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दुर्गन्धनाशक
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deodorant जनवरी २०२६
thumb|दुर्गन्धनाशक के उत्पाद
thumb|333x333px|रेक्सोना en Rexona, एक प्रमुख गन्ध‑निवारक उत्पाद
दुर्गन्धनाशक अथवा डिओडरन्ट (en deodorant) वह पदार्थ है जिसे शरीर पर इस उद्देश्य से लगाया जाता है कि पसीने के कारण उत्पन्न होने वाली दुर्गन्ध को रोका जा सके अथवा ढका जा सके। यह दुर्गन्ध प्रायः बगल, जाँघों के जोड़ अथवा पैरों में पसीने के जीवाणु‑अपघटन से उत्पन्न होती है। दुर्गन्धनाशक का एक उपवर्ग ऐन्टी पर्सपिरन्ट (en antiperspirant) कहलाता है, जो पसीना आने की प्रक्रिया को ही रोक देता है; यह प्रायः स्वेद‑ग्रन्थियों को अवरुद्ध करके कार्य करता है। ऐन्टी-पर्सपिरन्ट का उपयोग शरीर के उन भागों पर भी किया जाता है जहाँ अत्यधिक पसीना असुविधाजनक अथवा असुरक्षित हो सकता है। दुर्गन्धनाशक के अन्य प्रकार पसीना आने देते हैं, परन्तु पसीने पर होने वाली जीवाणु‑क्रिया को रोककर दुर्गन्ध उत्पन्न नहीं होने देते।http://www.sciencebasedmedicine.org/cutting-the-other-breast-off-does-not-improve-breast-cancer-survival/ Breast cancer myths: No, antiperspirants do not cause breast cancer Gorski D David Gorski October 6, 2014 Science-Based Medicine https://web.archive.org/web/20141008154148/http://www.sciencebasedmedicine.org/cutting-the-other-breast-off-does-not-improve-breast-cancer-survival/ October 8, 2014 October 9, 2014 liveNamer M, Luporsi E, Gligorov J, Lokiec F, Spielmann M September 2008 L'utilisation de déodorants/antitranspirants ne constitue pas un risque de cancer du sein The use of deodorants/antiperspirants does not constitute a risk factor for breast cancer https://www.jle.com/10.1684/bdc.2008.0679 Bulletin du Cancer Comprehensive literature review fr 95 9 871–80 10.1684/bdc.2008.0679 July 11, 2025 18829420
उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में “मम” नामक प्रथम व्यावसायिक दुर्गन्धनाशक का आविष्कार किया गया और उसका पेटेण्ट कराया गया। आधुनिक ऐन्टी‑पर्सपिरन्ट का सूत्रीकरण बीसवीं शताब्दी के मध्य में विकसित हुआ और बाद में स्प्रे‑आधारित दुर्गन्धनाशकों में प्रयुक्त होने लगा।Joey Green's Incredible Country Store: Potions, Notions and Elixirs of the Past--and How to Make Them Today Joey Green Rodale Books 2004 978-1-57954-848-3 1 356 The Apothecary: Elixiers, Remedies, and Tonics https://archive.org/details/joeygreensincred0000gree/page/356
समग्र परिचय
मानव‑शरीर में पसीना दो प्रकार की स्वेद‑ग्रन्थियों द्वारा उत्पन्न होता है— (१) एक्राइन स्वेद‑ग्रन्थियाँ, जो शरीर की अधिकांश त्वचा पर पाई जाती हैं और जल‑सदृश, गन्ध‑रहित पसीना उत्पन्न करती हैं।
(२) एपोक्रीन स्वेद‑ग्रन्थियाँ, जो बगल तथा जाँघों के जोड़ में स्थित होती हैं और अधिक तैलीय, “गाढ़ा” पसीना उत्पन्न करती हैं। इस पसीने में अपशिष्ट प्रोटीन, वसीय अम्ल तथा कार्बोहाइड्रेट का अंश होता है, जिन्हें जीवाणु विघटित करके दुर्गन्धकारी यौगिक बना देते हैं। इसके अतिरिक्त, योनि से निकलने वाले स्त्राव पसीना नहीं होते, परन्तु कभी‑कभी उनकी गन्ध को कम करने के लिए भी दुर्गन्धनाशक का उपयोग किया जाता है।
मानव‑पसीना सामान्यतः गन्ध‑रहित होता है, जब तक कि उसमें उपस्थित कार्बनिक अवयव आर्द्र एवं उष्ण वातावरण में पनपने वाले जीवाणुओं द्वारा किण्वित न कर दिए जाएँ। मानव‑बगल शरीर की सतह पर सर्वाधिक उष्ण क्षेत्रों में से एक है, और स्वेद‑ग्रन्थियाँ वहाँ निरन्तर नमी प्रदान करती हैं। यह नमी शरीर को शीतल रखने में सहायक होती है, परन्तु जीवाणुओं के लिए अनुकूल वातावरण भी बनाती है।Stenzaly-Achtert S, Schölermann A, Schreiber J, Diec KH, Rippke F, Bielfeldt S May 2000 Axillary pH and influence of deodorants Skin Res Technol 6 2 87–91 10.1034/j.1600-0846.2000.006002087.x 11428948 20923074Kuehl BL, Fyfe KS, Shear NH March 2003 Cutaneous cleansers Skin Therapy Lett 8 3 1–4 12858234
जब वयस्क व्यक्ति बगल को क्षारीय pH वाले साबुन से धोते हैं, तो त्वचा का प्राकृतिक अम्लीय आवरण (pH ४.५–६) नष्ट हो जाता है। इससे त्वचा का pH बढ़ जाता है और त्वचा‑बाधा (स्किन बैरियर) प्रभावित होती है। अनेक जीवाणु हल्के क्षारीय वातावरण में अधिक तीव्रता से बढ़ते हैं, अतः इस स्थिति में त्वचा पर जीवाणु‑उपनिवेशन की सम्भावना बढ़ जाती है। त्वचा पर उपस्थित जीवाणु एपोक्रीन ग्रन्थियों के पसीने में मौजूद अपशिष्ट प्रोटीन तथा वसीय अम्लों पर पोषण प्राप्त करते हैं और अपने अपशिष्ट के रूप में ऐसे यौगिक छोड़ते हैं जो शरीर‑दुर्गन्ध का मुख्य कारण बनते हैं।Stenzaly-Achtert S, Schölermann A, Schreiber J, Diec KH, Rippke F, Bielfeldt S May 2000 Axillary pH and influence of deodorants Skin Res Technol 6 2 87–91 10.1034/j.1600-0846.2000.006002087.x 11428948 20923074
बगल के बाल नमी को त्वचा से दूर खींचकर त्वचा को अपेक्षाकृत शुष्क रखते हैं, जिससे जीवाणु‑वृद्धि कम होती है और दुर्गन्ध भी घटती है। एपोक्रीन स्वेद‑ग्रन्थियाँ यौवनारम्भ (प्यूबर्टी) तक सक्रिय नहीं होतीं, इसी कारण शरीर‑दुर्गन्ध प्रायः उसी आयु से स्पष्ट होने लगती है।Kuehl BL, Fyfe KS, Shear NH March 2003 Cutaneous cleansers Skin Therapy Lett 8 3 1–4 12858234
दुर्गन्धनाशक उत्पाद सामान्यतः दो प्रकार से कार्य करते हैं—
(१) पसीना आने की प्रक्रिया को रोककर
(२) पसीना आने देने पर भी त्वचा पर पसीने के अपघटन हेतु आवश्यक जीवाणु‑क्रिया को रोककर।October 2016
सन्दर्भ
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