411 REFERENCE · Wikipedia
भारत में स्वर्ण बाज़ार
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
भारत में स्वर्ण बाज़ार भौतिक सोने, आभूषणों, स्वर्ण-समर्थित वित्तीय उत्पादों और सोने के बदले ऋण से जुड़ा एक बड़ा बाजार है। भारत में सोना सांस्कृतिक संपत्ति, बचत के साधन और मूल्य-संग्रह के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी मांग विवाह, त्योहारों, घरेलू बचत, निवेश की प्रवृत्ति, आयात शुल्क, विनिमय दरों और घरेलू विनियमन से प्रभावित होती है।India's gold market and demand https://www.gold.org/about-gold/gold-demand/geographical-diversity/india World Gold Council 27 May 2026
भारत का स्वर्ण बाज़ार कई अलग-अलग माध्यमों से बना है, जिनमें आभूषण, खुदरा बुलियन, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, स्वर्ण एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड, स्वर्ण ऋण, पुनर्चक्रित सोना, अधिकृत आयात चैनल और गिफ्ट सिटी में इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज के माध्यम से विनिमय-आधारित बुलियन व्यापार शामिल हैं।Sovereign Gold Bond (SGB) https://www.rbi.org.in/commonman/English/scripts/FAQs.aspx?Id=1658 Reserve Bank of India 27 May 2026About India International Bullion Exchange IFSC Limited https://www.iibx.co.in/static/about.aspx India International Bullion Exchange IFSC Limited 27 May 2026 28 मई 2026 https://web.archive.org/web/20260528134313/https://www.iibx.co.in/static/about.aspx dead
पृष्ठभूमि
भारत में सोना लंबे समय से घरेलू बचत, धार्मिक परंपराओं, सामाजिक उपहारों और विवाह संबंधी रीति-रिवाजों से जुड़ा रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, भारत में सोना संस्कृति में केंद्रीय भूमिका रखता है और इसे मूल्य-संग्रह, संपत्ति तथा सामाजिक प्रतिष्ठा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी सोने के प्रति झुकाव केवल सांस्कृतिक नहीं है; आभूषणों की वहनीयता, टिकाऊपन और आवश्यकता पड़ने पर गिरवी रखने की क्षमता इसे व्यावहारिक बचत-साधन भी बनाती है।
भारत में निजी परिवारों के पास सोने का बड़ा भंडार माना जाता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की भारत स्वर्ण बाज़ार श्रृंखला के अनुसार, भारतीय परिवारों के पास सोने की मात्रा 25,000 टन तक आंकी गई है।Gold investment market and financialisation: India gold market series https://www.gold.org/goldhub/research/gold-investment-market-and-financialisation-india-gold-market-series World Gold Council 12 July 2023 27 May 2026 इस कारण भारत में स्वर्ण नीति केवल उपभोग या आयात से संबंधित नहीं है, बल्कि घरेलू बचत, वित्तीय समावेशन, आभूषण उद्योग, कर नीति और औपचारिक वित्तीय उत्पादों से भी जुड़ी है।
मांग और घरेलू स्वामित्व
भारत में स्वर्ण मांग का बड़ा भाग आभूषणों से संबंधित है। विवाह, त्योहार और पारिवारिक समारोह सोने की मांग को प्रभावित करते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, भारत में विवाह वार्षिक सोने की मांग का लगभग आधा हिस्सा उत्पन्न करते हैं। इसके अतिरिक्त, सोना बचत और निवेश के रूप में भी खरीदा जाता है, जिसमें सिक्के, छड़ें, एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड और सरकार द्वारा जारी स्वर्ण-सम्बद्ध प्रतिभूतियां शामिल हैं।
घरेलू स्वर्ण बाज़ार अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत, रुपये और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर, आयात शुल्क तथा स्थानीय करों से प्रभावित होता है। भारत अपनी स्वर्ण आवश्यकता का बड़ा भाग आयात से पूरा करता है, इसलिए आयात लागत में बदलाव घरेलू कीमतों, प्रीमियम, खुदरा मांग और अनौपचारिक प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।
आयात, शुल्क और कराधान
भारत विश्व के प्रमुख सोना-आयातक देशों में से एक है। आयातित सोना अधिकृत बैंकों, नामित एजेंसियों और अन्य विनियमित प्रतिभागियों के माध्यम से घरेलू बाज़ार में आता है। आयात नीति इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सोने का आयात चालू खाते, विदेशी मुद्रा बहिर्गमन और घरेलू मूल्य-निर्धारण को प्रभावित कर सकता है।
केंद्रीय बजट 2024–25 में भारत सरकार ने सोने और चांदी पर सीमा शुल्क घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया था।Summary of the Union Budget 2024-2025 https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2035618 Press Information Bureau, Government of India 23 July 2024 27 May 2026 मई 2026 में वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने भारत के स्वर्ण बाज़ार पर प्रकाशित अद्यतन में बताया कि सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया।India gold market update: Import tightening https://www.gold.org/goldhub/gold-focus/2026/05/india-gold-market-update-import-tightening World Gold Council May 2026 27 May 2026
आयात शुल्क में बदलाव आधिकारिक आयात, घरेलू प्रीमियम या डिस्काउंट, खुदरा मांग और अनौपचारिक प्रवाह की संभावना को प्रभावित कर सकता है। उच्च आयात शुल्क से वैध चैनलों और अनौपचारिक चैनलों के बीच मूल्य-अंतर बढ़ सकता है, जबकि कम शुल्क आधिकारिक आयात को अधिक आकर्षक बना सकता है।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड भारत सरकार की प्रतिभूतियां हैं, जिन्हें ग्राम सोने में अंकित किया जाता है। इन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा भारत सरकार की ओर से जारी किया जाता है और इनका उद्देश्य भौतिक सोना रखने के विकल्प के रूप में निवेशकों को स्वर्ण मूल्य से जुड़ा वित्तीय साधन उपलब्ध कराना है।
इन बॉन्डों में निवेशक को भौतिक धातु का भंडारण नहीं करना पड़ता। बॉन्ड की परिपक्वता पर भुगतान भारतीय रुपये में किया जाता है और मोचन मूल्य सोने की प्रचलित कीमत से जुड़ा होता है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड भारत में सोने के स्वामित्व को वित्तीय उत्पादों के रूप में औपचारिक बनाने की नीति से जुड़े हैं। वे भौतिक बुलियन से भिन्न हैं, क्योंकि निवेशक किसी विशिष्ट बार या सिक्के का स्वामी नहीं होता, बल्कि सोने से संबद्ध सरकारी प्रतिभूति रखता है।
स्वर्ण ऋण
स्वर्ण ऋण भारत की ऋण-व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग हैं। ऐसे ऋणों में उधारकर्ता सोने के आभूषण या अन्य पात्र स्वर्ण वस्तुएँ गिरवी रखकर ऋण प्राप्त करता है। स्वर्ण ऋण बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियाँ और अन्य विनियमित ऋणदाता प्रदान करते हैं।
भारतीय रिज़र्व बैंक ने स्वर्ण आभूषणों के बदले दिए जाने वाले ऋणों में loan-to-value अनुपात को विनियमित किया है। 2014 की अधिसूचना में आरबीआई ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए स्वर्ण आभूषणों के विरुद्ध ऋण पर loan-to-value अनुपात 75 प्रतिशत से अधिक न रखने की आवश्यकता बताई थी।Lending Against Security of Single Product – Gold Jewellery https://www.rbi.org.in/commonman/English/Scripts/Notification.aspx?Id=1329 Reserve Bank of India 8 January 2014 27 May 2026
स्वर्ण ऋण घरेलू सोने को ऋण-सुरक्षा के रूप में उपयोग में लाते हैं, लेकिन वे सामान्यतः गिरवी रखे गए आभूषणों को निवेश-ग्रेड बुलियन में परिवर्तित नहीं करते। गिरवी रखा गया सोना रुपये में दिए गए ऋण का संपार्श्विक रहता है, न कि किसी आवंटित बुलियन होल्डिंग या अंतरराष्ट्रीय थोक बार-श्रृंखला का हिस्सा।
हॉलमार्किंग और उपभोक्ता संरक्षण
भारत में सोने के आभूषणों और बहुमूल्य धातु की वस्तुओं के लिए हॉलमार्किंग प्रणाली लागू है। भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार, हॉलमार्किंग बहुमूल्य धातु की वस्तुओं में धातु की आनुपातिक मात्रा के सही निर्धारण और आधिकारिक अभिलेखन से संबंधित है।Hallmarking overview https://www.bis.gov.in/hallmarking-overview/?lang=en Bureau of Indian Standards 27 May 2026
हॉलमार्किंग का उद्देश्य उपभोक्ताओं को अनियमित या गलत शुद्धता वाले सोने और चांदी से बचाना तथा भारत को प्रमुख स्वर्ण बाज़ार केंद्र के रूप में विकसित करने में सहायता करना है। भारतीय मानक ब्यूरो उपभोक्ताओं के लिए हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन संख्या की जांच जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है।Consumer Protection https://www.bis.gov.in/hallmarking-overview/consumer-protection/?lang=en Bureau of Indian Standards 27 May 2026
हॉलमार्किंग और अंतरराष्ट्रीय थोक बुलियन मानक अलग-अलग विषय हैं। हॉलमार्किंग मुख्यतः आभूषणों और बहुमूल्य धातु की वस्तुओं की शुद्धता तथा उपभोक्ता संरक्षण से संबंधित है, जबकि गुड डिलीवरी जैसे मानक अंतरराष्ट्रीय थोक बुलियन बाज़ार में उपयोग होने वाली छड़ों की विशिष्टताओं और रिफाइनरियों की मान्यता से संबंधित होते हैं।
इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज
इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय बुलियन एक्सचेंज है, जिसकी स्थापना गिफ्ट आईएफएससी, गांधीनगर, गुजरात में की गई है। यह इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी के विनियामक ढाँचे के अंतर्गत कार्य करता है।
IIBX भारत में विनियमित बुलियन व्यापार के लिए विनिमय-आधारित संरचना प्रदान करता है। इसका उद्देश्य पात्र प्रतिभागियों के लिए पारदर्शी मूल्य-खोज, बुलियन व्यापार और संबंधित सेवाओं को समर्थन देना है।
भौतिक बुलियन और आवंटित सोना
भारतीय स्वर्ण बाज़ार में घरेलू खुदरा बुलियन और अंतरराष्ट्रीय थोक बुलियन बाज़ार से जुड़े चैनल दोनों मौजूद हैं। घरेलू खरीदार डीलरों, आभूषण विक्रेताओं या अन्य खुदरा माध्यमों से छड़ें और सिक्के खरीद सकते हैं, जबकि संस्थागत और पात्र प्रतिभागी अधिक औपचारिक बुलियन बाज़ार चैनलों तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं।
आवंटित सोना उस धातु को कहा जाता है जिसे किसी विशिष्ट स्वामी के लिए रखा जाता है और जिसका समर्थन अभिरक्षा रिकॉर्ड, बार सूची, क्रम संख्या या अन्य स्वामित्व दस्तावेजों से किया जा सकता है। यह कागजी स्वर्ण उत्पादों, स्वर्ण-समर्थित प्रतिभूतियों या ऐसे दावों से अलग है जो किसी विशिष्ट बार पर स्वामित्व नहीं देते। भारतीय संदर्भ में आभूषण, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड, स्वर्ण ऋण, घरेलू बुलियन और विनिमय-आधारित बुलियन साधन सोने के अलग-अलग प्रकार के आर्थिक संपर्क प्रस्तुत करते हैं।Indian Gold Market: SGB, Gold Loans, and Allocated Bullion Pathways https://goldenarkreserve.com/blog/indian-gold-market-sgb-gold-loans-allocated-bullion/ Golden Ark Reserve 25 May 2026 27 May 2026
IIBX की आधिकारिक वेबसाइट इसे भारत में बुलियन आयात और आईएफएससी ढाँचे के अंतर्गत बुलियन व्यापार से जुड़ी अवसंरचना के रूप में प्रस्तुत करती है।IIBX - India International Bullion Exchange IFSC Limited https://www.iibx.co.in/ India International Bullion Exchange IFSC Limited 27 May 2026
स्वर्ण ईटीएफ
स्वर्ण एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड निवेशकों को सूचीबद्ध वित्तीय साधनों के माध्यम से सोने की कीमत से जुड़ा जोखिम लेने का अवसर देते हैं। वे भारत में सोने के वित्तीयकरण का हिस्सा हैं और भौतिक छड़ों या आभूषणों को रखने के विकल्प के रूप में देखे जाते हैं। स्वर्ण ईटीएफ भंडारण और शुद्धता से जुड़े कुछ जोखिमों को कम कर सकते हैं, लेकिन वे भौतिक बुलियन के प्रत्यक्ष कब्जे या किसी विशिष्ट धातु-बार के स्वामित्व के समान नहीं होते।
पुनर्चक्रण और स्वर्ण मुद्रीकरण
भारत में परिवारों के पास उपलब्ध बड़े स्वर्ण भंडार के कारण पुनर्चक्रण और स्वर्ण मुद्रीकरण नीति का महत्त्व बढ़ा है। घरेलू रूप से उपलब्ध सोने को औपचारिक चैनलों में लाने से आयात पर निर्भरता कम हो सकती है और निष्क्रिय घरेलू संपत्ति का वित्तीय उपयोग बढ़ सकता है। हालांकि, घरेलू सोना अक्सर आभूषण के रूप में रखा जाता है और उससे भावनात्मक तथा सांस्कृतिक संबंध जुड़े होते हैं, जिसके कारण औपचारिक मुद्रीकरण योजनाओं में भागीदारी सीमित रह सकती है।
इन्हें भी देखें
सोना
स्वर्ण मान
स्वर्ण भंडार
गुड डिलीवरी
सार्वभौमिक स्वर्ण बांड योजना
बीआईएस हॉलमार्क
भारतीय रिज़र्व बैंक
भारतीय मानक ब्यूरो
भारतीय अर्थव्यवस्था
संदर्भ
श्रेणी:भारत में सोना
श्रेणी:भारत की अर्थव्यवस्था