रसिद्ध थे। स्वयं कृष्णदेवराय भी आंध्रभोज के नाम से विख्यात थे। प्रख्यात इतिहासकार तेजपाल सिंह धामा ने हिन्दी में इनके जीवन पर प्रामाणिक उपन्यास आंध्रभोज लिखा है। परिचय जिन दिनों वे सिंहासन पर बैठे उस समय दक्षिण भारत की राजनीतिक स्थिति डाँवाडोल थी। पुर्तगाली पश्चिमी तट पर आ चुके थे। कांची के आसपास का प्रदेश उत्तमत्तूर के राजा के हाथ में था। उड़ीसा के गजपति नरेश ने उदयगिरि से नेल्लोर तक के प्रांत को अधिकृत कर लिया था। बहमनी राज्य अवसर मिलते ही विजयनगर पर आक्रमण करने की ताक में था।A Social History of the Deccan, 1300-1761: Eight Indian Lives, by Richard M. Eaton p.90A Social History of the Deccan, 1300-1761: Eight Indian Lives, by Richard M. Eaton p.88 सम्राट कृष्णदेवराय ने इस स्थिति का अच्छी तरह सामना किया। दक्षिण की राजनीति के प्रत्येक पक्ष को समझनेवाले और राज्यप्रबंध में अत्यंत कुशल श्री अप्पाजी को उन्होंने अपना प्रधान मंत्री बनाया। उत्तमत्तूर के राजा ने हारकर शिवसमुद्रम के दुर्ग में शरण ली। किंतु कावेरी नदी उसके द्वीपदुर्ग की रक्षा न कर सकी। कृष्णदेवराय ने नदी का बहाव बदलकर दुर्ग को जीत लिया। बहमनी सुल्तान महमूदशाह को उन्होंने बुरी तरह परास्त किया। रायचूड़, गुलबर्ग और बीदर आदि दुर्गों पर विजयनगर की ध्वजा फहराने लगी। किंतु प्राचीन हिंदु राजाओं के आदर्श के अनुसार महमूदशाह को फिर से उसका राज लौटा दिया और इस प्रकार यवन राज्य स्थापनाचार्य की उपाधि धारण की। १५१३ में उन्होंने उड़ीसा पर आक्रमण किया और उदयगिरि के प्रसिद्ध दुर्ग को जीता। कोंडविडु के दुर्ग से राजकुमर वीरभद्र ने कृष्णदेवराय का प्रतिरोध करने की चेष्टा की पर सफल न हो सका। उक्त दुर्ग के पतन के साथ कृष्ण तक का तटीय प्रदेश विजयनगर राज्य में सम्मिलित हो गया। उन्होंने कृष्णा के उत्तर का भी बहुत सा प्रदेश जीता। १५१९ में विवश होकर गजपति नरेश को कृष्णदेवराय से अपनी कन्या का विवाह करना पड़ा। सम्राट कृष्णदेवराय ने कृष्णा से उत्तर का प्रदेश गजपति को वापस कर दिया। जीवन के अंतिम दिनों में कृष्णदेवराय को अनेक विद्रोहों का सामना करना पड़ा। उसके पुत्र तिरुमल की विष द्वारा मृत्यु हुई। सम्राट कृष्णदेवराय ने अनेक प्रसादों, मंदिरों, मंडपों और गोपुरों का निर्माण करवाया। रामस्वामीमंदिर के शिलाफलकों पर प्रस्तुत रामायण के दृश्य दर्शनीय हैं। सन्दर्भ इन्हें भी देखें विजयनगर साम्राज्य बाहरी कड़ियाँ महान सम्राट कृष्णदेव राय का संपूर्ण इतिहास सम्राट क्र्ष्नदेव राय (लेखक-मनीष कुमार) ‘आंध्र भोज ’ श्री कृष्णदेव राय श्रेणी:भारत का इतिहास श्रेणी:विजयनगर साम्राज्य