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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

हलीमा अल-सादिया

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हजरत हलीमा अल-सादिया इस्लामी पैगंबर हजरत मुहम्मद की पालक-मां थीं। हज़रत हलीमा और उनके पति हजरत साद बी बक्र के गोत्र से थे। साद बी बक्र, हवाज़िन का एक उपखंड (एक बड़ी उत्तरी अरब जनजाति या जनजातियों का समूह) के थे। The Sealed Nectar Mubarakpuri Safiur Rahman Dar-us-Salam Publications 1979 Saudi Arabia 56 मुहम्मद के साथ संबंध हजरत मुहम्मद की माँ हजरत अमीना बिन्त वहब बनू साद के आने का इंतज़ार कर रही थीं; बानू साद जनजाति की महिलाएं पालक मां हुआ करती थीं। वे मक्का के बच्चों को रेगिस्तान में ले जातीं और उन्हें शास्त्रीय अरबी और अन्य कौशल सिखातीं थीं; बदले में उन्हें मक्का में बच्चे के परिवार से वेतन मिलता था। The Life of Muhammad Haykal Muhammad Husyan Millat Book Center 1968 India 47 हजरत हलीमा के पति हजरत अल-हरीथ बिन अब्दुल उज्जा थे। उनके बेटे का नाम हजरत अब्दुल्लाह था, जबकि बेटियों का नाम हजरत उनायसा और हजरत हुज़फा था। मक्का की यात्रा के दौरान वह अपने बच्चे को खिलाने में असमर्थ थीं क्योंकि उनके ऊंट ने स्तनपान करना बंद कर दिया था। मक्का में पालक बच्चों की तलाश करने वाले सभी लोगों ने अनाथ हजरत मुहम्मद को लेने से इनकार कर दिया क्योंकि उन्हें डर था कि उनके पिता की मृत्यु के कारण भुगतान नहीं किया जाएगा। हजरत हलीमा को इस बात का दुख हुआ कि उनके क़बीले की हर महिला को उनके अलावा एक बच्चा मिल गया था। इसलिए उनहों ले अपने पति हजरत अल-हरीथ से कहा: "क़सम खुदा की मुझे अपनी सहेलियों के साथ एक बच्चे के बिना लौटने का विचार पसंद नहीं है; मैं जाकर उस अनाथ को ले जाऊंगी।" उनके पति राजी हो गये। The Life of Muhammad Alfred Guillaume Oxford 1955 72हजरत मुहम्मद को स्वीकार करने के तुरंत बाद, उनके और उनके परिवार की किस्मत का सितारा चमक उठा। सख्त अकाल के समय उनक पति के मवेशी स्वस्थ थे और दूध पैदा कर रहा थे जबकि बाकी लोगों के मवेशी मर रहे थे। जब हजरत मुहम्मद दो वर्ष के थे, तब हलीमा सादिया उनहें हज़रत आमिना के पास ले गईं और उनसे आग्रह किया कि वह उनहें अपने पास रहने दें, जिस पर वह मान गईं। कुछ महीने बाद एक अजीब और रहस्यमयी घटना घटी। हजरत मुहम्मद (सल्ल.) का पालक भाई उनके साथ खेल रहे थे, तभी अचानक हजरत हलीमा और उनके पति ने अपने बेटे (हजरत मुहम्मद के पालक भाई) को देखा, जो वापस भागते हुए आए और चिल्लाए: "सफेद कपड़े पहने दो लोगों ने मेरे भाई को पकड़ लिया और उसकी छाती काट दी।" तब हजरत हलीमा और हजरत अल-हरीथ दौड़कर हजरत मुहम्मद के पास गए और उन्हें पीला चेहरा पाया। जब उन्होंने उनसे पूछा कि क्या हुआ, तो उनहों ने कहा: "दो आदमी आए और मेरी छाती खोली और उसका एक हिस्सा ले लिया"। इस घटना के बाद उनहों ने उनहें पालना छोड़ दिया और उनकी माँ को बताया कि क्या हुआ था। The Life of Muhammad Alfred Guillaume Oxford 1955 72Alfred, Guillaume (1955). The Life of Muhammad. Oxford. p. 72. बाद में उनहों ने हुनैन की लड़ाई के बाद इस्लाम स्वीकार कर लिया। 9 हिजरी में उनकी मृत्यु हो गई और उनकी कब्र जन्नतुल बकी मदीना में स्थित है। https://books.google.com/books?id=s-VhDwAAQBAJ&q=%D8%AD%D9%84%D9%8A%D9%85%D8%A9+%D8%A7%D9%84%D8%B3%D8%B9%D8%AF%D9%8A%D8%A9+8+%D8%AA%D9%88%D9%81%D9%8A&pg=PT12 بلغة الظرفاء في تاريخ الخلفاء January 2010 9782745162526 वह जिस स्थान पर रहती थीं और जहाँ हजरत मुहम्मद पले-बढ़े थे उसके अवशेष आज भी मौजूद हैं। यह भी देखें संदर्भ श्रेणी:जन्म वर्ष अज्ञात श्रेणी:सहाबिया