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हैजियोग्राफी
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अंग्रेज़ी सितंबर 2026
हैजियोग्राफी या संत-चरित्र ग्रंथ (प्राचीन ग्रीक ἅγιος hágios पवित्र और -γραφία -graphía 'लेखन' से निर्मित ) hagiography किसी संत या धार्मिक नेता की जीवनी होती है। बिस्तार से कहे तो, यह दुनिया के किसी भी धर्म के उपदेशक, पुजारी, संस्थापक, संत, भिक्षु, ईसाई तपस्विन या धार्मिक प्रतीक की एक अत्यधिक प्रशंसनीय और आदर्श जीवनी को संदर्भित करता है। https://books.google.com/books?id=nDnCDAAAQBAJ Hagiography and Religious Truth: Case Studies in the Abrahamic and Dharmic Traditions Rico G. Monge Bloomsbury Publishing 2016 978-1474235792 Rico G. Monge, Kerry P. C. San Chirico and Rachel J. Smith 7–22 https://books.google.com/books?id=efCaDwAAQBAJ&pg=PA137 Beyond Parochial Faith: A Catholic Confesses Jeanette Blonigen Clancy Wipf and Stock Publishers 2019 978-1532672828 137 Byzantine Religious Culture Rapp Claudia Brill Academic 2012 978-9004226494 289–311 Hagiography and the Cult of Saints in the Light of Epigraphy and Acclamations 10.1163/9789004226494_017 प्रारंभिक ईसाई संत जीवनियों में जीवनी या la बिटा (लैटिन शब्द जिसका अर्थ जीवन है, जिससे अधिकांश मध्ययुगीन जीवनियों के शीर्षक की शुरुआत होती है), संत के कार्यों व चमत्कारिक कृत्यों का विवरण, संत की शहादत का वृत्तांत (जिसे la पैसिओ कहा जाता है), या इन सभी का एक संयोजन शामिल हो सकता है।
ईसाई हैजियोग्राफी मुख्य रूप से रोमन कैथोलिक चर्च, पूर्वी रूढ़िवादी चर्च, ओरिएंटल रूढ़िवादी चर्चेस और चर्च ऑफ द ईस्ट द्वारा घोषित किए गए पुरुषों और महिला सन्तों के जीवन और विशेष रूप से उनके चमत्कारों पर केंद्रित होती हैं। बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म, ताओ धर्म, इस्लाम, सिख धर्म और जैन धर्म जैसी अन्य धार्मिक परंपराओं में भी अपने संतों, गुरुओं और अन्य व्यक्तियों के संबंध में संत-चरित्र ग्रंथों (जैसे सिख जनमसाखी) की रचना की जाती है और उन्हें संरक्षित रखा जाता है।।Jonathan Augustine (2012), Buddhist Hagiography in Early Japan, Routledge, 978-0415646291Robert Ford Campany (2002), To Live as Long as Heaven and Earth: A Translation and Study of Ge Hong's Traditions of Divine Transcendents, University of California Press, 978-0520230347
संत-चरित्र ग्रंथों (विशेष रूप से मध्यकालीन रचनाओं) में संस्थागत एवं स्थानीय इतिहास के विवरणों के साथ-साथ लोकप्रिय संप्रदायों, रीति-रिवाजों और परंपराओं के महत्वपूर्ण साक्ष्य भी देखने को मिलते हैं।Davies, S. (2008). Archive and manuscripts: contents and use: using the sources (3rd ed.). Aberystwyth, UK: Department of Information Studies, Aberystwyth University. p. 5.20. 978-1906214159
ईसाई धर्म
विकास
प्रारंभिक ईसाई चर्च में संत-चरित्र साहित्य (हैजियोग्राफी) एक महत्वपूर्ण साहित्यिक विधा थी, जो प्रेरणादायक कहानियों और किंवदंतियों के साथ कुछ ऐतिहासिक जानकारियाँ भी प्रदान करती थी। किसी विशिष्ट संत के विवरण में उनकी जीवनी या विटा (जिसमें उनके कार्यों या चमत्कारों का उल्लेख होता है), उनके बलिदान का वृत्तांत (पैसिओ), या फिर इन सभी का एक समावेशन हो सकता है।
संतों की जीवनियाँ लिखने की शुरुआद सबसे पहले रोमन साम्राज्य में हुई थि। ईसाई शहीदों से जुड़ी किंवदंतियों और कथाओं का दस्तावेजीकरण शुरू हुआ। उनकी मृत्यु की तिथियाँ ही आगे चलकर शहीद-स्मृति सूचियों (मार्टिओलजिस्) का आधार बनीं। चौथी शताब्दी में, संतों के जीवन के तीन मुख्य प्रकार थेः
वार्षिक पंचांग सूची या या मेनायन (ग्रीक शब्द मेनायन का अर्थ है मासिक और शाब्दिक रूप से ईसका अर्थ है चंद्र। यह नपुंसक लिंग विशेषण है)। इसमें धर्मोपदेशों के दौरान पढ़े जाने वाले संतों के जीवन-चरित्र शामिल होते हैं
सिनैक्सारियन (शब्द का अर्थ है एकत्र करना )। यह तिथियों के अनुसार व्यवस्थित संतों की जीवन-गाथाओं का एक संक्षिप्त रूप (संक्षिप्तिकरण) होता है।
पातेरिकॉन: इसका अर्थ है पितृगण संबंधी। यह सूची संकलक द्वारा चुने गए विशिष्ट संतों की जीवनियों या चरित्र-संग्रह का विवरण होता है।
संतों की शुरुआती जीवनियाँ चौथी शताब्दी और उसके बाद से तपस्वी जीवन बिताने वाले 'डेजर्ट फादर्स' (मरुभूमि के संतों) पर केंद्रित थीं। मिस्र के संत एंथनी के जीवन को आमतौर पर ईसाई जीवनी को इस नई शैली का पहला उदाहरण माना जाता है।https://academic.oup.com/edited-volume/29470/chapter/247165478 Hagiography Talbot Alice-Mary Alice-Mary Talbot 21 November 2012 academic.oup.com 10.1093/oxfordhb/9780199252466.013.0082 https://web.archive.org/web/20240421201110/https://academic.oup.com/edited-volume/29470/chapter/247165478 21 April 2024 2024-04-21
मध्यकालीन इंग्लैंड
अंग्रेज़ संत-चरित्र लेखकों में, एंज़म के एबट एलफ्रिक से अधिक जानकार कोई नहीं था। बे इस शैली के महत्व से भली-भांति परिचित थे। उनकी रचना लाइव्स ऑफ द सेंट्स में संत दिवसों पर दिए जाने वाले धर्मोपदेशों का एक संकलन है, जिनका पालन पहले चर्च ऑफ इंग्लैंड द्वारा किया जाता था।https://iiif.bl.uk/uv/#?manifest=https://bl.digirati.io/iiif/ark:/81055/vdc_100058085880.0x000001 The Lives of the Saints Ælfric of Eynsham Ælfric of Eynsham 4 September 2026 इस ग्रंथ में दो प्रस्तावनाएँ हैं, एक लैटिन में और एक पुरानी अंग्रेजी में। इसमे उनतालीस संतों के जीवन-चरित्र का बर्णन हैं। ग्रंथ मे सबसे पहेले यीशु मसीह का उल्लेख आता हैं। ग्रंथ मे तीन और विवरण मिलता हैं जिनसे कोई विशेष संत दिवस नहीं जुड़ा है। इसमें इंग्लैंड तथा यूरोपीय महाद्वीप इन दोनों क्षेत्रों के कई संतों के जीवन का वर्णन है, जो शुरुआती समय के सबसे प्रारंभिक संतों की याद दिलाता है।
दोब्रिटेन में स्थानीय लोकभाषाओं के नाटकों में संतों के चरित्र-चित्रण के दो ज्ञात उदाहरण मिलते हैं। ये कॉर्निश भाषा की दो प्रसिद्ध नाट्य-कृतियाँ हैं; जो ब्यूनन्स मेरियसेक और ब्यूनन्स के के नाम से प्रसिद्ध है। इनमें से ब्यूनन्स मेरियसेक संत मेरियसेक और ब्यूनन्स के संत के के जीवन पर आधारित हैं।https://books.google.com/books?id=f899xH_quaMC&q=Celtic+Culture Celtic Culture: A Historical Encyclopedia Koch John T. ABC-CLIO 2006 1851094407 203–205 23 November 2009
संदर्भ